शहादत कार्यक्रम और देशविरोधी नारेबाजी में 5 छात्र कश्मीरी
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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में अफजल गुरू की बरसी पर कार्यक्रम आयोजित करने और देश विरोधी नारे लगाने वाले छात्रों में से पांच कश्मीरी हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कार्यक्रम में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र भी शामिल थे, जो इन छात्रों के सोशल मीडिया के दोस्त हैं।
फेसबुक पर भी इन छात्रों ने अफजल को लेकर सहानुभूति बयां की है। इंटरनेट फ्रेंडली जेएनयू में छात्र फेसबुक पर जेएनयू कंफेशन पेज पर अपनी बातें साझा करते हैं।
अलीगढ़ तथा जामिया से अफलज प्रेमी यूजर्स को बुलाया
हालांकि यहां यूजर्स अपने नाम से नहीं बल्कि एक आईडी से अपनी बात रखते हैं। कंफेशन पेज से लेकर आरोपी छात्रों का फेसबुक अकाउंट उनकी आजादी के मायने बताने को काफी है।
जेएनयू कंफेशन पेज की वॉल पर इन छात्रों ने कार्यक्रम के आयोजन को भुनाया और अलीगढ़ तथा जामिया से अफलज प्रेमी यूजर्स को बुलाया।
अभिभावक बच्चों को जेएनयू में दाखिला दिलाने के लिए आनाकानी कर रहे हैं। 9 फरवरी से शुरू हुई आवेदन प्रक्रिया में अभी तक दो सौ आवेदन भी नहीं मिले हैं, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा हजार तक पहुंच गया था।
उमर खालिद ने अकाउंट हाइड किया
आरोपी छात्र उमर खालिद ने फेसबुक से अपना अकाउंट हाइड कर दिया है। इसके अलावा दो अन्य छात्रों ने भी अपना अकाउंट डिलीट कर दिया है। इनसे जुड़े छात्रों ने भी अकाउंट से आजादी को दर्शाते नारे डिलीट कर दिए हैं। उधर, महज दो दिनों में आठ लाख से अधिक यूजर्स ने इंटरनेट पर उमर खालिद से जुड़ी जानकारियां जुटाई।
कार्यक्रम आयोजन में बेशक दस नाम सामने आए हैं, लेकिन विश्वविद्यालय के अनुमति लेने वाले पत्र में महज तीन छात्रों ने ही अपना पूरा नाम, क्लास व रोल नंबर दिया है।
हालांकि उसमें रनिंग में दिए गए अन्य नाम अधूरे हैं। आयोजकों ने बड़ी चालाकी से आधे नाम लिखे हैं, क्योंकि कैंपस में उन नाम के तीन से पांच छात्र मौजूद हैं।
जेएनयू देशविरोधी गतिविधियों का अड्डा बन गया है। इस बात से जेएनयू के हजारों छात्र आहत हैं और उन्होंने व्हाट्सऐप से लेकर फेसबुक और ट्विटर तक पर नया नारा दिया है कि हम देशविरोधी व देशद्रोही नहीं हैं।