भगत सिंह ने खुद कहा था कि वो आतंकवादी हैं: इरफान हबीब
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प्रख्यात इतिहासकार इरफान हबीब अब इतिहासकार बिपिन चंद्रा और अन्य इतिहासकारों के समर्थन में उतर आए हैं जिन्होंने 1988 में प्रकाशित हुई किताब 'इंडियाज स्ट्रगल फॉर इंडीपेंडेंस' लिखी है। गौरतलब है कि इस किताब में भगत सिंह को 'क्रांतिकारी आतंकी' बताया गया है।
इसी को लेकर ये किताब इन दिनों विवादों में है। यह किताब दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाती है।
इस किताब और उसके लेखकों का बचाव करते हुए इतिहासकार इरफान हबीब कहते हैं कि 'मैं खुद इस किताब के कई तथ्यों से सहमत नहीं हूं लेकिन भगत सिंह को 'क्रांतिकारी आतंकी' कहना कुछ गलत नहीं है।'
उनके अनुसार भगत सिंह जिस हिंदुस्तान रिपब्लिकन सोशलिस्ट एसोसिएशन से ताल्लुक रखते थे उसने खुद 1929 में पास किए गए अपने प्रस्ताव में 'आतंकी' शब्द का इस्तेमाल किया था।
हबीब तो ये तक कहते हैं कि 'एचआरएसए का 1929 का मेनिफेस्टो भी यही बता कहता है। ये मेनिफेस्टो कांग्रेस के लाहौर सेशन में बांटा गया था। इस में लिखा था, हमारी आतंकी नीतियों की निंदा हो रही है लेकिन हम आतंक का सहारा ब्रिटिश आतंक को खत्म करने के लिए ले रहे हैं।'
महात्मा गांधी को भी दिया था जवाब
हबीब ने इस ओर भी ध्यान आकर्षित किया कि भगत सिंह ने महात्मा गांधी की इस बात कि 'आतंकवाद अपने आप में क्रांति नहीं है' के जवाब में कहा था 'लेकिन कोई भी क्रांति बिना आतंक के पूरी नहीं हो सकती।'
हबीब ने ये भी कहा कि भगत सिंह ने अपने जीवन के अंतिम पडाव में ये माना भी था कि वो शुरूआत के कुछ दिनों में आतंकी थे।
उन्होंने कहा कि आज के समय में आतंक और आतंकवाद एक अपमानजनक शब्द बन गया है क्योंकि आतंकियों की वजह से कई बेगुनाहों की जान जाती है।