अचानक ही कोर्ट में फूट-फूटकर रो पड़ी ईरोम शर्मिला
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मणिपुर में सशस्त्र सेना विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपीए) के विरोध में 15 वर्ष से भूख हड़ताल पर रह रहीं सामाजिक कार्यकर्ता ईरोम शर्मिला अदालत में फूट-फूटकर रो पड़ीं।
उन्होंने बताया कि एएफएसपीए से मणिपुर के लोगों को काफी कठिनाइयां झेलनी पड़ रही हैं। इसे खत्म किया जाए। बता दें कि ईरोम शर्मिला ने मणिपुर में लागू कानून के विरोध में जंतर-मंतर पर 6 से 8 अक्तूबर 2006 के दौरान भूख हड़ताल की थी।
पुलिस ने उनके खिलाफ आत्महत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था। पटियाला हाउस स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट आकाश जैन के समक्ष ईरोम शर्मिला के बयान रिकॉर्ड किए गए।
इसी दौरान वे भावुक हो गईं और रो पड़ी
इसी दौरान वे भावुक हो गईं और रो पड़ी। उन्होंने कहा कि एएफएसपीए के कारण पिछले कुछ वर्षों में काफी संख्या में लोगों की हत्या हो चुकी है। कई महिलाओं से दुष्कर्म की वारदात प्रकाश में आई हैं। ईरोम ने अदालत से आग्रह किया कि एएफएसपीए को मणिपुर से हटा देना चाहिए।
अपने बयान में ईरोम ने अक्टूबर 2006 में पुलिस पर बल प्रयोग कर जबरन उन्हें जंतर-मंतर से हटाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह सही है कि वर्ष 2000 से लगातार कुछ नहीं खाने से उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है, लेकिन उन्होंने अपनी मेडिकल जांच के लिए कभी मना नहीं किया।
पुलिस ने उन्हें हटाकर उनके मौलिक अधिकारों का हनन किया। उन्होंने कहा कि वह अपने बचाव में गवाहों को पेश करना चाहती हैं। अदालत ने ईरोम के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वह 7 अक्टूबर को गवाहों की सूचना पेश करें।