कनावनी: दबंगों ने फिर उजाड़ी बस्ती
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नोएडा के कनावनी में दो दिन पहले हुए बवाल के बाद अभी तक माहौल शांत नहीं हुआ है। मंगलवार रात एक बार फिर गांव में दबंगों ने दलितों और उनके किराएदारों में दहशत फैलाई।
शाम को बीस-तीस असलहाधारियों ने करीब तीस से चालीस किराएदारों को गांव से खदेड़ दिया। इस दौरान पुलिस मूकदर्शक बनी रही।
जिला प्रशासन की नाक के नीचे कनावनी गांव में दबंगों का कहर तीसरे दिन भी जारी रहा। गांव में दलितों के मकान में रहने वाले किराएदारों को देर शाम 20 से 25 हथियारबंद बदमाशों ने असलहों के बल पर पक्के मकान खाली करवाए।
जला दिया आशियाना
दबंगों ने दलितों की जमीन पर बनी झोपड़ियों को तोड़कर उन्हें दूसरी जगह जाने को मजबूर किया। कुछ घरों में तोड़फोड़ कर दो बाइकें भी जला दीं। ऐसे करीब तीस से चालीस परिवार मंगलवार शाम तक खदेड़ दिए गए। जिनमें से कुछ बुधवार को अपना सामान घरों से निकाल रहे थे।
इन किराएदारों में से एक रतन दास ने बताया कि मंगलवार रात 20 से 25 हथियारबंद दबंगों ने असलहों के बल पर दो घंटे में मकान खाली करने का अल्टीमेटम दिया था। तीस से चालीस परिवार तो मकान छोड़कर भी चले गए हैं।
पुलिस भी उन पर कार्रवाई नहीं कर रही है। वहीं, पास में रहने वाली प्रीति ने बताया कि रिवाल्वर दिखाकर मकान खाली करने के लिए धमकी दी है। वह अपने पति और बच्चों के साथ घर से सामान बाहर निकाल रही है।
मूकदर्शक बन बैठी है पुलिस
कनावनी में लगातार तीन दिनों से दबंगों का आतंक जारी है, फिर भी पुलिस-प्रशासन मूकदर्शक बनकर बैठा हुआ है। सोमवार रात स्कूल में तोड़फोड़ की घटना के बाद पकड़े गए तीनों लोगों को गुर्जर समुदाय ने अपना आदमी मानने से मना कर दिया था।
जबकि पुलिस का कहना था कि यह दूसरे पक्ष के लोग हैं। मंगलवार देर रात करीब 12 से एक बजे के बीच डीआईजी मेरठ रेंज के. सत्यनारायण ने कनावनी गांव का दौरा किया। इस दौरान वह मृतक राहुल के परिजनों से मिले और गांव के कुछ लोगों से भी बातचीत की।
गांव में सोमवार सुबह एक घंटे से अधिक समय तक फायरिंग में एक युवक की मौत और 12 लोग घायल होने वाले मामले में पुलिस ने एक पक्ष के 18 लोगों पर नामजद रिपोर्ट दर्ज की है। जिसमें से अस्पताल में इलाज करा रहे तीन घायलों को भी पुलिस ने गिरफ्तारी दिखाई है। मामले में 15 आरोपी अभी फरार हैं।
गाड़ियों में घूम रहे असलहाधारी
पुलिस के होते हुए भी खुलेआम गाड़ियों में असलहाधारी घूम रहे हैं। एक साथ कई गाड़ियों में आने वाले दबंगों के निकलने भर से गांव में दलितों और बाहर से आकर रह रहे किराएदारों में दहशत फैल जाती है।
सूत्रों के अनुसार इस मामले में एक जाति विशेष के नोएडा के एक बड़े बिल्डर का नाम आ रहा है। जिसका सीधा संबंध एक बड़े ताकतवर मंत्री से बताया जा रहा है। इस कारण पुलिस को मूकदर्शक बने रहने का निर्देश दिया गया है।
दादरी क्षेत्र के एसडीएम राजेश यादव ने कहा कि प्रशासन के दखल से पूर्ण रूप से कनावनी गांव में शांति है। मामले में दूसरा पक्ष गांव से बाहर है। अगर वह शिकायत करते हैं तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
'हत्या का बदला लेना चाहते हैं दबंग'
पुलिस-प्रशासन ने यदि बिगड़ रही व्यवस्थाओं पर काबू न किया तो किसी भी दिन बड़ी घटना हो सकती है। आरोप है कि दबंग छात्र की हत्या का बदला लेने की फिराक में घूम रहे हैं। घटना को तीन होने को हैं लेकिन हालातों में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है।
गांव में बदले की भावना इस कदर हावी हो रही हैं कि दलित और गुर्जर बिरादरी के पुराने संबंध भी काम नहीं आ रहे हैं। एक दूसरे के साथ सुख-दुख में भाग लेने वाले दोनों बिरादरी के लोगों ने कभी नहीं सोचा होगा कि एक 70 गज के प्लाट के लिए गांव में बदनुमा दाग लग जाएगा।
