जेएनयू हॉस्टल फीस: जारी है छात्रों का प्रदर्शन, आज हो रही परीक्षा का किया संपूर्ण बहिष्कार
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस में हॉस्टल मैनुअल रोलबैक को लेकर छात्रों का बहिष्कार गुरुवार को भी जारी रहा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से छात्रसंघ को छह बिंदूओं पर रोलबैक का प्रस्ताव दिया गया। इस प्रस्ताव पर बुधवार आधी रात को कैंपस में छात्रों की जनरल बॉडी मीटिंग(जीबीएम) आयोजित हुई।
इसमें मंत्रालय के प्रस्ताव को ठुकराते हुए पूरी तरह से रोलबैक की मांग पर आंदोलन जारी रखने के लिए सेमेस्टर परीक्षा के बहिष्कार का फैसला लिया गया। उधर जेएनयू कैंपस में दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त आनंद मोहन अपनी फोर्स के साथ कुलपति कार्यालय खाली करवाने पहुंचे।
छात्रसंघ अध्यक्ष आईषी घोष के मुताबिक, जीबीएम में हॉस्टल फीस बढ़ोतरी पूरी तरह से रोलबैक का फैसला हुआ है। इसलिए 12 दिसंबर से शुरू सेमेस्टर परीक्षा का बहिष्कार कर दिया गया है। यह छात्रसंघ नहीं, छात्रों की एकता की जीत है। फीस बढ़ोतरी रोलबैक का फैसला सभी छात्रों ने एकमत से लिया है। रोलबैक के बगैर आंदोलन किसी भी तरह समाप्त नहीं होगा।
छात्रों के पास इतने पैसे नहीं है कि वे महीने के तीन सौ और छह सौ रुपये कमरे के किराये पर खर्च करें। कमरे के किराये के साथ जीएसटी भी जोड़ दिया जाता है। जेएनयू में साढ़े पांच हजार से अधिक छात्र बीपीएल परिवारों के हैं, वे पचास फीसदी फीस भी नहीं दे सकते हैं।
संस्कृत और फिजिकल साइंसेज में कुछ छात्रों ने दी परीक्षा:
स्कूल ऑफ संस्कृत और फिजिकल साइसेंज में सेमेस्टर परीक्षा हुई है। स्कूल ऑफ संस्कृत में तो छात्र सेमेस्टर परीक्षा देने पहुंचे। हालांकि स्कूल ऑफ फिजिकल साइंसेज में छात्रों की संख्या बेहद कम रही। जबकि अन्य स्कूल व सेंटर के बाहर आंदोलन व ताला लगा होने के चलते शिक्षक भी वापस लौट गए। कुल मिलाकर सेमेस्टर परीक्षा का बहिष्कार सफल रहा है।
एचआरडी आंदोलन समाप्त करवाने को छात्रसंघ से नहीं करेगा अब बात
सूत्रों के मुताबिक जेएनयू मामले में अब एचआरडी छात्रसंघ से कोई बात नहीं करेगा। मंत्रालय का काम छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन में संवाद स्थापित करना था। इसमें थोड़ी बहुत सफलता मिली। मंत्रालय और छात्रसंघ के बीच करीब सात से अधिक बैठक हुई।
इसमें मंत्रालय ने छात्रों को आंदोलन समाप्त करने के लिए कई प्रस्ताव भी दिए, लेकिन आखिर में कोई नतीजा नहीं निकला। क्योंकि मंत्रालय की कोशिश के बाद भी छात्रसंघ से लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन कोई भी झुकने के लिए तैयार नहीं था। इसीलिए मंत्रालय ने फैसला लिया है कि अब इस मामले में कोई सहयोग नहीं होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन अब अपने तरीके से छात्रों से संवाद करते हुए अपनी दिक्कत को सुलझाए।
छात्रसंघ के समक्ष रखे गए यह प्रस्ताव, जिनपर जनरल बॉडी बैठक में चर्चा:
- हॉस्टल फीस बढ़ोतरी के तहत कमरे का किराया बढ़ेगा। छात्रों को कमरे का किराया संशोधित हॉस्टल मैनुअल के आधार पर देना होगा। हालांकि बीपीएल परिवार के छात्रों को किराये में पचास फीसदी छूट दी जाएगी। (इसमें दस रुपये वाले कमरे का किराया तीन सौ रुपये और बीस रुपये से बढ़ाकर छह सौ रुपये किया गया है। )
- यूटिलिटी व सर्विस चार्ज अब छात्रों को नहीं देने होंगे। उसका पूरा खर्चा अगले आदेश तक यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) जेएनयू प्रशासन को देगा।
- जेएनयू प्रशासन का डीन स्टूडेंट वेलफेयर छात्रसंघ 2019 को हाईकोर्ट के नियमों के तहत मान्यता देने की अधिसूचना जारी करेगा।
- कैंपस में पिछले 45 दिनों से आंदोलन के चलते कक्षाओं का बहिष्कार हुआ है। इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की पढ़ाई के नुकसान को बचाने के लिए सेमेस्टर को दो हफ्ते बढ़ाने का समय देगा। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन इस प्रस्ताव को जेएनयू अकेडमिक काउंसिल में रखकर पारित करने की मांग करेगा।
- छात्रसंघ समेत अन्य छात्र कुलपति कार्यालय में कोई आंदोलन नहीं करेंगे। तय नियमों के तहत बृहस्पतिवार को कुलपति कार्यालय से आंदोलनकारी हट जाएंगे।
- विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों से उग्र व्यवहार नहीं करेगा। इसके अलावा प्रशासन को छात्रों से नरमी से भी पेश आना होगा। विश्वविद्यालय छात्रों पर लगे चार्ज को वापस लेगा।