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यहां की डेढ़ सौ कंपनियों में रोबोट बन सकते हैं 'खूनी रोबोट'

Thu, 13 Aug 2015 09:31 PM IST
Updated Thu, 13 Aug 2015 09:31 PM IST
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Just because of this 'killer robots' in one hundred companies

कुशल कामगारों की कमी से जूझ रहे औद्योगिक शहर गुड़गांव और फरीदाबाद में अब ऑटोमेशन पर जोर दिया जा रहा है। खासतौर पर ऑटो मोबाइल सेक्टर से जुड़ी कंपनियां रोबोट से काम करवा रही हैं।

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अकेले गुड़गांव में ही करीब डेढ़ सौ कंपनियों में ज्यादातर काम रोबोट कर रहे हैं, लेकिन ताज्जुब इस बात का है कि  श्रम विभाग के पास इसका कोई लेखाजोखा नहीं है।
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दोनों जिलों में कार्यरत औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कभी इस बारे में न तो कंपनियों से राय ली और न ही कभी इससे सुरक्षा को लेकर सेमिनार आयोजित कराए।
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फैक्ट्री सुरक्षा के नाम पर विभाग ने सिर्फ कागजी खानापूर्ति की। हिंद मजदूर सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष एसडी त्यागी का कहना है कि अस्थायी श्रमिकों से स्थायी प्रकृति के काम करवाए जा रहे हैं।

रोबोट बन गया था 'खूनी रोबोट'

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शायद इसीलिए मानेसर की एसकेएच मेटल कंपनी में कार्यरत उन्नाव (यूपी) निवासी 24 वर्षीय रामजी की रोबोट की चपेट में आने से मौत हो गई। औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक आरपी गुप्ता का कहना है कि फैक्ट्री एक्ट-1948 के मुताबिक कंपनी में कार्यरत सभी श्रमिकों को सुरक्षा संबंधी जानकारी देनी चाहिए।

श्रम विभाग को इस बारे में समय-समय पर जागरूक करना चाहिए। डेंजरस ऑपरेशन पर किसी अस्थायी श्रमिक को लगाना गैरकानूनी है। दुर्भाग्य की बात है कि न तो कंपनियां इन नियमों का पालन करती हैं और न तो श्रम विभाग के अधिकारी ऐसा करवाते हैं।

मारुति उद्योग कामगार यूनियन के महासचिव कुलदीप जाघूं के मुताबिक इस समय यहां करीब डेढ़ सौ कंपनियों में रोबोट से काम लिया जा रहा है। किस इंडस्ट्री में रोबोट से कैसा काम होता है और उसके खतरे क्या-क्या हैं, इसकी जानकारी श्रम विभाग को नहीं है।

क्यों बढ़ रही है इनकी तादात

Just because of this 'killer robots' in one hundred companies

ऑटो सेक्टर में वाहनों के नए-नए ब्रांड और बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उद्योगों ने अपना चेहरा बदलना शुरू किया है। ऐसे में मशीनिस्ट, टर्नर और वेल्डर ढूंढने से भी नहीं मिल रहे हैं। कार और बाइक बनाने वाली कंपनियों की ओर से गुणवत्ता पूर्ण कार्य करने का दबाव है।


ऐसे में उद्योगपतियों ने यूरोप, जापान और जर्मनी के उद्योगों से सीख ली है, जहां इंसान कम, मशीनें ज्यादा काम करती हैं। लग्जरी कारों के पुर्जे बनाने वाली फरीदाबाद की एक कंपनी इंडो ऑटोटेक के मालिक एसके जैन का कहना है कि भविष्य में ये रोबोट उत्पादन लागत भी कम करेंगे।

कुशल कामगारों की कमी है, इसलिए भविष्य में मशीनों पर और निर्भरता बढ़ेगी। वर्कर उतनी सफाई वाला माल नहीं बना पाता, जितनी समय की मांग है।

सैलरी नहीं लेते रोबोट इस वजह से होता है इनका इस्तेमाल

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-रोबोट को न सैलरी देने की जरूरत होती है और न अवकाश देना होता है।

चाय, लंच, ईएसआई व पीएफ का चक्कर नहीं।
-फैक्ट्रियों में हड़ताल आम बात है। रोबोट इससे मुक्त हैं।
-औद्योगिक दुर्घटनाएं कम होती हैं। अगर रोबोट की प्रोग्रामिंग में गड़बड़ी है तो काम नहीं करता।
-रोबोट बीच में काम नहीं छोड़ता। इससे ज्यादा काम लिया जा सकता है।
रोबोट की मदद से बनाए उत्पाद की गुणवत्ता अच्छी होती है। कबाड़ नाममात्र का होता है।

कीमत
-50 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक होती है रोबोट की कीमत
-इसे चलाने वाले इंजीनियरों के लिए जरूरी होती है विशेष ट्रेनिंग की जरूरत।

गुड़गांव, फरीदाबाद की इन कंपनियों में हो रहा है रोबोट से काम:

 -होंडा, हीरो, मारुति, जेबीएम, एचकेएन, इंडो ऑटो टेक, वीजी इंडस्ट्रीज, एस्कॉर्ट्स, जेसीबी, यामहा, शोवा इंडिया आदि।

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