JNU छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया पुलिस रिमांड पर
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जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष को पूछताछ के लिए पुलिस ने तीन दिन के रिमांड पर लिया है। पुलिस ने जेएनयू में देश विरोधी नारेबाजी व हंगामे के सिलसिले में शुक्रवार की सुबह गिरफ्तार कर शाम को कोर्ट में पेश किया।
पुलिस ने कोर्ट में पूरे घटनाक्रम की वीडियो सीडी भी पेश की। पुलिस ने पांच दिन का रिमांड मांगते हुए कहा कि उसके आतंकी संगठनों से कोई संबंध तो नहीं है, इसकी छानबीन पुलिस करेगी।
पटियाला हाउस अदालत के महानगर दंडाधिकारी लवलीन ने जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार से पूछताछ के लिए दिल्ली पुलिस को तीन दिन का रिमांड दिया है। अदालत ने कहा कि पुलिस के मुताबिक आरोपी देश विरोधी नारेबाजी में शामिल था और इसकी पुष्टि वीडियो सीडी से भी हो रही है।
कन्हैया के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज
इसके अलावा उसके किसी आतंकी संगठन से संबंधों की जांच भी पुलिस करना चाहती है और मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी करनी है। पुलिस ने कन्हैया के खिलाफ देशद्रोह, आपराधिक साजिश संबंधी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस अब कन्हैया को 15 फरवरी को कोर्ट में पेश करेगी। इस मामले में पुलिस ने कन्हैया के साथ पांच अन्य लोगों अनंत प्रकाश, अनिर्बन भट्टाचार्य, आशुतोष कुमार, रामा नागा, उमर खालिद को भी नामजद किया है।
पुलिस ने अदालत को बताया कि कन्हैया कुमार ने मंगलवार को जेएनयू परिसर में आयोजित प्रदर्शन में देश के खिलाफ नारेबाजी की और वह मौके पर मौजूद था। उसकी पहचान वहां के एक सुरक्षाकर्मी ने भी की है।
अदालत ने पुलिस द्वारा पेश सीडी को चलाकर देखा। इस सीडी में जेएनयू परिसर में काफी संख्या में छात्र देश विरोधी व सरकार विरोधी नारे लगा रहे हैं। छात्रों का एक गुट कश्मीर की आजादी के नारे लगा रहे हैं। दूसरी ओर छात्रों का अन्य गुट इन गुटों से भिड़ रहा है। एक जगह पर कन्हैया कुमार भी नजर आ रहा है।
कन्हैया का आरोप उसे इस मामले में फंसाया जा रहा है
कन्हैया ने अपने बचाव में कोर्ट को बताया कि वह ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन का सदस्य है और उसने चुनावों में एबीवीपी के उम्मीदवार को हराया था। इसलिए उसे इस मामले में फंसाया जा रहा है।
वह भारत के शासन और संविधान में विश्वास करता है और उसका समर्थन करता है। वह और उसका संगठन कभी भी देश विरोधी विचारधारा व नारेबाजी में शामिल नहीं रहा। उसने पुलिस पर उसके परिजनों व जानकारों को गिरफ्तारी की सूचना नहीं देने का आरोप लगाया।
इस मामले में अधिवक्ता बजींदर सिंह ने कहा कि उन्हें कोर्ट में नहीं जाने दिया गया। मौके पर पहुंचे प्रोफेसर दिनेश वार्ष्णेय ने कहा कि सरकार पांच राज्यों के चुनाव के मद्देनजर यह सब कर रही है। हम लोग कम्युनिस्ट हैं और हम कभी देश विरोधी नहीं रहे। कश्मीर हमारा अभिन्न अंग है और इस पर हमारी नीति बिल्कुल स्पष्ट है।