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Delhi: कला निधि संगीत महाविद्यालय ने किया निशुल्क कार्यशाला का आयोजन, मेरठ से दिल्ली तक पहुंची यात्रा
Wed, 21 May 2025 08:55 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Wed, 21 May 2025 08:55 PM IST
सार
कला निधि संगीत महाविद्यालय, प्रयाग संगीत समिति, प्रयागराज से मान्यता प्राप्त दो दशक से मेरठ में भारतीय नृत्य और संगीत के लिए गुरु गुंजन सिंह जी के निर्देशन में कार्य कर रहा है।
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कला निधि संगीत महाविद्यालय का आयोजन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कला निधि संगीत महाविद्यालय, प्रयाग संगीत समिति, प्रयागराज से मान्यता प्राप्त दो दशक से मेरठ में भारतीय नृत्य और संगीत के लिए गुरु गुंजन सिंह जी के निर्देशन में कार्य कर रहा है। गुरु गुंजन सिंह पदमविभूषण पंडित बिरजू महाराज जी से कत्थक की शिक्षा प्राप्त की है एवं कत्थक में विश्वस्तरीय कलाकार एवं नृत्य निर्देशिका है। वर्त्तमान में हुए महाकुम्भ 2025 में भी उनके द्वारा प्रस्तुत रचनओं ने अपना एक अलग स्थान बनाया। कला निधि की यात्रा मेरठ से प्रारम्भ होकर अब दिल्ली में भी अपने केंद्र को प्रारम्भ कर चुकी है।
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आज जिस प्रकार देश में युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने हेतु देश में सभी का प्रयास है उसी दिशा में यह निशुल्क कार्यशाला का आयोजन कला निधि संगीत महाविद्यालय द्वारा किया जा रहा है। समाज के किसी भी वर्ग को आर्थिक कारण से सांस्क्रतिक विरासत तक पहुंचने में वाधा न हो इसलिए ये प्रयास है। आज के उदघाटन सत्र में बहुत ही उत्साहजनक भागीदारी स्टूडेंट्स की रही।
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आज वरिष्ठ समाज सेवी एवं मंत्री, जन सेवा न्यास ट्रस्ट, डॉ कपिल जी ने सभी को जीवन में कत्थक के माध्यम से किस प्रकार अपने शास्त्रीय नृत्य से आज आपके जीवम में ताल और लय का समावेश आपके व्यक्तित्व के विकास में सहायक है एवं ह्रदय भी एक लय में काम करता है। कत्थक के माध्यम से आप अपने को प्रस्तुत करते हैं और समाज के विभिन्न विषयों को रुचिकर रूप से सब तक पहुंच सकते हैं। इसको एक स्किल डेवलपमेंट के रूप में आप देख सकते हैं और स्वयं को एक कलाकार या शिक्षक के रूप में स्थापित कर सकते है। कार्यशाला के निशुल्क आयोजन के लिए उन्होंने निर्देशिका गुंजन जी को साधुवाद दिया और इस पहल को आगे बढ़ने के लिए कहा, जिससे यह कला अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।
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कार्यशाला में सभी के कत्थक की उत्पत्ति एवं घराना के विषय में प्रशिक्षिका इशिका द्वारा बताया गया, सभी ने भूमि प्रमाण एवं तत्कार से अपना अभ्यास प्रारम्भ किया। निर्देशिका गुंजन ने सभी को रियाज के महत्व के विषय में बताया और नियमित अभ्यास के किये प्रेरित किया। कार्यशाला के आयोजन में अपर्णा , विशाल , ऋषभ एवं पलछिन का योगदान रहा।