स्मृति ईरानी शिक्षा विवाद, चुनाव आयोग को दस्तावेज पेश करने का निर्देश
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पटियाला हाउस अदालत के महानगर दंडाधिकारी हरविंदर सिंह ने दिल्ली चुनाव आयोग को वह दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया है जो केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने चुनावी हलफनामे में संलग्न किए थे। स्मृति ईरानी पर आरोप है कि उन्होंने शिक्षा के संबंध में गलत जानकारी दी थी। मामले की अगली सुनवाई छह जून को होगी।
केंद्रीय मंत्री पर आरोप है कि उन्होंने 2004, 2011 व 2014 के चुनावी हलफनामों में अपनी शिक्षा के बारे में गलत व भ्रामक जानकारी दी थी। इस बाबत स्वतंत्र पत्रकार अहमर खान ने कोर्ट में शिकायत दायर की है।
सुनवाई के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने ईरानी के शिक्षा संबंधी दस्तावेज कोर्ट में पेश किए। इसके अलावा गुजरात व उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग के अधिकारियों ने ईरानी के चुनावी हलफनामे कोर्ट में पेश किए। शिकायतकर्ता ने ईरानी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि उन्होंने हलफनामे में अपनी शिक्षा के संबंध में गलत जानकारी दी है।
ईरानी के बीए डिग्री संबंधी दस्तावेज नहीं मिले हैं
डीयू की ओर से अदालत में पेश सहायक रजिस्ट्रार ओ पी तंवर ने बताया कि स्मृति ईरानी के 1996 के बीए डिग्री संबंधी दस्तावेज नहीं मिले हैं, उन्हें ढूंढा जा रहा है।
कोर्ट में शिकायतकर्ता के वकील केके मनन व अंजलि राजपूत ने बहस करते हुए कहा कि ईरानी ने 2004 में चांदनी चौक सीट के लिए दिए गए चुनावी हलफनामे में खुद को 1996 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ कॉरेसपोंडेंस से स्नातक बताया था।
वहीं, दूसरी बार उन्होंने 2014 में अमेठी लोकसभा सीट के चुनावी हलफनामे में कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग से 1994 में बी.कॉम पार्ट एक किया था। वहीं 11 जुलाई 2011 में गुजरात की सीट के लिए दिए चुनावी हलफनामे में ईरानी ने कहा कि उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ कॉरेसपोंडेंस से बी. कॉम पार्ट-एक किया है।