हादसे को न्योता दे रहीं हैं ग्रेनो वेस्ट के कई गांवों की इमारतें, किए जा रहे हैं अवैध निर्माण
शाहबेरी गांव के खेत पर काटी गई कॉलोनियों और इन पर खड़ी की गई बहुमंजिला इमारतें इकलौती नहीं हैं। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ऐसे लगभग 8 गांवों की भूमि पर इसी तरह की अवैध इमारतें हादसों को न्योता दे रही हैं। बिना अनुमति के जब इस तरह की बिल्डिंग बनाई जाती है तो न तो उन्हें प्राधिकरण रोकता है और न ही प्रशासन कोई कार्रवाई करता है। छले कुछ साल में ग्रेटर नोएडा वेस्ट का तेजी से विकास हुआ है।
इसका बड़ा कारण है कि यह क्षेत्र देश की राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के करीब स्थित है। यही कारण है कि यहां बड़े-बड़े बिल्डर बहुमंजिला सोसाइटी बनाने में जुटे हैं। वहीं दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा व ग्रेटर नोएडा में नौकरी व्यापार व कारोबार करने वाले लोग भी यहां रहना पसंद करते हैं। इसके चलते ग्रेटर नोएडा वेस्ट में लगातार भूमि की कीमत आसमान छू रही है और दिनोंदिन यहां की आबादी बढ़ती जा रही है।
इसी का लाभ उठाने के लिए कुछ बिल्डर किसानों की भूमि खरीद कर कॉलोनी काटते हैं और यहां अवैध रूप से बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर देते हैं। इन बहुमंजिला इमारतों के लिए बिल्डर घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल करते हैं। केवल शाहबेरी गांव ही नहीं हैबतपुर, एमनाबाद, बिसरख, पतवाड़ी आदि गांव की भूमि पर भी इसी तरह अवैध निर्माण किए जा रहे हैं।
कई बार कब्जे को लेकर हुए हैं बवाल
ग्रेनो वेस्ट में इसी तरह की भूमि पर बनाए गए अवैध मकान को लेकर कई बार विवाद और बवाल हो चुके हैं। दो माह पूर्व बिसरख कोतवाली क्षेत्र की ऐसी ही जमीन पर बने मकान में
रहने वाले लोगों के बीच झगड़ा हुआ था। फायरिंग भी हुई थी। पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर कार्रवाई की। झगड़े का वीडियो भी वायरल हुआ था।
चर्चा में रहा है शाहबेरी
शाहबेरी गांव सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है। 2009-10 में सुप्रीम कोर्ट ने इसी गांव की जमीन का अधिग्रहण रद्द कर दिया था। प्राधिकरण ने जो जमीन अधिगृहीत की थी, उसको किसानों को वापस करना पड़ा था। प्राधिकरण जमीन को बिल्डरों को बेच चुका था, जिसकेकारण करीब 20 हजार फ्लैट फंस गए थे। प्राधिकरण ने किसानों को जो मुआवजा दिया था, वह भी फंस गया। प्राधिकरण दोबारा से गांव की जमीन अधिगृहीत नहीं कर सका।
जिन किसानों की जमीन थी, उन्होंने प्रॉपर्टी डीलरों को महंगी दर पर जमीन बेच दी। बताते हैं कि ज्यादातर किसान जमीन बेचकर गाजियाबाद चले गए। गांव में इसी कारण से अवैध निर्माण की झड़ी लग गई। गांव के आसपास बड़े-बड़े बिल्डरों के प्रोजेक्ट हैं। प्रॉपर्टी डीलरों ने भी गांव में छोटे-छोटे प्लाट खरीदकर उन पर फ्लैट बनाकर बेच डाले। सस्ते के चक्कर में लोग फंसते चले गए।