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Delhi NCR News: जेएनयू फैकल्टी सदस्य ने प्रोफेसर की बर्खास्तगी के फैसले का किया समर्थन
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-विश्वविद्यालय की कार्रवाई पर सवाल उठाने पर शिक्षक संघ को घेरा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के एसोसिएट प्रोफेसर क्रिस्टु दास ने विश्वविद्यालय की कार्रवाई का बचाव किया है। यह कार्रवाई यौन उत्पीड़न के आरोप में प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम की बर्खास्तगी से संबंधित है। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाने के लिए शिक्षक संघ की आलोचना की है।
दास ने जेएनयू अधिनियम के स्टैच्यूट-30 का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को हटाने के मामले में कार्यकारी परिषद की शक्तियां पर्याप्त हैं। स्टैच्यूट-30(2) कदाचार के आधार पर शिक्षक को हटाने का अधिकार देता है। स्टैच्यूट-4(5) में कुलपति की आपातकालीन कार्रवाई का प्रावधान भी है। प्रोफेसर की बर्खास्तगी की वैधता का आकलन आदेश की प्रकृति, उसके आधार और लागू नियमों के संदर्भ में होना चाहिए। केवल कुलपति पर अधिकारों के अतिक्रमण का आरोप लगाकर कानूनी स्थिति तय नहीं की जा सकती।
दास ने कहा कि शिक्षक संघ को विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसलों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है। हालांकि, उसकी चिंता सभी पक्षों के प्रति समान रूप से दिखाई देनी चाहिए। यौन उत्पीड़न के आरोपों की गंभीरता को स्वीकार करना संस्थागत जिम्मेदारी का हिस्सा है। शिकायतकर्ताओं को प्रताड़ित होने और पहचान उजागर होने से बचाना भी जरूरी है। परिसर में सुरक्षित शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के एसोसिएट प्रोफेसर क्रिस्टु दास ने विश्वविद्यालय की कार्रवाई का बचाव किया है। यह कार्रवाई यौन उत्पीड़न के आरोप में प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम की बर्खास्तगी से संबंधित है। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाने के लिए शिक्षक संघ की आलोचना की है।
दास ने जेएनयू अधिनियम के स्टैच्यूट-30 का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को हटाने के मामले में कार्यकारी परिषद की शक्तियां पर्याप्त हैं। स्टैच्यूट-30(2) कदाचार के आधार पर शिक्षक को हटाने का अधिकार देता है। स्टैच्यूट-4(5) में कुलपति की आपातकालीन कार्रवाई का प्रावधान भी है। प्रोफेसर की बर्खास्तगी की वैधता का आकलन आदेश की प्रकृति, उसके आधार और लागू नियमों के संदर्भ में होना चाहिए। केवल कुलपति पर अधिकारों के अतिक्रमण का आरोप लगाकर कानूनी स्थिति तय नहीं की जा सकती।
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दास ने कहा कि शिक्षक संघ को विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसलों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है। हालांकि, उसकी चिंता सभी पक्षों के प्रति समान रूप से दिखाई देनी चाहिए। यौन उत्पीड़न के आरोपों की गंभीरता को स्वीकार करना संस्थागत जिम्मेदारी का हिस्सा है। शिकायतकर्ताओं को प्रताड़ित होने और पहचान उजागर होने से बचाना भी जरूरी है। परिसर में सुरक्षित शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
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