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JNU: पीएम-गृह मंत्री के खिलाफ नारे लगाने वाले होंगे निलंबित, प्रशासन बोला- नहीं बनने देंगे नफरत की प्रयोगशाला

Tue, 06 Jan 2026 08:44 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Tue, 06 Jan 2026 08:44 PM IST
सार

विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। नारेबाजी का वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने जेएनयू प्रशासन से पूरे मामले पर रिपोर्ट मांगी है। 

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JNU says students involved in sloganeering face disciplinary measures immediate suspension
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में लगे विवादित नारे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन ने परिसर में हुई नारेबाजी को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि इसमें शामिल छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि किसी भी तरह की हिंसा, गैरकानूनी आचरण या राष्ट्रविरोधी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। नारेबाजी का वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने जेएनयू प्रशासन से पूरे मामले पर रिपोर्ट मांगी है। 

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नफरत की प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे
जेएनयू की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि विश्वविद्यालय नवाचार और नए विचारों के केंद्र होते हैं, लेकिन उन्हें नफरत की प्रयोगशालाओं में बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रशासन ने दो टूक कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कानून और संस्थागत मर्यादाओं का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है।

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नारे लगाने वाले छात्रों की हो रही पहचान
विवादित नारेबाजी को लेकर जेएनयू ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारे लगाने वाले छात्रों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ नियमों के तहत कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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छात्रों से की शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील
विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि जेएनयू का माहौल अकादमिक विमर्श और रचनात्मक बहस के लिए है, न कि विभाजन और उकसावे के लिए।

क्या है पूरा विवाद
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ सोमवार रात को साबरमती हॉस्टल के बाहर कथित तौर पर आपत्तिजनक और भड़काऊ नारेबाजी की गई। इस संबंध में सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया है। इस मामले पर जेएनयू सुरक्षा विभाग ने वसंत कुंज(नॉर्थ) थाना एसएचओ को मुकदमा दर्ज करने के लिए शिकायत पत्र दिया है।

पुलिस को पत्र में जेएनयू प्रशासन में किया लिखा
नारेबाजी का आरोप जेएनयू छात्र संघ के पदाधिकारियों सहित कई दूसरे छात्रों पर लगा है। दरअसल, छात्र सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली दंगे मामले में आरोपी जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने और पांच जनवरी 2020 को परिसर में हुई हिंसा के खिलाफ नाराजगी और आक्रोश व्यक्त करने के लिए जुटे थे। इस बीच छात्रों की ओर से कथित आपत्तिजनक और भड़काऊ नारेबाजी की गई। इस मामले पर जेएनयू सुरक्षा विभाग द्वारा एसएचओ को लिखे पत्र के अनुसार साबरमती हॉस्टल के बाहर जेएनयू छात्र संघ से जुड़े छात्रों की ओर से गुरिल्ला ढाबा पर प्रतिरोध की रात शीर्षक के तहत एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जिसका उद्देश्य पांच जनवरी 2020 को जेएनयू में हुई हिंसा की छठी वर्षगांठ मनाना था। कार्यक्रम की शुरुआत के समय ऐसा लगा कि छात्र सिर्फ वर्षगांठ के उपलक्ष्य में ही आए थे।

नारेबाजी के समय यह छात्र थे मौजूद
इस मौके पर छात्रों की संख्या लगभग 30-35 थी। कार्यक्रम के दौरान पहचाने गए प्रमुख छात्रों में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष के.गोपिका बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली के अलावा छात्र साद आजमी, महबूब इलाही, कनिष्क, पाकीजा खान, शुभम और दूसरे छात्र शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर न्यायिक फैसले के बाद सभा का स्वरूप और लहजा बदल गया। कुछ छात्रों ने बेहद आपत्तिजनक, भड़काऊ और उत्तेजक नारे लगाने शुरू कर दिए। यह देश के सुप्रीम कोर्ट का प्रत्यक्ष अपमान है। इस तरह के नारे लगाना लोकतांत्रिक असहमति के बिल्कुल विपरीत है।

जानबूझकर परिसर में लगाए गए भड़काऊ और उत्तेजक नारे
यह जेएनयू आचार संहिता का उल्लंघन है। इससे सार्वजनिक व्यवस्था, परिसर में सद्भाव और विश्वविद्यालय के सुरक्षा और सुरक्षा वातावरण में गंभीर रूप से गड़बड़ी पैदा होने की संभावना है। पत्र के अनुसार नारे स्पष्ट रूप से सुनाई दे रहे थे। नारे जानबूझकर लगाए और उनको बार-बार दोहराया गया। जिससे यह संकेत मिलता है कि यह जानबूझकर और सोच-समझकर किया गया दुर्व्यवहार था न कि कोई सहज या अनजाने में की गई अभिव्यक्ति। यह कृत्य संस्थागत अनुशासन, शिष्ट संवाद के स्थापित मानदंडों और विश्वविद्यालय परिसर के शांतिपूर्ण शैक्षणिक माहौल की जानबूझकर अवहेलना को दर्शाता है। घटना के समय सुरक्षा विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद और स्थिति पर कड़ी नजर रख हुए थे। विभाग को निर्देश मिले है कि इस घटना में बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करवाई जाएं।

जेएनयू का विवादों से है पुराना नाता
जेएनयू में भड़काऊ और आपत्तिजनक नारेबाजी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी जेएनयू छात्रों के ऊपर नारेबाजी, प्रदर्शन और पुतला दहन करने के आरोप लगते रहे है। पिछले एक वर्ष से जेएनयू छात्र संघ के पदाधिकारियों और प्रशासन के बीच कई मामलों को लेकर गतिरोध देखने को मिला है। इसमें डॉ. बीआर अंबडेकर लाइब्रेरी में तोड़फोड़ करने से लेकर जेएनयू की दीवारों पर विवादित नारेबाजी लिखने के मामले सामने आ चुके है।

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