जेवर एयरपोर्ट बनने की फिर जगी उम्मीद
राजनीतिक खींचतान के बीच फंसा जेवर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के अब आगे बढ़ने के
दरअसल, गौतमबुद्ध नगर लोकसभा की सीमा में जेवर में एयरपोर्ट एक महत्वाकांक्षी और चर्चित परियोजना है। 2001 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने गहन विचार के बाद ही कैबिनेट में प्रस्ताव पास किया था। नोएडा और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण भाजपा की योजना थी कि एयरपोर्ट बनने से उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा और आसपास के लोगों को दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा। इसी के चलते 2003 में यमुना प्राधिकरण ने करीब 35 गांवों की 2471 एकड़ जमीन को एयरपोर्ट के लिए चिह्नित कर लिया था।
बसपा ने किए थे प्रयास
2007
में जब प्रदेश में बसपा की सरकार आई थी तो प्रोजेक्ट पर तेजी से काम हुआ।
जमीन अधिग्रहण के लिए प्राधिकरण से तैयार रहने को कहा गया। जिसके बाद
प्राधिकरण भी पूरी मुस्तैदी से जुट गया। उड्डयन विभाग की टीम भी कई बार
दौरा कर चुकी थी।
स्पेशल पर्पज व्हीकल की स्थापना करके सरकार ने इसे बनाने
की हिस्सेदारी तक तय कर दी थी। उड्डयन विभाग ने तर्क दिया था कि एक
एयरपोर्ट से दूसरे की दूरी 150 किलोमीटर होनी चाहिए, लेकिन इस दूरी को 90
किलोमीटर तक कर दिया गया था। तत्कालीन बसपा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर भी इस
मुद्दे को संसद में उठाते रहे। 2010 में इस मुद्दे को मंत्री समूह को सौंप
दिया गया। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की टीम ने पूरा अध्ययन कर लिया था।
2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने प्रोजेक्ट पास किया था
यह गौतमबुद्ध नगर के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए विकास का मार्ग खोलेगा। एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए केंद और प्रदेश सरकार से बात की जाएगी। विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लगातार प्रयास कर रहे हैं। जेवर एयरपोर्ट का लाभ सिर्फ जिले को नहीं बल्कि एनसीआर से जुड़े शहरों को भी मिलेगा। यहां यमुना एक्सप्रेसवे समेत क्षेत्र में पेरिफेरल समेत कई एक्सप्रेसवे का जाल फैला हुआ है, जिससे आसपास के लोगों की पहुंच आसान हो जाएगी।
डॉ.महेश शर्मा, संस्कृति, पर्यटन और उड्डयन राज्य मंत्री
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में करीब दो हजार छोटे बड़े उद्योग चल रहे हैं, जिसमें मल्टीनेशनल कंपनियां भी हैं। एयरपोर्ट के माध्यम से विदेश जाने वाले उत्पाद के लिए अभी यहां से कंटेनर के जरिए दिल्ली भेजा जाता है। अगर जेवर में एयरपोर्ट बनता है तो उद्यमियों के लिए वरदान साबित होगा और नए उद्योगों का रास्ता भी खुल जाएगा।
आदित्य घिल्डियाल, अध्यक्ष ग्रेनो इंडस्ट्री एसोसिएशन