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जेएनयू यौन उत्पीड़न मामला: 'राजनीतिक रंग न दें', बर्खास्त प्रोफेसर के बयान पर छात्रसंघ का पलटवार, की ये मांग

Mon, 12 Oct 2026 04:55 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Mon, 12 Oct 2026 04:55 PM IST
सार

JNU Professor Harassment Case: जेएनयू में यौन उत्पीड़न के आरोप में बर्खास्त प्रोफेसर बिमोल के बयानों की छात्र संघ ने आलोचना की है। छात्र संघ ने यौन उत्पीड़न की शिकायतों को राजनीतिक या क्षेत्रीय विवाद के रूप में पेश करने को अनुचित बताया।

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JNU harassment case Student union hits back at dismissed professor give it a political color remark
जेएनयू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में यौन उत्पीड़न से जुड़े आरोप के मामले में बर्खास्त प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम के बयानों की छात्र संघ ने आलोचना की है। छात्र संघ के अनुसार यौन उत्पीड़न की शिकायतों को राजनीतिक या क्षेत्रीय विवाद के रूप में पेश करना उचित नहीं है। परिसर में यौन उत्पीड़न के मामलों को लेकर शून्य सहनशीलता होनी चाहिए।

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प्रोफेसर के खिलाफ कई छात्रों ने अनुचित यौन व्यवहार और डराने वाला माहौल बनाने की आरोप की शिकायतें की थीं। मगर, प्रोफेसर ने अपने बयानों में शिकायतों के मूल मुद्दे और छात्रों के साथ अपने व्यवहार पर जवाबदेही लेने के बजाय मामले को राजनीतिक और क्षेत्रीय पहचान से जोड़ने पर जोर दिया। किसी शिक्षक के पद और अधिकार का इस्तेमाल छात्रों को असहज या असुरक्षित स्थिति में डालने के लिए नहीं होना चाहिए।

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छात्रसंघ के अनुसार शिकायतकर्ताओं को शिकायत दर्ज कराने और जांच प्रक्रिया से गुजरने में करीब छह महीने तक लंबी और मानसिक रूप से परेशान करने वाली प्रक्रिया का सामना करना पड़ा। शिक्षक या सांसद जैसे प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ आवाज उठाना छात्रों के लिए आसान नहीं होता।

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शिकायतकर्ताओं की सहमति और विश्वास में लिए बिना किसी भी छात्र संगठन को इस मामले पर बयान देने से बचना चाहिए। हालांकि आरोपों और संबंधित पक्षों के दावों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और लागू कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।

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