पुलिस के पहरे में जितेंद्र, रिश्तेदार भी नहीं मिल सकते
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सुनपेड़ मामले का पीड़ित जितेंद्र पुलिस के कड़े पहरे में पहुंच गया है। सिविल अस्पताल के आईसोलेशन वार्ड में आधा दर्जन पुलिस कर्मियों की निगहबानी में उसे रखा गया है। वार्ड के बाहर पुलिस और अस्पताल के सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है।
डॉक्टरों के अलावा वार्ड में किसी को जाने की इजाजत नहीं है। बृहस्पतिवार शाम जितेंद्र को अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद सुनपेड़ गांव में शांति का माहौल रहा।
न नेताओं की आवाजाही हुई और न ही मीडिया का जमघट लगा। जितेंद्र के घर के अंदर आरएएफ और बाहर पुलिस के जवान तैनात थे।
तीन दिनों तक सुनपेड़ गांव में गहमागहमी का माहौल था। दलित बनाव सवर्ण को लेकर गांव में सियासत भी खूब गरमाई रही, लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के दौरे के बाद बृहस्पतिवार शाम अचानक जितेंद्र को सिविल अस्पताल में भर्ती करा दिया गया।
हालांकि, इसके पीछे वजह उसकी बर्न इंजरी को बताया जा रहा है। लेकिन, माना यह भी जा रहा है कि मामले में सियासी दखल के चलते बढ़ रहे विवाद को कम करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। जितेंद्र की गैरमौजूदगी में शुक्रवार को सुनपेड़ गांव का माहौल शांत था।
न कोई नेता पीड़ित के घर का दौरा करने पहुंचा और न ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की फौज वहां दिखाई दी। वहीं, सिविल अस्पताल की तीसरी मंजिल पर बने आइसोलेशन वार्ड में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जितेंद्र को रखा गया है।
वार्ड के अंदर आधा दर्जन पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। वार्ड को अंदर से कुंडी लगाकर रखा जाता है ताकि कोई मिलने न आ सके। जितेंद्र के साथ उसके फूफा लेखराज को ही रहने की इजाजत है।
परिजन भी लौटाए वापस
बाहरी लोगों पर ही नहीं बल्कि जितेंद्र के रिश्तेदारों को भी आईसोलेशन वार्ड में घुसने की इजाजत नहीं है। मीडिया को भी बाहर से ही वापस किया जा रहा है। अस्पताल के डॉक्टरों को ही वार्ड के अंदर जाने की इजाजत है।
शुक्रवार दोपहर सुनपेड़ गांव से आए उसके रिश्तेदार विजय को भी पुलिसकर्मियों ने वार्ड के अंदर जाने से रोक दिया। वार्ड के अंदर मौजूद लेखराज ने विजय से गेट पर खड़े हो कर बातचीत की।
अंदर मौजूद पुलिसकर्मियों का कहना है कि उन्हें आदेश मिला है कि किसी को भी अंदर नहीं आने दिया जाए। विजय ने बताया कि बृहस्पतिवार शाम वह जितेंद्र के साथ उसे भर्ती कराने आया था। उसके नाम की रजिस्टर में एंट्री भी है, लेकिन अब उसे ही जितेंद्र से नहीं मिलने दिया गया।
एंटीबायोटिक व पेनकिलर दी जा रहीं
19-20 अक्तूबर की रात हुई आगजनी की घटना में जितेंद्र के दोनों हाथ जल गए थे। एक दिन तक वह सफदरजंग अस्पताल में रहा, जबकि दूसरे दिन वह घर लौट आया।
हालांकि, जितेंद्र को अस्पताल में भर्ती कराने की वजह अचानक तबियत खराब होना बताया जा रहा है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि आला अधिकारियों की तरफ से आए निर्देश के बाद यह कदम उठाया गया है।
अस्पताल में बिजेंद्र को एंटीबायोटिक और पेनकिलर दी जा रही है। पीएमओ डॉ. सुरेश चंद्र ने बताया कि उसकी बर्न इंजरी का इलाज किया जा रहा है। इंफेक्शन से बचाने के लिए आईसोलेशन वार्ड में रखा गया है।