हालांकि गांव के लोग इस मसले को शांतिपूर्वक ही हल करना चाहते थे लेकिन कुछ लोगों ने इसमें आग में घी डालने का काम किया है, अब वो लोग कहां पर हैं, किसी को पता नहीं है। चूंकि गुर्जर बिरादरी के युवक की गोली मारकर हत्या की गई है। पुलिस भी जब गांव जाती है तो उसके खिलाफ गुर्जरों का गुस्सा है। इसलिए अभी तक पुलिस ने भी सख्ती नहीं दिखाई है।
दलितों में गिरफ्तारी का भी है भय
कनावनी गांव में दलित परिवार वापस लौटने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें डर सता रहा है कि दबंगों के सामने आए तो उनका कोपभाजन बनना पड़ सकता है। दूसरा डर यह भी है कि उनके ऊपर हत्या का इल्जाम भी है, तो पुलिस गिरफ्तार कर लेगी।
सोमवार से लेकर बुधवार तक दलितों का पलायन जारी रहा। दलित परिवार अपनी रिश्तेदारियों समेत ऐसे स्थानों पर छिपे हुए हैं, जहां तक लोग पहुंच न सकें। जो भी परिवार गांव से गए हैं, वे अभी वापस आने की हिम्मत नहीं जुटा पाए हैं।
घटना के बाद एक बात और देखी गई कि जब राहुल की गोली लगने से मौत हो गई थी तो जो आरोपी थे, वे मौका पाकर भाग गए थे। इस घटना से जिसका कोई लेना देना नहीं था, वे परिवार गांव में ही बने रहे और वही परिवार दबंगों के गुस्से के शिकार हुए हैं। स्थिति जब बिगड़ती चली गई तो मजबूर होकर गांव छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। घरों की हालत देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुछ भी नहीं बचा है।
एससी-एसटी आयोग की सदस्य ने किया दौरा
बुधवार को प्रदेश एससी-एसटी आयोग की सदस्य किरन जाटव ने गांव का दौरा किया। दोनों पक्षों से मिलीं और पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों से भी बात की। दलित नेता प्रेमचंद्र गौतम समेत अन्य सदस्यों के साथ शाम करीब चार बजे किरन गांव पहुंची और दलित बस्ती का दौरा किया।
हालांकि गांव में पुरुष तो कम ही मिले लेकिन महिलाओं से बातचीत की। इसके बाद वह गोलीकांड में मारे गए छात्र राहुल के घर पहुंचीं और वहां जाकर शोकाकुल परिवार से घटना की पूरी जानकारी ली।
आयोग की सदस्य ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से बात की और उनसे पूछा कि गांव में सुरक्षा के क्या प्रबंध किए गए हैं। गांव में दलितों का पलायन जारी है, जिसे क्यों नहीं रोका जा सका। अधिकारियों ने भी उन्हें बताया कि पुलिस-पीएसी तैनात है और सभी को सुरक्षा प्रदान की गई है। दौरे पर साथ में गए दलित नेता प्रेमचंद्र गौतम ने बताया कि फिलहाल दोनों पक्षों से कहा गया है कि वह शांति से रहें।
स्कूल ढहाने को लेकर दी सफाई
सोमवार की घटना के बाद कनावनी गांव में लगातार मीडिया में जाटव समाज के लोगों को गांव से भगाने और डराने की खबरों के बीच बुधवार को देशराज कसाना परिवार के लोगों ने इन घटनाओं में अपना हाथ होने से इनकार किया।
देशराज के भतीजे संतराज ने सोमवार रात गांव में जेसीबी से स्कूल ढहाने की घटना में पकड़े गए तीनों लोगों को अपना आदमी मानने से इनकार कर दिया।
पूर्व प्रधान देशराज के भतीजे और राहुल के चचेरे भाई संतराज ने बताया कि हमारे घर में तो जवान भाई की मौत हो गई थी। वहीं, कई लोग अस्पताल में भर्ती थे। ऐसे में हम किसी अन्य जगह पर कब्जा करने की फिराक में कैसे रहते। उन्होंने बताया कि स्कूल ढहाने में पकड़े गए तीनों लोगों से हमारा किसी प्रकार का सबंध नहीं है।
उड़ती हैं अफवाहें!
उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन का विवाद कई सालों से चला आ रहा था। जिसमें डूब क्षेत्र की करीब दस एकड़ भूमि पर सुभाष और नरेश ने कब्जा कर रखा था।
आरोप लगाया कि सोमवार को भी पहले से ही तीस से चालीस लोगों ने देशराज और उनके बेटों पर हमला कर दिया।
वहीं, राहुल और अन्य लोगों पर भी हमला किया गया। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों पर हमला करने की खबर को भी अफवाह बताया। पत्रकार वार्ता में मुख्य रूप से मृतक राहुल के पिता सतबीर, पृथ्वीराज कसाना, राकेश आदि लोग मौजूद रहे।