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कविताओं और गजलों के संगम से जश्न -ए-अदब साहित्योत्सव का आगाज

Sat, 09 Nov 2019 06:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 09 Nov 2019 06:11 AM IST
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jash e adab begins in delhi with confluence of poems and ghazals
जश्न-ए- अदब का आगाज - फोटो : अमर उजाला

इस ओर है धुआं सा, इस ओर है कुहासा। किरणों की डोर बन के पर्दे हटाकर देखो। अपराध और सियासत का इस भरी सभा में, होता हुआ स्वयंवर पर्दे हटा के देखो...ऐ चक्रधर ये माना हैं खामियां सभी में, कुछ तो मिलेगा बेहतर पर्दे हटा के देखो। 

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जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी में आयोजित तीन दिवसीय जश्न-ए- अदब साहित्योत्सव के आगाज के मौके पर प्रख्यात कवि अशोक चक्रधर ने अपनी कविता की इन पंक्तियों से कार्यक्रम में समां बांध दिया। इस मौके पर जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल एनएन वोहरा बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुए। इस कार्यक्रम में अमर उजाला मीडिया पार्टनर की भूमिका निभा रहा है।
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कविताओं और गजलों से लबरेज इस कार्यक्रम के पहले दिन कई नामी हस्तियां शामिल हुईं, जिनमें हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा, कवि अशोक चक्रधर, उर्दू साहित्यकार शारिक कैफी, साहित्यकार ओम निश्चल, जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी के कुलपति सैयद एहतेशाम हसनैन, कार्यक्रम के आयोजन रणजीत सिंह और डॉक्टर एसएम खान समेत अन्य लोग उपस्थित थे।
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इस मौके पर डॉ एनएन वोहरा ने कहा कि भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाने में इस तरह के कार्यक्रमों की बेहद अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि हिंदी के साथ उर्दू की जुगलबंदी से साहित्य में जो निखार आता है, वह कहीं नहीं मिल सकता। उन्होंने इस मौके पर जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी से जुड़ी यादों को सांझा किया। 

उन्होंने बताया कि 1978 में वह पहली बार जामिया हमदर्द आए थे और तभी से इस यूनिवर्सिटी की उपलब्धियों को जानते हैं। उन्होंने कहा कि तभी इस यूनिवर्सिटी का महत्व रैंकिंग में ऊपर था और आज भी भारत की टॉप यूनिवर्सिटी में जामिया हमदर्द शामिल है। उन्होंने कहा यहां फार्मेसी और यूनानी समेत अन्य क्षेत्र में किए जा रहे शोध के जरिये लोगों के बेहतर दवाइयां और सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा यकीन है यह यूनिवर्सिटी भविष्य में और भी बेहतर उपलब्धियां हासिल करेगी।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा और प्रोफेसर एवं कवि अशोक चक्रधर की जुगलबंदी ने व्यंग्य संध्या में कविताओं और व्यंग्य से दर्शकों का मन मोह लिया। इनकी कविताओं ने नोटबंदी, जीवन में पत्नी की भूमिका के विभिन्न पहलू, जीवन में पिता के महत्व और स्वच्छता का संदेश देते हुए कई व्यंग्य पेश किए। इसके बाद शाम-ए-गजल कार्यक्रम में डॉ राधिका चोपड़ा ने अपनी गजलों से दर्शकों का दिल जीत लिया।


कार्यक्रम में मुख्य अतिथि द्वारा साहित्यकार डॉ ओम निश्चल को शान-ए- हिंदी सम्मान से नवाजा। हांस्य कवि सुरेंद्र शर्मा को व्यंग्य शिखर सम्मान से सम्मानित किया गया। उर्दू साहित्यकार शारिक कैफी को जश्न-ए-अदब अवार्ड से नवाजा किया। इसके साथ ही कैफी की पुस्तक देखा क्या भूल गए हम का विमोचन किया गया।

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