एबीवीपी ने प्रियंका पर लगाया भेदभाव का आरोप, बोले- लेफ्ट वालों का जाना हालचाल, नहीं आईं हमारे पास
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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने शुक्रवार को प्रेस क्लब ऑफ इण्डिया में प्रेस वार्ता कर जेएनयू हिंसा में कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी पर घायल छात्रों में भी भेदभाव का आरोप लगाया है। एबीवीपी का आरोप है कि एम्स पहुंची प्रियंका ने घायल हुए केवल लेफ्ट छात्रों का ही हालचाल जाना। बाकी हिंसा में घायल हुए एबीवीपी संगठन से जुड़े छात्रों से बात करने से भी बचती रहीं। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि किसी भी नेता का लिए एक छात्र पार्टी लाइन से ऊपर होता है, इसके बाद राजनेताओं ने अस्पताल में गैर-जिम्मेदाराना रवैया दिखाया।
जेएनयू हिंसा में घायल एबीवीपी की सदस्य वेलेंटीना का आरोप है कि 5 जनवरी की रात अगर वह अपनी जान बचाकर कैंपस से न भागती तो लेफ्ट के छात्र उनकी जान तक लेने पर आमदा थे। नकाबपोश बदमाशों के साथ मिलकर लेफ्ट से जुड़े लोग छात्रों को दौड़ा-दौड़ा कर पीट रहे थे। इस हमले में वेलेंटीना को भी चोटें आई हैं।
राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी आरोप है कि हिंसा के बाद अस्पताल ले गए घायल छात्रों को देखने पहुंची प्रियंका गांधी से एबीवीपी का घायल छात्र शिवम बात कर अपनी साथ हुई आपबीती बताने का प्रयास कर रहा था, लेकिन उसे सुनने से प्रियंका गांधी ने इनकार कर दिया। आरोप है कि हिंसा में केवल एबीवीपी से जुड़े पेरियार हॉस्टल के छात्र-छात्राओं को निशाना बनाया गया। हिंसा के दौरान यूनिवर्सिटी में सुचारू रूप से पढ़ाई चलने का समर्थन करने वाले छात्रों को ही निशाना बनाया जा रहा था।
वहीं हिंसा में गंभीर रूप से घायल एबीवीपी सदस्य मनीष का आरोप है कि जेएनयू के बाहर आखिर इतनी जल्दी लेफ्ट से जुड़े बड़े राजनेता कैसे पहुंच गए? ऐसे कई और अन्य सवाल हैं जो शिक्षण संस्थान को बदनाम करने की साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। एबीवीपी ने दिल्ली पुलिस की जांच पर संतुष्टी जताते हुए भरोसा जताया है।
वाट्सएप चैट में कुछ अराजकतत्वों ने बदनाम करने का प्रयास
जेएनयू हिंसा के बाद एक वाट्सएप चैट वायरल होने के संबंध में एबीवीपी पदाधिकारियों का कहना है कि संगठन को बदनाम करने के लिए कुछ लोगों ने ग्रुप में ऐसे चैट को डाला था। यह देखकर एबीवीपी सदस्य योगेंद्र ने उस वाट्सएप ग्रुप को छोड़ दिया था। जितने भी लोगों ने उस पर हिंसा की वाट्सएप चैट की थी उनका संगठन से कोई लेना देना नहीं है। दिल्ली पुलिस के पास उन लोगों के मोबाइल नम्बर हैं, जो जांच सामने आ जाएगा। संगठन से जुड़ा बताकर कर रहे बदनाम
राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी का कहना है कि हिंसा में दिख रहे कुछ लोग खुद को एबीवीपी से जुड़ा बता रहे हैं, जो पूरी तरह फर्जी है। पुलिस की जांच में जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं उनका संगठन से कोई लेना देना नहीं है।