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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Jantar Mantar Protest: Not all... only government-filed FIRs will be withdrawn.

जंतर-मंतर आंदोलन: सभी नहीं... सिर्फ सरकारी एफआईआर होंगी वापस

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jul 2026 07:44 PM IST
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निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज छेड़छाड़, मारपीट व पत्रकारों से जुड़े मामलों में कार्रवाई जारी रहेगी
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एलजी की मंजूरी और अदालत की अनुमति के बाद ही पूरी होगी केस वापसी की प्रक्रिया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर चले 36 दिन के आंदोलन और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दर्ज सभी एफआईआर वापस नहीं होंगी। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल वे मामले वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जो पुलिस या राज्य की ओर से दर्ज किए गए हैं। निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज एफआईआर, जिनमें महिला पत्रकारों से छेड़छाड़, मारपीट और अन्य आपराधिक आरोप शामिल हैं, वापस नहीं ली जाएंगी। इन मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
केंद्र सरकार ने पहले ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए भरोसा दिया था कि ऐसे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसी के तहत दिल्ली पुलिस अपनी ओर से दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करेगी। हालांकि सोमवार शाम तक इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी नहीं हुए।
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दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त देवेश चंद श्रीवास्तव के अनुसार, आंदोलन के दौरान दिल्ली में करीब 20 एफआईआर दर्ज हुईं। इनमें अधिकांश मामले प्रदर्शन, कानून-व्यवस्था और हिंसा से जुड़े हैं। वहीं करीब पांच एफआईआर निजी शिकायतों पर दर्ज की गई हैं। इनमें दो महिला पत्रकारों द्वारा छेड़छाड़ और मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। चूंकि ये निजी शिकायतों पर आधारित मामले हैं, इसलिए इन्हें सरकार या पुलिस अपने स्तर पर वापस नहीं ले सकती। इन मामलों में आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिन मामलों में दिल्ली पुलिस स्वयं शिकायतकर्ता है, केवल उन्हीं में अभियोजन पक्ष अदालत से मुकदमा वापस लेने का अनुरोध करेगा। इसके लिए पहले दिल्ली के उपराज्यपाल की मंजूरी आवश्यक होगी। एलजी की अनुमति मिलने के बाद पुलिस संबंधित अदालत में अभियोजन आगे न चलाने का आवेदन देगी। अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी कि मुकदमा वापस लिया जाए या नहीं।
आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों में करीब 14 एफआईआर प्रदर्शन और हिंसा से संबंधित हैं। एक मामला बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने का है, जबकि शेष मामले पत्रकारों और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट तथा अन्य घटनाओं से जुड़े हैं। पुलिस का कहना है कि निजी शिकायतों वाले मामलों में कानून अपना काम करेगा और उन्हें वापस लेने का कोई प्रावधान राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
इस बीच आंदोलन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले भी सामने आए हैं। नई दिल्ली जिला पुलिस के अनुसार, टॉलस्टॉय मार्ग और जंतर-मंतर पर लगे दो आधुनिक सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए गए। आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारी कैमरे अपने साथ ले गए। इस मामले में अलग एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

ऐसे होगी सरकारी एफआईआर वापसी की प्रक्रिया
-केंद्र या सक्षम प्राधिकारी से औपचारिक आदेश जारी होगा।
-दिल्ली पुलिस अभियोजन की ओर से उपराज्यपाल को मुकदमे वापस लेने का प्रस्ताव भेजेगी।
-एलजी की मंजूरी मिलने के बाद पुलिस संबंधित अदालत में अभियोजन आगे न चलाने का आवेदन देगी।
-अदालत आवेदन पर सुनवाई के बाद अंतिम फैसला सुनाएगी। अदालत की अनुमति के बिना कोई भी मुकदमा स्वतः समाप्त नहीं होगा।
केस खत्म करने के तीन वैकल्पिक कानूनी रास्ते
क्लोजर रिपोर्ट: यदि चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है और पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते, तो पुलिस अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। मजिस्ट्रेट की मंजूरी के बाद मामला समाप्त हो सकता है।

हाईकोर्ट की शरण: गंभीर मामलों या राहत न मिलने की स्थिति में बीएनएसएस की धारा 528 के तहत हाईकोर्ट एफआईआर निरस्त करने पर विचार कर सकता है।
लोक अदालत का विकल्प: बिना अनुमति प्रदर्शन, रास्ता जाम या धारा 163 के उल्लंघन जैसे अपेक्षाकृत छोटे मामलों का निस्तारण आपसी सहमति से लोक अदालत में किया जा सकता है।
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आंदोलन से जुड़े मामले एक नजर में
करीब 20 एफआईआर दर्ज हैं।
14 मामले प्रदर्शन और हिंसा से जुड़े।
एक मामला बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने का।
पांच निजी शिकायतों वाले मामले, जिनमें पत्रकारों से मारपीट और छेड़छाड़ के आरोप शामिल।
टॉलस्टॉय मार्ग और जंतर-मंतर पर दो सीसीटीवी कैमरे तोड़ने के मामले की अलग जांच जारी।
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