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Blood Cancer: जामिया का ब्लड कैंसर की वैक्सीन बनाने का दावा, चौथे स्टेज का मरीज ठीक; जानें कब आएगी बाजार में

Sun, 09 Mar 2025 09:27 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Sun, 09 Mar 2025 09:27 PM IST
सार

-क्लीनिकल ट्रायल में वैक्सीन के दिखे सकारात्मक नतीजे
-कैंसर संक्रमण को मात देने वाले सेल का किया मॉडिफिकेशन
-इंटरनेशनल जर्नल सेल रिपोर्ट मेडिसिन ने शोध प्रकाशन किया स्वीकार

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Jamia Millia Islamia University developed a vaccine for blood cancer
जामिया ने बनाई ब्लड कैंसर की वैक्सीन - फोटो : freepik
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विस्तार

जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने ब्लड कैंसर के मरीजों के लिए जीन थेरेपी से इलाज में कामयाबी हासिल की है। क्लीनिकल ट्रायल में मध्यम आयु वर्ग के एक मरीज को डोज दी जा चुकी है। अभी तक वैक्सीन के सकारात्मक नतीजे देखने को मिले हैं। इलाज के बाद मरीज कैंसर मुक्त होने का दावा भी किया गया है। वहीं, वैक्सीन का कोई दुष्प्रभाव भी सामने नहीं आया है। 

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चौथे स्टेज का मरीज हुआ ठीक
शोधकर्ताओं के मुताबिक, जिस मरीज को करीब तीन महीने पहले वैक्सीन की डोज दी गई, वह कैंसर के चौथे चरण में था। एक को ठीक करने के बाद अब वैक्सीन का सात अन्य मरीजों पर ट्रायल जारी है।
 
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किफायती दरों पर वैक्सीन होगी उपलब्ध
जामिया के मल्टी डिसिप्लिनरी सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च एंड स्टडीज (एमसीएआरएस) के इस शोध को फरवरी 2025 में इंटरनेशनल जर्नल सेल रिपोर्ट मेडिसिन ने स्वीकार कर लिया है। वैक्सीन के पेटेंट के लिए आवेदन किया जा चुका है। शोधकर्ताओं का दावा है कि ब्लड कैंसर के मरीजों के लिए यह वैक्सीन किफायती दरों पर भविष्य में उपलब्ध होगी। इसमें तीन-चार साल का समय लग जाएगा।

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डॉ. तनवीर अहमद के नेतृत्व में वैक्सीन हुई तैयार
एमसीएआरएस में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तनवीर अहमद के नेतृत्व में यह वैक्सीन आठ-दस शोधकर्ताओं ने तैयार की है। वैक्सीन शोध टीम का हिस्सा रही डॉ. अरीज अख्तर ने बताया कि हमारे शरीर में अलग-अलग प्रकार के सेल होते है। ब्लड कैंसर बी सेल में होता है। बी सेल श्वेत रक्त कोशिकाओं का एक प्रकार होता है। यह कोशिकाएं आम तौर पर संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं। जब इन कोशिकाओं में असामान्यता आ जाती है तो यह कैंसर का रूप ले लेती हैं। इससे लड़ने में टी सेल सहायक होते है।

टी सेल लड़ाई में पड़ जाते है कमजोर
टी सेल का पूरा नाम टी लिम्फोसाइट होता है। टी लिम्फोसाइट एक तरह की श्वेत रक्त कोशिका है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा है और संक्रमण से लड़ने में मदद करती है। मगर, संक्रमण से लड़ाई के दौरान टी सेल बी सेल के सामने कमजोर पड़ जाते है। बी सेल अपनी बहरूपिया पहचान बना लेता है। टी सेल उन्हें झुंड में ढूंढ़ नहीं पाते है।

तीन साल में वैक्सीन हुई तैयार
डॉ. अरीज अख्तर के मुताबिक, टी सेल को मजबूत करने के लिए उन्हें ब्लड से बाहर निकालकर लैब में टी सेल को दूसरे वायरस के साथ मॉडिफिकेशन किया है। जिससे टी सेल को संक्रमण से लड़ने में मजबूत बनाया जा सके। फिर वापस मरीज के शरीर में इंजेक्शन से टी सेल को डालते है। इस प्रक्रिया को जीन थेरेपी कहते है। तीन साल के अंदर यह वैक्सीन विकसित की गई है। यह टी-सेल थर्ड जेनरेशन के जीन थेरेपी के लिए है।

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