बादल बरसे लेकिन कम नहीं हुआ पुस्तक प्रेमियों का उत्साह
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मौसम के बदले मिजाज और बूंदाबांदी के बावजूद पुस्तक प्रेमियों का उत्साह कम नहीं हुआ। मंगलवार को लगभग चालीस हजार लोग विश्व पुस्तक मेले में पहुंचे। हिंदी और अंग्रेजी हॉल में सामान्य रूप से साहित्यिक गतिविधियां चलीं। थीम पवेलियन में आयोजित रंगारंग कार्यक्रमों का पुस्तक प्रेमियों ने जमकर आनंद उठाया।
पुस्तक मेले में बाल मंडप के अंदर दिल्ली और दूसरे हिस्सों के बाल लेखकों को देश के प्रख्यात लेखकों से रूबरू कराया गया। ताकि बच्चों में साहित्यिक विधा का विकास हो सके।
मंगलवार को साहित्य अकादमी ने बच्चों और प्रख्यात लेखकों के साथ पारस्परिक संवाद व रचना पाठ कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में लेखक व कार्टूनिस्ट आबिद सुरती भी मौजूद थे। इसके अलावा लेखिका पारो आनंद और बाल साहित्यकार अनिल जायसवाल ने रचना पाठ किया। पारो आनंद ने बच्चों को शेर और खरगोश की कहानी सुनाई। उन्होंने बच्चों को बताया कि पुस्तक मेले में पुस्तकें ही सबसे बड़ी मेहमान हैं।
स्लोगन राइटिंग और पोस्टर मेकिंग में बने बच्चों का भविष्य
दिल्ली के किड्स मोटिवेशनल ग्रुप की ओर से बाल मंडप में बच्चों को ‘स्लोगन राइटिंग और पोस्टर मेकिंग’ के विषय में जानकारी दी गई। सनाउल्लाह खान ने ‘स्वच्छ भारत’ विषय पर बच्चों से पोस्टर और स्लोगन बनवाए। आधा दर्जन स्कूलों के प्रतिभागी बच्चों को प्रमाण पत्र दिया गया।
राष्ट्रीय पुस्तकालय में पुस्तकें जमा कराना आवश्यक
हॉल संख्या-12 में राष्ट्रीय पुस्तकालय, कोलकाता का स्टाल है। विश्व पुस्तक मेले में आए सभी 600 से ज्यादा प्रकाशकों को एडवाइजरी जारी कर सूचित किया गया है कि वह अपनी नई प्रतियों की एक कॉपी राष्ट्रीय पुस्तकालय में जमा कराएं। राष्ट्रीय पुस्तकालय के सूचना अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि अब तक उनके पास 100 से ज्यादा नई पुस्तकों की प्रतियां आ चुकी हैं।
मेले के अंत तक लगभग सारे प्रकाशक उन्हें प्रतियां दे देंगे। उन्होंने जानकारी दी कि भारत के संविधान में पुस्तक अधिनियम (पुस्तकालय) 1954 के अनुसार देशभर के सभी प्रकाशकों को अपनी कृतियों की एक प्रति राष्ट्रीय पुस्तकालय को देना अनिवार्य होता है।
विदेशी मंडप : अरब देशों के साथ भारतीय साहित्य का आदान-प्रदान बढ़ा
अरब देशों और भारत के बीच साहित्यिक आदान-प्रदान की झलक विदेशी मंडप में दिखेगी। विदेशी मंडप में दो बड़े खूबसूरत स्टाल लगे हैं। इनमें एक शारजाह का और दूसरा सऊदी अरब का है। इसके अलावा यहां पर मिस्र, तेहरान, ईरान, आबूधाबी, इंग्लैंड, स्पेन, जर्मन, चीन, श्रीलंका और नेपाल के स्टाल भी हैं। विदेशी मंडप में अधिकतर स्टालों पर विदेशों की संस्कृति, इतिहास और बच्चों की पुस्तकें उपलब्ध हैं।
शारजाह पिछले साल भारत में विश्व पुस्तक मेले का मेहमान देश था। अगले वर्ष सऊदी अरब भारत के विश्व पुस्तक मेले का मेहमान देश हो सकता है। बातचीत चल रही है, दोनों देशों को आशा है कि ऐसा ही होगा। शारजाह के स्टाल पर मौजूद शारजाह के भारत में विदेशी मामलों के कार्यकारी अधिकारी मोहन कुमार ने बताया कि पिछले एक साल में अरबी की 60 पुस्तकों को हिंदी में अनुवाद कर भारत के विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जा रहा है।
इसके अलावा भारत से हर साल हजारों की संख्या में साहित्य अरब के देशों में भेजा जा रहा है। अरब देश के स्टाल पर कुरान की 40 अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में प्रतियां उपलब्ध हैं। ऐसा करने में वहां के छह विश्वविद्यालयों और शिक्षा मंत्रालय ने सहयोग किया है। भारत के साथ इन सभी संस्थाओं का बेहतर तालमेल बन रहा है।
मेले के एक स्टाल में लगी आग, नुकसान नहीं
मंगलवार को शाम लगभग पांच बजे हॉल संख्या-11 में ब्लूमबरी प्रकाशक के स्टाल पर आग लग गई। मेला आयोजकों के अनुसार किसी ने बीड़ी या सिगरेट पीकर हॉल के अंदर ही फेंक दी होगी, जिससे आग लग गई, लेकिन तुरंत अग्निशमन यंत्र का इस्तेमाल कर आग पर काबू पा लिया गया। मेले में आए पुस्तक प्रेमियों को जब इस बात की जानकारी हुई, कि मेले में कहीं आग लग गई है, तो कुछ देर तक हॉल संख्या-11 और 12 के बीच स्थित सड़क पर कौतूहल जैसा माहौल बन गया था। लेकिन बाद में स्थिति सामान्य हो गई।