एशिया की सबसे बड़ी जेल में कैदियों के बीच खूनी संघर्ष, पुलिसकर्मियों को भी बनाया निशाना
तिहाड़ जेल में बेकाबू हुए कैदी
पहले आपस में भिड़े, फिर जेल कर्मियों-तमिलनाडु सिक्योरिटी पुलिसकर्मियों पर हमला, 13 घायल
कैदियों को काबू करने के लिए बजाना पड़ा इमरजेंसी सायरन
त्वरित कार्रवाई दस्ते ने पकड़कर वापस बैरक में कर दिया बंद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बेकाबू कैदियों पर काबू पाने के लिए इमरजेंसी सायरन बजाना पड़ा। मौके पर पहुंचे त्वरित कार्रवाई दस्ते ने कैदियों को काबू किया और उन्हें वापस बैरक में बंद किया गया। हमले में 13 जेल कर्मी व तमिलनाडु सिक्योरिटी पुलिसकर्मी जख्मी हुए।
घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। जेल प्रशासन की शिकायत पर कैदियों के खिलाफ षड्यंत्र रचकर सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और मारपीट करने का मामला दर्ज किया गया है।
कई गुटों में बंटे कैदी और उग्र हो गए
जानकारी के मुताबिक, घटना 14 सितंबर की है। सुबह जेल परिसर में बने मंदिर के पास कई कैदी मौजूद थे। उनके बीच अचानक लड़ाई शुरू हो गई। उसके बाद कैदी कई गुटों में बंट गए और इस कदर उग्र हो गए कि वहां मौजूद जेल अधिकारियों के लिए उन पर काबू पाना मुश्किल हो गया।
कैदियों ने उन्हें काबू कर रहे जेल कर्मियों और तमिलनाडु सिक्योरिटी पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। स्थिति बेकाबू होती देख इमरजेंसी सायरन बजा दिया गया और मौके पर त्वरित कार्रवाई दस्ते को बुलाया गया। साथ ही जेल के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।
हमले में घायल अनीश, रवि, प्रवीण, गौरव, सुनील, आशीष, दिनेश, अमित, थिरूमलई, कनग गेरई, इशाक, अरुण कुमार और थीयंत को अस्पताल भेजा गया। वहीं कैदियों को बड़ी मुश्किल से काबू करने के बाद उन्हें बैरक में बंद कर दिया गया। जेल प्रशासन की तरफ से हरि नगर थाने में इस बाबत शिकायत दी गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जेल में सप्लाई हो रही ड्रग्स
एक तरफ तिहाड़ में कैदियों को सुधारने की मुहिम चलाई जा रही है, दूसरी ओर जेल के भीतर ड्रग्स आसानी से कैदियों तक पहुंच रही है। जांच में पता चला कि इस मामले की शुरुआत जेल में पहुंच रहे नशे के सामान को लेकर हुई।
12 सितंबर की सुबह तिहाड़ जेल-संख्या तीन में तीन विचाराधीन कैदी जमाल, फैजान और वीरेंद्र नशे की ओवरडोज की वजह से बेसुध पाए गए। तीनों को डीडीयू अस्पताल में भर्ती कराया गया।
वापस लौटने पर तीनों को अलग-अलग सेल में डाल दिया गया। जमाल इस बात से खफा होकर 13 सितंबर को गाली गलौज करने लगा। जब जेल अधिकारियों ने उसे समझाने की कोशिश की, तो उन्हें फंसाने की धमकी देकर अपने सिर को दीवार पर मारने लगा। जेल अधिकारियों ने उसे किसी तरह से काबू किया।
रात में फिर से जमाल और वीरेंद्र बेकाबू हो गए और खुद को घायल करने के साथ-साथ दूसरे कैदियों को भी घायल कर दिया। अगले दिन सभी कैदियों ने मिलकर जमकर बवाल कर दिया।