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प्रदूषण के चलते स्कूलों का खेल कैलेंडर बदलना संभव नहीं : दिल्ली सरकार
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- दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका पर दिया जवाब, 24 मार्च को होगी अगली सुनवाई
-हजारों छात्रों की खेल गतिविधियों को प्रतिबंधित करना व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया कि केवल वायु प्रदूषण के आधार पर स्कूलों के वार्षिक खेल कैलेंडर में बदलाव नहीं किया जा सकता। सरकार ने तर्क दिया कि हजारों छात्रों की खेल गतिविधियों को प्रतिबंधित करना व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण है और सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने के बावजूद मौजूदा कैलेंडर को पूरी तरह बदलना संभव नहीं।
यह याचिका कुछ छात्रों द्वारा दायर की गई है, जिसमें सर्दियों के चरम प्रदूषण वाले महीनों (नवंबर-दिसंबर-जनवरी) में आउटडोर खेल प्रतियोगिताओं और टूर्नामेंट पर रोक लगाने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और 21ए (शिक्षा का अधिकार) का हवाला देते हुए तर्क दिया कि जहरीली हवा में कठिन शारीरिक गतिविधियां बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। उन्होंने फेफड़ों की क्षतिग्रस्त तस्वीरें पेश कर इसे आपराधिक लापरवाही करार दिया।
दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि मौजूदा खेल कैलेंडर पहले से ही निर्धारित है और इसे बदलने से बड़े पैमाने पर छात्रों की गतिविधियां प्रभावित होंगी। सरकार का कहना है कि प्रदूषण एक समस्या है, लेकिन केवल इसी आधार पर पूरे कैलेंडर में संशोधन उचित नहीं। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में सतर्क रुख अपनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पहले दिए गए कुछ आदेश केवल अनुरोध के रूप में थे, बाध्यकारी निर्देश नहीं। अदालत ने प्रशासनिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए फैसला सुरक्षित रखा और मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 को निर्धारित की है।
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-हजारों छात्रों की खेल गतिविधियों को प्रतिबंधित करना व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया कि केवल वायु प्रदूषण के आधार पर स्कूलों के वार्षिक खेल कैलेंडर में बदलाव नहीं किया जा सकता। सरकार ने तर्क दिया कि हजारों छात्रों की खेल गतिविधियों को प्रतिबंधित करना व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण है और सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने के बावजूद मौजूदा कैलेंडर को पूरी तरह बदलना संभव नहीं।
यह याचिका कुछ छात्रों द्वारा दायर की गई है, जिसमें सर्दियों के चरम प्रदूषण वाले महीनों (नवंबर-दिसंबर-जनवरी) में आउटडोर खेल प्रतियोगिताओं और टूर्नामेंट पर रोक लगाने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और 21ए (शिक्षा का अधिकार) का हवाला देते हुए तर्क दिया कि जहरीली हवा में कठिन शारीरिक गतिविधियां बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। उन्होंने फेफड़ों की क्षतिग्रस्त तस्वीरें पेश कर इसे आपराधिक लापरवाही करार दिया।
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दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि मौजूदा खेल कैलेंडर पहले से ही निर्धारित है और इसे बदलने से बड़े पैमाने पर छात्रों की गतिविधियां प्रभावित होंगी। सरकार का कहना है कि प्रदूषण एक समस्या है, लेकिन केवल इसी आधार पर पूरे कैलेंडर में संशोधन उचित नहीं। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में सतर्क रुख अपनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पहले दिए गए कुछ आदेश केवल अनुरोध के रूप में थे, बाध्यकारी निर्देश नहीं। अदालत ने प्रशासनिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए फैसला सुरक्षित रखा और मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 को निर्धारित की है।
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