Delhi: अवैध रूप से विदेश भेजने वाले अंतरराष्ट्रीय गैंग का खुलासा, पुलिस ने चार आरोपियों को किया गिरफ्तार
विदेश भेजने का झांसा देकर एजेंट लोगों से मोटी रकम वसूलते थे, इसके बाद यह फर्जी बैंक स्टेटमेंट, नकली दस्तावेजों की श्रृंखला बनाते थे। इन दस्तावेजों को हाईटेक कंप्यूटर एप्लिकेशन और एडिटिंग सॉफ्टवेयर की मदद से तैयार किया जाता था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजधानी दिल्ली में अवैध रूप से लोगों को विदेश भेजने में शामिल एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने खुलासा किया है। पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी अल सल्वाडोर और मैक्सिको में मौजूद एजेंट की मदद से इस गिरोह का चला रहे थे। यह एजेंट विदेश में उनकी मदद करते। पुलिस ने आरोपियों के पास से विभिन्न देशों के 80 पासपोर्ट, फर्जी बैंक स्टेटमेंट, फर्जी कागजात, 3.50 लाख कैश, एक कार, पांच महंगे मोबाइल व अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। पकड़े गए आरोपियों की पहचान जनकपुरी निवासी गिरीश भंडारी, उत्तम नगर निवासी हिमांशु मेहता, तिलक नगर निवासी गगन शर्मा और ओम विहार निवासी रमेश आर्य के रूप में हुई है।
अपराध शाखा के विशेष आयुक्त रविंद्र सिंह यादव ने बताया कि आरोपी टूर एंड ट्रैवल बिजनेस की आड़ में लोगों से मोटी रकम वसूलकर उन्हें अवैध रूप से विदेश भेजने का गिरोह चला रहे थे। आरोपियों का नेटवर्क पूरे एनसीआर के अलावा पंजाब, हरियाणा और गुजरात में फैला हुआ था। चारों इस नेटवर्क को अपने एजेंट के जरिये से चला रहे थे। लोगों को अपने जाल में फंसाकर एजेंट इनको विदेश भेजने का झांसा देते थे। बाद में शेंगेन वीजा (27 देशों में वैध) के लिए छह लाख रुपये वसूले जाते थे। मैक्सिको सीमा के माध्यम से अमेरिका में अवैध प्रवेश के लिए वह लगभग 27 लाख प्रत्येक व्यक्ति से वसूलते थे। एजेंट पीड़ितों के पासपोर्ट और बैंक डिटेल लेकर दिल्ली में बैठे गिरोह को दे देते थे।
विदेश भेजने का झांसा देकर एजेंट लोगों से मोटी रकम वसूलते थे, इसके बाद यह फर्जी बैंक स्टेटमेंट, नकली दस्तावेजों की श्रृंखला बनाते थे। इन दस्तावेजों को हाईटेक कंप्यूटर एप्लिकेशन और एडिटिंग सॉफ्टवेयर की मदद से तैयार किया जाता था। वह इन जाली और मनगढ़ंत दस्तावेजों के आधार पर वीजा की प्रक्रिया को पूरा करते थे। आरोपी टूरिस्ट वीजा मिलने के बाद बोर्डिंग की सुविधा के लिए इन पीड़ितों से अधिक पैसे वसूलते थे। फिलहाल पुलिस गिरोह के बाकी आरोपियों की तलाश में जुटी है। इनकी तलाश में जगह- जगह छापेमारी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को दबोच लिया जाएगा।
ऐसे दिया जाता था वारदात को अंजाम
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया है कि वह पिछले 10-12 सालों से टूर एंड ट्रैवल्स व्यवसाय की आड़ में अवैध वीजा का कारोबार कर रहे हैं। उनका गिरोह एनसीआर के अलावा कई राज्यों में फैला हुआ है। वह चार से पांच लोगों को एक समूह में सबसे पहले नई दिल्ली या जयपुर से बाकू (अजरबैजान) के लिए फ्लाइट बुक करते थे। इस मार्ग पर फ्लाइट में 7-8 घंटे शारजाह (यूएई) का स्टे है। इस मार्ग को प्राथमिकता दी जाती है। आवेदन करने के आधे घंटे के भीतर बाकू का वीजा प्राप्त किया जा सकता है, यह पर्यटक वीजा 30 दिनों के लिए वैध है। टिकट मिलने के बाद लोगों को 3 से 10 दिनों बाकू में रखते। इनके बाकू से भारत रिटर्न टिकट पहले ही तुर्की एयरलाइंस में बुक कर दी जाती थी। दरअसल टूरिस्ट वीजा में रिटर्न टिकट बुक करना अनिवार्य है। मगर इस्तांबुल में यात्रियों को जानबूझकर दिल्ली जाने वाली फ्लाइट छोड़ने के लिए कहा जाता है। इसके बाद उन्हें अलग-अलग हवाई मार्ग व रास्तों से मैक्सिको और अमेरिका के दो मुख्य सीमा बिंदुओं यानी तिजुआना और मैक्सिको लाया जाता। इसके अलावा आरोपी यूरोप-मैक्सिको रूट का भी इस्तेमाल करते थे।
पुलिस के मुताबिक आरोपी गिरीश भंडारी इस अवैध गिरोह का मास्टरमाइंड है। उसने हिमांशु मेहता, रमेश आर्य और गगन शर्मा को अपनी टीम में शामिल किया। उसने ‘हर्ष टूर एंड ट्रैवल्स’ के नाम से तिलक नगर, दिल्ली में टूर एंड ट्रैवल एजेंसी खोली। हिमांशु मेहता फ्लाइट बुकिंग, होटल बुकिंग, इंश्योरेंस, क्लाइंट मीटिंग संबंधी कार्य करता है। गगन शर्मा और रमेश अपने बॉस गिरीश भंडारी के बताए अनुसार अलग-अलग व्यक्तियों से कैश और पासपोर्ट लेते थे। पुलिस इनसे पूछताछ कर मामले की जांच कर रही है।