जहांगीरपुरी हिंसा: अंसार समेत अन्य के खिलाफ ईडी ने दर्ज किया मनी लॉन्ड्रिंग का मामला, पांच के गैर जमानती वारंट जारी
एक अधिकारी ने बताया कि हिंसा का मुख्य आरोपी अंसार(35) इलाके में सबसे पैसे वाला है। उसकी इलाके में दहशत और इज्जत बहुत ज्यादा थी। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि हिंसा मामले में अपराध शाखा ने पांच अन्य आरोपियों सनवर कालिया, सद्दाम खान, अनवर, चांद और सलमान की पहचान कर ली है।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जहांगीरपुरी हिंसा मामले में मुख्य आरोपी मोहम्मद अंसार समेत अन्य संदिग्धों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की आपराधिक धाराओं के तहत प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की है। ईडी की ईसीआईआर पुलिस की एफआईआर के समान होती है।
दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने 21 अप्रैल ईडी को खत लिखकर वित्तीय एंगल की जांच पीएमएलए के तहत करने आग्रह किया था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस हिंसा के पीछे कहीं से फंडिंग हुई है। ईडी का मामला पुलिस शिकायतों के आधार पर है। हनुमान जन्मोत्सव के दौरान जहांगीरपुरी में 16 अप्रैल को हिंसा भड़क उठी थी। इसमें आठ पुलिसकर्मी और एक स्थानीय व्यक्ति घायल हुआ था।
जहांगीरपुरी के बी-ब्लॉक निवासी अंसार (35) को इस हिंसा का मुख्य आरोपी कहा जा रहा है। ईडी इस मामले में सभी आरोपियों से पूछताछ कर सकती है। हिंसा मामले में अब तक 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया है जबकि दो नाबालिग भी हिरासत में लिए गए हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की जांच चल रही है। अंसार समेत पांच आरोपियों के खिलाफ एनएसए की सख्त धाराएं लगाई गई हैं।
जहांगीरपुरी में शोभा यात्रा पर हुए पथराव के बाद भड़की हिंसा मामले में रोज नए-नए खुलासा सामने आ रहे हैं। अब नया खुलासा ये सामने आया है कि अंसार सी-ब्लॉक जहांगीरपुरी का सबसे अमीर व्यक्ति है। दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने जहांगीरपुरी हिंसा मामले में पांच अन्य आरोपियों की पहचान की है। दिल्ली पुलिस को इन आरोपियों के कोर्ट से गैर जमानती वारंट मिले हैं।
जहांगीरपुरी हिंसा मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हिंसा का मुख्य आरोपी अंसार(35) इलाके में सबसे पैसे वाला है। उसकी इलाके में दहशत और इज्जत बहुत ज्यादा थी। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि जहांगीरपुरी हिंसा मामले में अपराध शाखा ने पांच अन्य आरोपियों सनवर कालिया, सद्दाम खान, अनवर, चांद और सलमान की पहचान कर ली है।
पांच मुख्य आरोपियों को आठ दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा
अदालत ने जहांगीरपुरी हिंसा मामले के पांच मुख्य आरोपियों को आठ दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। वहीं मामले के चार अन्य आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
पांचों आरोपियों- अंसार, सलीम, दिलशाद, सोनू और अहीर के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाया गया है। शनिवार को सभी नौ आरोपियों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए रोहिणी कोर्ट में पेश किया गया।
अपराध शाखा जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि मामला बहुत संवेदनशील है और साजिश में शामिल अन्य आरोपियों का पता लगाने के लिए आगे की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान आरोपियों को पश्चिम बंगाल और अन्य जगहों पर ले जाने की जरूरत हो सकती है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि जांच हित में आरोपियों का आठ दिन का पुलिस रिमांड मंजूर किया जाए।
अदालत ने जांच अधिकारी के आग्रह कर एनएसए के तहत गिरफ्तार सभी पांचों आरोपियों को आठ दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया, जबकि अन्य 4 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अदालत ने कहा जांच के लिए रिमांड जरूरी है।
उत्तर पश्चिमी दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में हनुमान जयंती जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच हुई झड़प में नौ लोग घायल हो गए। घायलों में कई पुलिस कर्मी भी शामिल है।
जहांगीरपुरी के पीड़ितों से मिलने पहुंचे एएमयू और जामिया के छात्र
जहांगीरपुरी में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) और जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्रों और उनके साथ एक संगठन के पदाधिकारी शनिवार को पुलिस को चकमा देकर पीड़ितों से मिलने में कामयाब हो गए। उन्होंने सी ब्लाक में अनेक लोगों से दंगा होने के कारण और उनके नुकसान के बारे में पूछा। उन्होंने पीड़ितों को हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया।
सी ब्लाक में सोच नामक एनजीओ चला रहे एएमयू के सात छात्र पहुंचे। उन्होंने अपने संगठन से जुड़ी टी-शर्ट पहन रखी थी और टी-शर्ट के पीछे एएमयू लिखा हुआ था। उन्होंने पीड़ितों से मिलने के लिए कुशल चौक से पुलिस के अवरोधक पार करके सी ब्लाक में प्रवेश किया। इनके बारे में पुलिस को अहसास नहीं हुआ। इन छात्रों ने काफी देर तक सी ब्लाक में पीड़ितों से बातचीत की। इस बीच पुलिस को उनके बारे में पता चला तो उन्हें वहां से भगा दिया गया।
एएमयू के छात्र दोबारा कुशल चौक पहुंचे और मीडिया के समक्ष इलाके के हालात साझा किए। इस मौके पर छात्र आबाद अली ने कहा कि वह यहां किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं आए हैं। उनकी पीड़ितों की सहायता करने की मंशा है। उन्होंने पीड़ितों एवं अन्य लोगों को समझाया कि वेे किसी भी राजनीतिक दल के नेताओं के झांसे में नहीं आए और वे शांति से रहे। वे पीड़ितों को राशन उपलब्ध कराएंगे और उनको कामकाज शुरू कराने में भी मदद करेंगे। दरअसल, दंगे एवं अतिक्रमण हटने से कई लोगों की रेहड़ी और दुकानों में नुकसान हो गया है।
दूसरी ओर जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने एक संगठन के पदाधिकारी दिपांकर के साथ सी ब्लाक में मस्जिद के पास जाकर लोगों से बातचीत की। इस दौरान लोगों ने बताया कि दंगे करने में इलाके के निवासियों का कोई हाथ नहीं है, मगर उन्हें दोषी ठहराया जा रहा है।
उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करते हुए उनकी दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया है। इलाके की छवि धूमिल की जा रही है। उनका कामधंधा ठप हो गया है और वे काम के लिए बाहर भी नहीं जा पा रहे है। इस कारण उनके समक्ष खाना खाने के लाले पड़ गए है। कई घरों में तो राशन भी नहीं रहा है। वह अपने परिचितों से राशन मांगकर खाना बना रहे हैं। उन्होंने पीड़ितों को आश्वासन दिया कि वे उनकी बात मदद करने वाले संगठनों तक पहुंचाने का कार्य करेंगे।