जिम्स में सात वर्षीय गंभीर मरीज के परिजनों से बदसलूकी, धक्का देकर निकाला, जांच के लिए पहुंची संस्था
ग्रेटर नोएडा में जिम्स अस्पताल के स्टाफ का तानाशाही रवैया सामने आया है। आरोप है कि गांव बोड़ाकी की सात वर्षीय बच्ची का उपचार करने से चिकित्सकों ने इंकार कर दिया।
विरोध करने पर अस्पताल के स्टाफ ने धक्का देकर भगा दिया। इसी की शिकायत मिलने पर सबल इंडिया नाम की संस्था की टीम आज अस्पताल में जांच के लिए पहुंची।
यहां संस्था ने डॉक्टरों और स्टाफ का अलग-अलग बयान लिया जिसमें उन्हें विरोधाभास नजर आया। डॉक्टरों ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया, वहीं स्टाफ के जवाब उनसे भिन्न थे। टीम ने बोड़ाकी जाकर पीड़िता की मां से भी बात की।
मां ने सबल इंडिया की टीम को बताया कि सोमवार को डॉक्टर से उन्होंने केवल ये पूछा था कि क्या इलाज कर रहे हो तो डॉक्टर ने उन्हें परिवार समेत बाहर भगा दिया। साथ ही बच्ची का इलाज भी बंद कर दिया। सेक्टर 30 के अस्पताल को रेफर कर दिया। उनके साथ दुर्व्यवहार किया।
क्या है पूरा मामला
ग्रेटर नोएडा के गांव बोड़ाकी गांव निवासी दानवीर की बेटी छाया (7) के पूरे शरीर पर कुछ दिनों से सूजन थी। उनके पड़ोसी भगवत सिंह ने बताया कि सोमवार को बेटी की तबियत अधिक बिगड़ गई। उसे दादरी के एक अस्पताल ले जाया गया। वहां से उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण परिजन शाम करीब साढ़े छह बजे कासना स्थित जिम्स हास्पिटल लेकर चले गए। भगवत सिंह का आरोप है कि वह खुद छाया के उपचार के लिए उनके साथ जिम्स पहुंचे थे। वहां चिकित्सकों ने सुविधा नहीं होने का हवाला देते हुए उपचार से मना कर दिया।
हालत गंभीर बताते हुए परिजन चिकित्सकों के सामने गिड़गिड़ाते रहे, परंतु उन्हें धक्का देकर वहां से भगा दिया गया। दानवीर ने बताया कि बेटी की हालत बेहद नाजुक है। उसका उपचार करने के बजाय जिम्स के स्टाफ ने बदसलूकी की। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे।
अभद्रता का वीडियो वायरल
मैं खुद शाम को अस्पताल की निगरानी कर रहा था। ऐसा कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। बच्ची को पूरा इलाज मिलता। इसकी जांच कर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।-बिग्रेडियर डॉक्टर राकेश गुप्ता, निदेशक-जिम्स