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गंगा ढाबा बंद होने से बदल जाएगी जेएनयू की पहचान, छात्रसंघ और शिक्षक यूनियन ने चलाया अभियान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 21 Nov 2018 08:57 PM IST
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गंगा ढाबा
- फोटो : facebook
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस की पहचान गंगा ढाबा से होती है। ढाबा बंद होने से जेएनयू की पहचान ही बदल जाएगी। जेएनयू के ढाबा सिर्फ ढाबा नहीं, बल्कि देश-दुनिया पर चर्चा का ठिकाना संग पहचान है। सोशल मीडिया पर छात्रों ने पूर्व छात्रों से भी ढाबा बचाने की अपील की है। फूडकोर्ट नहीं ढाबा से जेएनयू की पहचान के लिए सबसे वोट भी मांगे जा रहे हैं।
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जेएनयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने ढाबा की बजाय फूडकोर्ट बनाने का फैसला लिया है। इसी के चलते छात्रसंघ विरोध में आ गया है। छात्रसंघ ने कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार पर विश्वविद्यालय की पहचान खत्म करने का आरोप लगाया है। ढाबा पर खाना सस्ता होने के साथ लोगों को रोजगार भी मिलता है। ढाबा जेएनयू की पहचान है। देश और दुनिया के किसी भी मुद्दे पर चर्चा और सुझाव ढाबा से ही तय होते हैं। ढाबा पर बैठकर छात्रसंघ चुनाव के मुद्दे और मतदाताओं से सीधी बात होती है। ढाबा कल्चर के चलते दिल्ली के हर कोने से युवा इन्हीं ढाबा में खाना खाने आते हैं।
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जेएनयू फेसबुक पेज पर छात्रों ने पूर्व छात्रों से जेएनयू ढाबा बचाने की अपील की है। सोशल मीडिया पर जेएनयू ढाबा बचाओ अभियान शुरू हो गया है। छात्रों का कहना है कि जेएनयू में आम व पिछड़े इलाकों के छात्र पढने आते हैं। आर्थिक दिक्कत के चलते ही वे स्कॉलरशिप राशि से उच्च शिक्षा का सपना पूरा कर पाते है। क्योंकि यहां दाखिला फीस सबसे कम हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग परिवारों के छात्रों के लिए फूडकोर्ट की बजाय ढाबा ही पसंद आते हैं। ढाबा में वे दोस्तों के साथ बैठकर देश-दुनिया पर चर्चा करते हैं। ढाबा बंद होने से जेएनयू की पहचान गुम हो जाएगी।
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