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JNU बोला- संस्थान 45 करोड़ के घाटे में, सेवा शुल्क लेना जरूरी, शिक्षक संघ बोला- फिजूलखर्ची से आई कमी

Fri, 22 Nov 2019 01:56 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Fri, 22 Nov 2019 01:56 PM IST
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JNU claims it is in loss so service charge necessary JNUTA says misused money reason of loss
- फोटो : जी पाल

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में चल रहे हॉस्टल फीस और मैनुअल का विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। जहां छात्र पूरी तरह से फीस रोलबैक की मांग कर रहे हैं, वहीं जेएनयू ने गुरुवार को यह स्पष्ट कर दिया है कि वह फीस क्यों बढ़ाना चाहता है। जेएनयू का कहना है कि संस्थान 45 करोड़ के घाटे में है और उस पर ठेका श्रमिकों के वेतन, बिजली और पानी के बिलों का बोझ बढ़ गया है।

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इसे देखते हुए संस्थान ने फैसला लिया है कि छात्रों पर सर्विस चार्ज लगाना जरूरी है। हालांकि संसदीय समिति के सामने पेश हुए शिक्षक संघ ने इस बात को गलत बताया है और कहा कि पैसे की कमी फिजूलखर्ची के चलते हुई है।
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जेएनयू ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, 'हॉस्टल फीस में वृद्धि को लेकर गलत बातें फैलाने का अभियान चल रहा है। दावा किया जा रहा है कि इससे बड़ी संख्या में गरीब छात्र प्रभावित होंगे। असलियत यह है कि पहले सेवा शुल्क नहीं लिया जाता था। नुकसान को देखते हुए अब शुल्क लेने का फैसला लिया गया है। जेएनयू में अभी भी अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों से कम पैसे लिए जा रहे हैं। यहां छात्रों से विकास शुल्क नहीं लिया जाता। चार दशकों से एडमिशन फीस में भी वृद्धि नहीं की गई।'
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हॉस्टल मैनुअल रोलबैक के बगैर कैंपस नहीं होगा सामान्य: शिक्षक संघ 
जेएनयू शिक्षक संघ के 13 सदस्यों और तीन सदस्यीय समिति की गुरुवार को मंत्रालय में बैठक हुई। संघ ने बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन के कामकाज पर सवाल उठाते हुए जेएनयू एक्ट के तहत काम न करने का आरोप लगाया है।


जेएनयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. डीके लोबियाल के मुताबिक, समिति के समक्ष तीन बिंदुओं पर फोकस किया गया। हॉस्टल मैनुअल को रोलबैक के बगैर किसी भी तरह कैंपस सामान्य नहीं हो सकता है। उन्होंने बताया कि प्रशासन की फिजूलखर्ची के चलते विश्वविद्यालय में पैसे की कमी आई है।

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