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Justice Verma Case : चीनी मिल धोखाधड़ी में सीबीआई की एफआईआर में था जस्टिस वर्मा का नाम, ओबीसी ने की थी शिकायत
Sun, 23 Mar 2025 04:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 23 Mar 2025 04:05 AM IST
सार
97.85 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अन्य आरोपियों के साथ उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की थी। जस्टिस वर्मा उस समय चीनी मिल के गैर कार्यकारी निदेशक थे और एफआईआर में उनका नाम 10वें नंबर पर था।
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Justice Yashwant Verma: Case
- फोटो : self
विस्तार
सरकारी बंगले से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद सुर्खियों में आए दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा का नाम 2018 में गाजियाबाद की सिंभावली चीनी मिल बैंक धोखाधड़ी में भी आया था।
97.85 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अन्य आरोपियों के साथ उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की थी। जस्टिस वर्मा उस समय चीनी मिल के गैर कार्यकारी निदेशक थे और एफआईआर में उनका नाम 10वें नंबर पर था। यह मामला ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) की शिकायत पर शुरू हुआ, जिसमें चीनी मिल पर फर्जी ऋण योजना के जरिये बैंक को धोखा देने का आरोप लगाया गया था।
यह भी पढ़ें : Justice Yashwant Verma: क्यों विवादों में जस्टिस यशवंत वर्मा? HC के मुख्य न्यायाधीश ने CJI को सौंपी रिपोर्ट
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बैंक की शिकायत के अनुसार, जनवरी से मार्च 2012 के बीच, ओबीसी की हापुड़ शाखा ने 5,762 किसानों को खाद और बीज खरीदने में मदद करने के लिए 148.59 करोड़ रुपये वितरित किए। समझौते के तहत, किसानों के व्यक्तिगत खातों में वितरित किए जाने से पहले धनराशि को एस्क्रो खाते में स्थानांतरित किया जाना था। सिंभावली चीनी मिल ने ऋण चुकाने और किसानों की ओर से किसी भी चूक या पहचान धोखाधड़ी को कवर करने की गारंटी दी थी।
यह भी पढ़ें : जज के घर कैश नहीं.. सिर्फ धुआं!: दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश बेदाग, दमकल विभाग के प्रमुख ने दी जानकारी
फर्जी केवाईसी दस्तावेज जमा कराए : कंपनी ने फर्जी नो योर कस्टमर (केवाईसी) दस्तावेज जमा किए और धन का गबन किया। मार्च 2015 तक, ओबीसी ने ऋण को धोखाधड़ी घोषित कर दिया। इसमें कुल 97.85 करोड़ रुपये की हानि और 109.08 करोड़ रुपये की बकाया राशि शामिल थी।
पूर्व सीएम अमरिंदर का दामाद भी था आरोपी
एफआईआर में नामजद एक और प्रमुख व्यक्ति गुरपाल सिंह था। सिंह कंपनी का उप प्रबंध निदेशक और पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का दामाद था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बाद में सीबीआई की एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की समानांतर जांच शुरू की थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का दिया था आदेश : दिसंबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऋण वितरण से जुड़े सात बैंकों की नए सिरे से सीबीआई जांच का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने कहा था कि धोखाधड़ी ने न्यायपालिका की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। हाईकोर्ट ने पाया था कि कई बैंक अधिकारियों ने सिंभावली चीनी मिल के साथ मिलकर 900 करोड़ रुपये का लोन पास किया। ओबीसी एकमात्र बैंक था जिसने प्रवर्तन निदेशालय से संपर्क किया। इसके परिणामस्वरूप कुछ संपत्तियों को जब्त किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश पलटा, सीबीआई जांच बंद
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई करते हुए, सीबीआई ने फरवरी 2024 में एक नई जांच शुरू की। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि 2009 से 2017 के बीच बैंक सिंभावली चीन मिल को लोन क्यों देते रहे, जबकि कंपनी लोन डिफॉल्टर थी। जांच में कंपनी, उसके निदेशकों और अज्ञात बैंक अधिकारियों के नाम शामिल किए गए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को पलट दिया जिससे सीबीआई को जांच बंद करनी पड़ी।
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97.85 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अन्य आरोपियों के साथ उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की थी। जस्टिस वर्मा उस समय चीनी मिल के गैर कार्यकारी निदेशक थे और एफआईआर में उनका नाम 10वें नंबर पर था। यह मामला ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) की शिकायत पर शुरू हुआ, जिसमें चीनी मिल पर फर्जी ऋण योजना के जरिये बैंक को धोखा देने का आरोप लगाया गया था।
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बैंक की शिकायत के अनुसार, जनवरी से मार्च 2012 के बीच, ओबीसी की हापुड़ शाखा ने 5,762 किसानों को खाद और बीज खरीदने में मदद करने के लिए 148.59 करोड़ रुपये वितरित किए। समझौते के तहत, किसानों के व्यक्तिगत खातों में वितरित किए जाने से पहले धनराशि को एस्क्रो खाते में स्थानांतरित किया जाना था। सिंभावली चीनी मिल ने ऋण चुकाने और किसानों की ओर से किसी भी चूक या पहचान धोखाधड़ी को कवर करने की गारंटी दी थी।
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फर्जी केवाईसी दस्तावेज जमा कराए : कंपनी ने फर्जी नो योर कस्टमर (केवाईसी) दस्तावेज जमा किए और धन का गबन किया। मार्च 2015 तक, ओबीसी ने ऋण को धोखाधड़ी घोषित कर दिया। इसमें कुल 97.85 करोड़ रुपये की हानि और 109.08 करोड़ रुपये की बकाया राशि शामिल थी।
पूर्व सीएम अमरिंदर का दामाद भी था आरोपी
एफआईआर में नामजद एक और प्रमुख व्यक्ति गुरपाल सिंह था। सिंह कंपनी का उप प्रबंध निदेशक और पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का दामाद था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बाद में सीबीआई की एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की समानांतर जांच शुरू की थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का दिया था आदेश : दिसंबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऋण वितरण से जुड़े सात बैंकों की नए सिरे से सीबीआई जांच का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने कहा था कि धोखाधड़ी ने न्यायपालिका की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। हाईकोर्ट ने पाया था कि कई बैंक अधिकारियों ने सिंभावली चीनी मिल के साथ मिलकर 900 करोड़ रुपये का लोन पास किया। ओबीसी एकमात्र बैंक था जिसने प्रवर्तन निदेशालय से संपर्क किया। इसके परिणामस्वरूप कुछ संपत्तियों को जब्त किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश पलटा, सीबीआई जांच बंद
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई करते हुए, सीबीआई ने फरवरी 2024 में एक नई जांच शुरू की। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि 2009 से 2017 के बीच बैंक सिंभावली चीन मिल को लोन क्यों देते रहे, जबकि कंपनी लोन डिफॉल्टर थी। जांच में कंपनी, उसके निदेशकों और अज्ञात बैंक अधिकारियों के नाम शामिल किए गए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को पलट दिया जिससे सीबीआई को जांच बंद करनी पड़ी।