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जेएनयू के प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद पर गिरी गाज: यौन उत्पीड़न के मामले में बर्खास्त, भाजपा ने मांगा इस्तीफा

Fri, 09 Oct 2026 11:06 PM IST
Rahul Kumar Tiwari नई दिल्ली, पीटीआई
नई दिल्ली, पीटीआई Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Fri, 09 Oct 2026 11:06 PM IST
सार

जेएनयू ने यौन उत्पीड़न की शिकायतों के मामले में मणिपुर से कांग्रेस सांसद और प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकुइजम को बर्खास्त कर दिया। सांसद ने कार्रवाई को 'विच हंट' बताया और उचित प्रक्रिया पर सवाल उठाए। 

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JNU dismisses professor and Manipur Congress MP over misdeed harassment allegations all details
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, JNU - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने शुक्रवार को प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकुइजम को उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतों के मामले में बर्खास्त कर दिया। विश्वविद्यालय के एक आधिकारिक आदेश में यह जानकारी दी गई। वहीं, अकुइजम ने अपनी बर्खास्तगी को 'विच हंट' (दुर्भावनापूर्ण तरीके से निशाना बनाना) करार दिया और सवाल उठाया कि क्या इस मामले में उचित प्रक्रिया का पालन किया गया। अकुइजम जेएनयू के सामाजिक विज्ञान संकाय के अंतर्गत सामाजिक व्यवस्था अध्ययन केंद्र में प्रोफेसर थे।

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कुलपति शांतिश्री डी. पंडित के हस्ताक्षर वाले आदेश में कहा गया है कि विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने मामले की जांच की थी और अपने निष्कर्षों के आधार पर कड़ी सजा की सिफारिश की थी। आदेश में कहा गया कि 'उचित प्रक्रिया का पालन करने, उपलब्ध सभी तथ्यों पर विचार करने और आंतरिक समिति की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय की सेवाओं से बर्खास्तगी का दंड लगाया जाता है।'

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रिपोर्टों के मुताबिक, कम से कम 11 छात्राओं ने मई में प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि अकुइजम बैठकों या अन्य आयोजनों के बहाने छात्राओं को अपने परिसर स्थित आवास पर बुलाते थे और उनका यौन उत्पीड़न करने की कोशिश करते थे। कुछ छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया था कि वह कक्षा में अश्लील और अनुचित टिप्पणियां करते थे। 

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए इनर मणिपुर के सांसद ने कहा कि यदि उनकी बर्खास्तगी से जुड़ी खबरें सही हैं, तो यह फैसला उन्हें अपने खिलाफ कथित 'विच हंट' को उजागर करने का अवसर देगा। अकुइजम ने कहा, 'मेरे पास रिपोर्ट नहीं है, मुझे बर्खास्तगी का आदेश नहीं मिला है।' उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि समिति की सिफारिशों के बारे में उन्हें जानकारी दी जाएगी और निष्कर्षों पर अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

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कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह कानून भारतीय संसद ने बनाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उनके मामले में कानून के प्रावधानों का पालन किया गया। उन्होंने कहा, 'जो भी व्यक्ति पीओएसएच कानून को जानता है, वह यह समझ सकता है।' उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय ने यह सुनिश्चित किए बिना कार्रवाई की कि उन्हें समिति की सिफारिशों की जानकारी दी गई थी।

अकुइजम ने अंकों के बदले यौन संबंधों की मांग करने के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने आरोप लगाने वालों को चुनौती देते हुए सबूत पेश करने को कहा। उन्होंने कहा, 'अंकों के बदले यौन संबंधों से जुड़े उन सभी आरोपों का सबूत दिखाइए। चाहे वह रिपोर्ट में हो या कहीं और, मुझे दिखाइए।' उन्होंने अपने खिलाफ चल रही कार्रवाई को 'विच हंट' बताया। सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस विवाद से वह और मजबूत होकर उभरेंगे। उन्होंने कहा, 'मणिपुर के लोगों की आवाज कोई नहीं दबा सकता। मैं उनकी आवाज हूं, क्योंकि लोगों ने मुझे अपना जनादेश दिया है।'

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इस बीच, मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने अकुइजम से इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि आरोपों से 'जनविश्वास और जवाबदेही को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं।' उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, 'मैं उनसे सांसद पद से इस्तीफा देने और मणिपुर की जनता से माफी मांगने का आह्वान करता हूं। महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा को दलगत राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।' इंफाल में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी ने भी अकुइजम से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया, 'हमें महिलाओं, विशेषकर युवा छात्राओं के साथ बिमोल अकुइजम के दुर्व्यवहार के संबंध में जेएनयू से सबूत मिले हैं।'

मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि गंभीर यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे किसी व्यक्ति को राजनीतिक लाभ के लिए संरक्षण देने की कीमत राहुल गांधी को चुकानी पड़ेगी। सिंह ने कहा, 'अब सवाल यह है कि इस गंभीर घटनाक्रम के मद्देनजर राहुल गांधी क्या करेंगे? उन्हें विपक्ष के नेता के पद से इस्तीफा क्यों नहीं देना चाहिए और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए निर्णायक कदम क्यों नहीं उठाने चाहिए? दूसरों से जिस जवाबदेही की अपेक्षा वह करते हैं, वही मानक उनकी अपनी पार्टी पर भी लागू होने चाहिए।'

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