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जेसीसी ने दो छात्रों की गिरफ्तारी को लेकर जारी किया बयान, जामिया प्रशासन से मांगा सर्मथन
Fri, 24 Apr 2020 05:39 PM IST
Mohit Mudgal
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Mohit Mudgal
Updated Fri, 24 Apr 2020 05:39 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी (जेसीसी) ने शुक्रवार बयान जारी कर कहा कि फरवरी में हुए पूर्वोत्तर दिल्ली हिंसा के संबंध में उनके दो सदस्यों की गिरफ्तारी बिना किसी तर्क के की गई है। बात दें कि जेसीसी एक समूह है जिसमें जमिया मिलिया इस्लामिया के छात्र और पूर्व छात्र शामिल हैं, इसका गठन नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) के विरोध में किया गया था।
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दिल्ली पुलिस ने सीएए को लेकर पूर्वोत्तर दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े एक मामले में जामिया के छात्रों मीरान हैदर और सफोरा जरगर पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया है। फरवरी में सांप्रदायिक दंगे भड़काने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार हैदर और जरगर को न्यायिक हिरासत में रखा गया है। बता दें कि जरगर जेसीसी के मीडिया समन्वयक हैं, वहीं हैदर समिति के सदस्य हैं।
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पुलिस ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद के खिलाफ भी यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया है।
कमेटी ने कहा कि दो जामिया छात्र जेसीसी के सक्रिय सदस्य हैं और सीएए व नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में मजबूती से खड़े हैं। जेसीसी ने दावा किया है कि जारगर को इस मामले में पहले गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत दे दी गई थी लेकिन उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया गया और उसके खिलाफ अधिक गंभीर आरोप लगाए गए।
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प्राथमिकी में दावा किया गया है कि दंगों के लिए इन षड्यंत्रकारियों द्वारा महिलाओं और बच्चों को जाफराबाद में सड़कों पर लाया गया था। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि इस मामले में जामिया के अन्य छात्रों की भी जांच चल रही है।
जेसीसी ने कहा कि हमने दंगों में कोई भूमिका नहीं निभाई और यह तथ्य किसी भी अदालत के समक्ष साबित हो जाएगा। हम सभी राजनीतिक और नागरिक संगठनों से लोकतांत्रिक प्रतिक्रिया देने के लिए आग्रह करते हैं । कमेटी ने जामिया मिलिया इस्लामिया प्रशासन से मामले में अपनी चुप्पी तोड़ने और संकट के इस क्षण में अपने छात्रों के साथ खड़े होने का भी आग्रह किया।