हाईकोर्ट ब्लास्ट मामले में नाबालिग को कैद
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दिल्ली हाईकोर्ट ब्लास्ट मामले में नाबालिग दोषी को बुधवार को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने तीन साल कैद की सजा सुनाई है। बोर्ड ने सोमवार को किश्तवाड़ कश्मीर निवासी नाबालिग को दोषी ठहराया था।
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी-प्रथम) की प्रधान दंडाधिकारी विशाल सिंह ने नाबालिग को देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, युद्ध छेड़ने की कोशिश, हत्या, हत्या का प्रयास, चोट पहुंचाना, आपराधिक साजिश व अवैध गतिविधि निरोधक अधिनियम के तहत दोषी ठहराया है।
नाबालिग को सुधार गृह भेज दिया गया है।
NIA को मिले थे अहम सबूत
एनआईए को जांच के दौरान नाबालिग के खिलाफ सबूत मिले थे। जांच में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के किशोर का नाम सामने आया था। ब्लास्ट के बाद यहां के एक साइबर कैफे से मीडिया को ई-मेल भेजा गया था।
एनआईए ने वसीम अकरम मलिक, उसके भाई जुनैद अकरम मलिक, आमिर अब्बास देव व नाबालिग को किश्तवाड़ से गिरफ्तार किया था।
एनआईए ने मार्च 2012 में पेश चार्जशीट में वसीम अकरम मलिक, जुनैद अकरम मलिक, आमिर अब्बास देव, शाकिर हुसैन शेख उर्फ छोटा हाफिज, आमिर कमाल व नाबालिग के नाम शामिल किए थे।
क्या है पूरा मामला?
इस मामले में केवल वसीम अकरम मलिक व नाबालिग पर ही मुकदमा चला जबकि आमिर अब्बास देव सरकारी गवाह बन गया था। इससे उसे माफी मिल गई। वहीं, अन्य तीन आरोपियों को भगोड़ा घोषित कर दिया गया।
बोर्ड ने सितंबर 2012 में आरोप तय किए थे। नाबालिग ने आरोपों के खिलाफ मुकदमा लड़ने का फैसला किया था। इस मामले में वसीम अकरम मलिक के खिलाफ मुकदमा विचाराधीन है।
यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट के गेट नंबर पांच पर सात सितंबर 2011 को हुए ब्लास्ट से जुड़ा है। इस हमले में 15 लोगों की जान गई थी और 79 घायल हुए थे। हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन हुजी ने ली थी।