JNU छात्र ने सुसाइड से पहले फेसबुक पर लिखी थी अपनी पूरी कहानी
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होली के दिन फांसी लगाकर आत्महत्या करने वाले जेएनयू छात्र मुथुकृष्णन के फेसबुक पेज पर अगर आप गौर करेंगे तो पाएंगे कि उन्हें जीवनभर में किस तरह से भेदभाव का सामना करना पड़ा।
रजनी क्रिश के नाम से फेसबुक अकाउंट चलाने वाले जेएनयू छात्र ने अपने कई लंबे पोस्ट में बताया है कि कैसे उन्हें परिवार को पालने और पढ़ाई पूरी करने के लिए कई तरह की नौकरियां करनी पड़ीं।
उन्होंने बताया है कि कैसे देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में भी जाति के आधार पर भेदभाव होता है। उन्होंने अपने आखिरी पोस्ट की पहली लाइन में ही लिखा है- 'जब समानता नहीं मिलती तो कुछ नहीं मिलता।' यह पोस्ट रजनी क्रिश ने अपनी मौत से दो दिन पहले 10 मार्च को डाली थी।
रजनी की आखिरी पोस्ट में उसने अपने बचपन के दिनों की बात लिखी है जब वो सलेम (तमिलनाडू) में था। उसने बताया है कि उसने 'माना' (बीफ) खरीदा था और एक बस पर सवार हुआ।
उस दौरान उसे अन्य बस सवार कैसे घूर-घूर कर देख रहे थे। यहां तक कि उसके स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों तक ने उससे बात करना बंद कर दिया था क्योंकि वो माना जैसा मीट खरीदकर ले जा रहा था।
वो अपनी उस पोस्ट में कहता है कि माना देखकर कई लोगों ने तो उसकी तरफ अपनी पीठ कर ली थी। उन दिनों माना के लिए कोई समानता नहीं थी, लेकिन आज 'माना' ही नहीं है इसलिए ये कहा जा सकता है कि कोई समानता ही नहीं है।
एक तरफा प्यार
इसके साथ ही 15 फरवरी को डाली गई अपनी पोस्ट में रजनी ने एकतरफा प्यार की बात की है। उसने अपने पहले क्रश की बात की है जब वो कॉलेज में था और उसके साथ क्या बातें हुआ करती थीं वो भी बताया है। रजनी क्रिश ने अपनी इस पोस्ट में बताया है कि हालांकि उस लड़की की शादी हो गई और वह अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गया।
उसने अपने इस पोस्ट में लिखा है कि उसकी क्रश ने उससे कहा था कि उन्हें उससे बेहतर लड़की मिलेगी। इसी पोस्ट में उसने बताया था कि कैसे तमिलनाडू तीन दलित युवा जाति से बाहर की हिंदू लड़की से शादी करने पर मार दिए गए।
इतिहास गणित है
जब जेएनयू के छात्र यूजीसी के उस प्रस्ताव के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे जिसमें पीएचडी और एमफिल में केवल इंटरव्यू से से एडमिशन मिल जाएगा, उस वक्त मुथुकृष्णन ने एक पोस्ट लिखा था।
उन्होंने इस पोस्ट में याद किया है कि कैसे उनके मैथ्स टीचर ने उन्हें अपना निशाना बनाया था क्योंकि वह टीचर की प्राइवेट ट्यूशन में दाखिला नहीं ले रहे थे। उन्होंने उस वक्त को याद करते हुए पोस्ट में बताया कि कैसे उनके टीचर ने उन्हें इस बात के लिए अपमानित किया था कि वो किस जाति से आते हैं। इसके बाद रजनी को गणित से नफरत हो गई।
इसी के बाद उन्होंने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया और अपनी जाति का पहला ग्रैजुएट बनने की ठानी। इस पोस्ट में रजनी ने यूजीसी से विनती भी की है कि फर्स्ट जनरेशन मार्जिनल्स को मौका दिया जाए वरना वो भी मैथ्स को अपना दुश्मन मानने की भूल कर बैठेंगे।
अपनी लेडी लव को भी याद करते हुए लिखा ये सब
अपने ताज महल दौरे पर मुथुकृष्णन ने अपनी लेडी लव यानी दादी सेल्लाम्मल को याद करते हुए भी फेसबुक पर एक पोस्ट डाला था। इस पोस्ट में उसने याद किया था कि कैसे उसकी दादी एक स्कूल में सैनिटेशन वर्कर का काम करती थीं और उन्होंने आखिरी समय तक वो काम किया।
रजनी ने लिखा है कि उनकी दादी उन्हें अकसर ही शराब से दूर रहने और परिवार की देखरेख करने की सलाह देती थीं। वो बताते हैं कि पैसों की कमी की वजह से ही वो अपनी दादी के अंतिम दर्शन नहीं कर पाए थे क्योंकि वो उस वक्त दिल्ली में थे और घर जाने के भी पैसे नहीं थे।
इस पोस्ट में रजनी क्रिश ने लिखा है कि, बिना गर्लफ्रेंड के ताजमहल आया हूं, लेकिन मैं यहां सिर्फ अपनी सेल्लाम्मल आया के बारे में सोच रहा हूं, मुझे मालूम है कि मेरी सेल्लाम्मल मेरी आत्मा हैं।