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फेसबुक पर थी 'तूफानी मौत' की इबारत

Sat, 19 Apr 2014 12:18 PM IST
Updated Sat, 19 Apr 2014 12:18 PM IST
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jnu students updated fb status before accident

जेएनयू के चंद्रभागा हॉस्टल के रूम नंबर 235 में रहने वाला रविशंकर चौधरी जिंदादिल इंसान था। एमए इन कोरियन लैंग्वेज के आखिरी सत्र के छात्र रविशंकर को विदेशी भाषाएं सीखने का शौक था।

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उसने जेएनयू में बीए इन कोरियन लैंग्वेज में दाखिला लिया। मेधावी होने के चलते स्कॉलरशिप से मिलने वाले रुपयों से रवि अपने घूमने-फिरने, गैजेट्स व क्रिकेट खेलने के शौक को पूरा किया।
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उसे एक कोरियन कंपनी में भी प्लेसमेंट मिला था पर उसका सपना तो कुछ और था।

दोस्तों ने कहा था, गम भूलकर जश्न मनाओ

jnu students updated fb status before accident

रविशंकर कोरिया जाकर कोरियन भाषा में पीएचडी करना चाहता था, लेकिन बृहस्पतिवार दोपहर को पता चला कि उसकी बजाय किसी ओर को सीट मिल गई है।

दोपहर 12:14 बजे रवि ने फेसबुक पर अपने दर्द को बयां करते हुए स्टेटस डाला, ‘अब मैं कोरियन लैंग्वेज छोड़ रहा हूं।’ इसके बाद दोस्तों के सुझावों की एफबी पर भरमार लग गई।

जब दोस्तों ने जिदंगी में और भी राहें हैं का कमेंट किया तो रविशंकर ने लिखा, ‘मेरे पास क्षमताओं के साथ बहुत सी उपलब्धियां हैं, असल में मैंने कुछ नहीं खोया हैं...उन्होंने (जेएनयू ) मुझे खो दिया। इस पर दोस्तों ने गम को जश्न मनाकर भुलाने का सुझाव दिया।

'आज कुछ तूफानी करते हैं'

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इसके बाद रविशंकर ने रात में अपने चार दोस्तों संग ताप्ति हॉस्टल में पार्टी की। यहां जाम छलकाने के साथ वह और रवि गुप्ता फेसबुक व वाट्स एप पर लगातार दोस्तों से अपडेट हो रहे थे। फेसबुक पर रात 10:45 बजे हाथों में बीयर की बोतल व ग्लास के साथ फोटो अपलोड किया।

रविशंकर ने लिखा, ‘आज कुछ तूफानी करते हैं...’ इसके बाद वह, संतोष व रवि गुप्ता एक बाइक पर सवार होकर दूसरी बाइक पर बैठे दो दोस्तों से रेस लगाने के लिए हॉस्टल से निकल गए।

यूनिवर्सिटी के छात्रों ने बताया कि रेस के दौरान तीनों आज कुछ तूफानी करते हैं....गाते हुए जा रहे थे और थोड़ी ही देर बाद जिंदगी को अलविदा कह गए। दोस्तों के मुताबिक रवि गुप्ता और संतोष भी सपनों को पूरा करने के लिए स्कॉलरशिप लेने के अलावा गाइड का काम भी करते थे। उससे मिलने वाली रुपयों से वह मित्रों की हरसंभव मदद करते थे।

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कैंपस में अक्सर लगाते थे रेस

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हॉस्टल के दोस्त शाहदाब, सुमन व मौशीना के मुताबिक रवि शंकर को तेज बाइक चलाने का बहुत शौक था और कभी भी हेल्मेट नहीं लगाता था। अक्सर तीनों दोस्त (रविशंकर, संतोष व रवि गुप्ता) एक ही बाइक पर बैठकर कैंपस में लेट नाइट रेस लगाते थे।

दोस्तों शिक्षकों और गार्डों ने रफ्तार पर ब्रेक लगाने की बात कही थी। अक्सर दोस्त कहते थे कि एक दिन तुम्हारी यही रफ्तार तुम्हें हमेशा के लिए सुला देगी और हुआ भी यही।

प्रशांत ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा, ‘मैं ही चार साल पहले रविशंकर के साथ बाइक खरीदने गया था, अगर मुझे पता होता कि वह रफ्तार पर ब्रेक नहीं लगाएगा तो मैं कभी उसके साथ नहीं जाता।

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