नीडो की मौत मामले में आया एक नया मोड़
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दिल्ली में नीडो तानियन की मौत मामले में नया मोड़ आ गया है। घटना के बाद तानियन पूरी रात ग्रीन पार्क स्थित अपने घर नहीं पहुंचा था। अगले दिन सुबह जब वह सुबह घर पहुंचा तो उसके चेहरे पर हंसी थी। मामले में दिल्ली पुलिस ने जिन लोगों के बयान दर्ज किए हैं, उससे यह बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, नीडो के दोस्त समेत करीब आधा दर्जन से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। घटनास्थल के आसपास रहने वाले लोगों से भी पूछताछ की गई। इन लोगों ने आपस में झड़प होने की बात तो कही, मगर ज्यादा झगड़ा होने से इंकार किया है।
सोते समय हुई थी तानियन की मौत!
पुलिस अधिकारियों के अनुसार 29 जनवरी को दोपहर करीब एक बजे नीडो का पनीर दुकानदार फरमान और अन्य लोगों से झगड़ा हुआ था। लाजपत नगर थाने से वह दोस्तों के साथ चला गया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वह रात को ग्रीन पार्क स्थित घर नहीं पहुंचा। वह 30 जनवरी की सुबह छह बजे घर पहुंचा था। पूछताछ में यह बात सामने आई है कि वह जब घर पहुंचा तो हंस रहा था और खूब बात कर रहा था। उसके बाद सुबह साढ़े छह बजे सो गया था। दोपहर तक जब वह नहीं उठा तो संदेह होने पर उसे उठाने का प्रयास किया गया। नीडो को 30 जनवरी को शाम करीब साढ़े पांच बजे एम्स ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार सोते समय तानियन की मौत हुई है।
दिल्ली पुलिस नहीं दाखिल कर पाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट
नीडो तानियन की मौत मामले में दिल्ली पुलिस अभी तक पोस्टमार्टम की रिपोर्ट पेश नहीं कर पाई। इसको लेकर अदालत ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई, साथ ही रिपोर्ट तैयार न करने पर एम्स को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। पुलिस ने मामले में 15 दिन में आरोप पत्र दायर करने का तर्क रखा है। मुख्य न्यायाधीश एनवी रामन और न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंड लॉ ने इस बात को काफी गंभीरता से लिया कि एम्स ने अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्रदान नहीं की। पुलिस ने कहा कि एम्स से जल्द से जल्द रिपोर्ट देने का आग्रह किया गया है।
तो रिपोर्ट आने में लगेगा एक महीना!
दिल्ली सरकार के अधिवक्ता दयान कृष्णन ने कहा कि दक्षिणी दिल्ली के मामलों में पोस्टमार्टम एम्स में ही करवाया जाता है, लेकिन रिपोर्ट अभी नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि उच्चस्तर पर प्रयास के बावजूद वसंत विहार गैंगरेप मामले में एक माह के बाद ही रिपोर्ट मिल पाई थी। वहीं, एक एनजीओ के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पूर्वोत्तर के लोगों से अक्सर छेड़छाड़ और नस्लभेदी टिप्पणी कर प्रताड़ित किया जाता है। इसके बावजूद पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। यही नहीं, पुलिस उनकी रिपोर्ट तक दर्ज नहीं करती।
एम्स के डायरेक्टर से जवाब तलब
अदालत ने नाराजगी जताते हुए पुलिस से कहा कि इन लोगों की परेशानियों के ध्यानार्थ आप उत्तर पूर्व के लोगों की भर्ती क्यों नहीं करते। अधिवक्ता ने कहा कि पुलिस में काफी आईपीएस अधिकारी इन्हीं राज्यों से हैं। इस पर अदालत ने कहा कि आईपीएस नहीं, बल्कि निचले स्तर पर नियुक्तियां होनी चाहिए। अदालत ने सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित करते हुए एम्स निदेशक को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि आखिर रिपोर्ट इतनी देर से क्यों तैयार की जाती है। यह भी बताने को कहा है कि एम्स में प्रति दिन कितने पोस्टमार्टम होते हैं और कितनों में रिपोर्ट दी जाती है। अदालत ने एम्स के चिकित्सा अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।