राजनीतिक फायदे के चक्कर में चौटाला ने लिया ‘रिस्क’
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मेडिकल ग्राउंड पर जेल में बंद चल रहे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने जींद रैली में जनता को संबोधित करने का बड़ा रिस्क उठाया है। आगे मेडिकल ग्राउंड पर बेल का आवेदन न करने सहित, उनकी नियमित जमानत के अलावा अपील के उनके पक्ष में फैसलों में यह अड़चन बन सकता है।
एक दशक से सत्ता का वनवास झेल रहे चौटाला को इस बार हरियाणा में काफी उम्मीदे हैं। इसी कड़ी में राजनीतिक लाभ उठाने के लिए चौटाला बृहस्पतिवार की रैली में पहुंचकर लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ने की कोशिश में लगे रहे।
चौ. देवीलाल की जयंती के अवसर पर आयोजित जींद रैली में ओमप्रकाश चौटाला का पहुंचना सीबीआई को झटका दे गया। सीबीआई ने शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई शुरू होते ही सबसे पहले मेडिकल ग्राउंड पर जमानत पर चल रहे चौटाला के जींद रैली को संबोधित करने का मामला उठा दिया।
राजनीतिक पंडितों ने सही माना ये 'स्टंट'
अदालत ने भी इसे गलत माना लेकिन शायद इनेलो के राजनीतिक पंडितों ने यह रिस्क उठाना ही सही माना और कोर्ट में चौटाला के वकीलों ने तुरंत ही सरेंडर करने की पेशकश कर फिर चिकित्सा जांच के लिए बेल न मांगने की बात कही।
विधि विशेषज्ञों का मानना है कि चौटाला की मेडिकल ग्राउंड पर बेल का आवेदन हो या नियमित बेल का आवेदन उन्हें मुसीबत उठानी पड़ सकती है। हाईकोर्ट में चौटाला की अपील पर फैसला सुरक्षित है लेकिन चौटाला का जींद रैली में जाना भी ऑर्डर में कोर्ट दर्शा सकती है।
दरअसल, एक साल पहले टीचर भर्ती घोटाले में सजायाफ्ता चल रहे ओमप्रकाश चौटाला व उनके पुत्र अजय चौटाला के लिए विधानसभा चुनाव 2014 महत्वपूर्ण है। इस चुनाव में वे अपना भविष्य टटोल रहे हैं।
ओमप्रकाश चौटाला का जींद रैली में जाना और तमाम रैली में पहुंचने का बड़ा रिस्क उठाते हुए गरीब के घर में रोटी के लिए बार-बार जेल जाने सहित तिहाड़ जेल से शपथ लेने की बात कहकर अपने वोटरों को भावनात्मक रूप से जोड़ने की कोशिश की। रैली में भीड़ भी इसी रणनीति के तहत लाई गई थी।
क्या कहते हैं सविधान विशेषज्ञ?
संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप के अनुसार सजायाफ्ता व्यक्ति किसी भी सूरत में विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ सकता, ऐसे में विधानसभा के लिए योग्य न होने पर राज्यपाल पार्टी का बहुमत साबित हो जाने पर भी उन्हें मुख्यमंत्री की शपथ लेने को नहीं बुला सकते।
वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता के अनुसार कानूनी रूप से ओमप्रकाश चौटाला नामांकन ही दाखिल नहीं कर सकते तो मुख्यमंत्री कैसे बन जाएंगे। रैली में शामिल होने से उन्हें कोर्ट की नाराजगी आगे भी झेलनी पड़ सकती है।
संविधान विशेषज्ञ व दिल्ली विधानसभा के पूर्व सचिव एसके शर्मा के अनुसार जेल में मुख्यमंत्री पद की शपथ किसी ने ली हो, देश में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है। चौटाला सजा से बरी होने से पहले विधानसभा का चुनाव ही नहीं लड़ सकते तो राज्यपाल उन्हें किसी आधार पर मुख्यमंत्री की शपथ दिलाएंगे। राज्यपाल जेल में शपथ दिलाने जाएंगे यह सुनना भी हास्यास्पद लगता है। मेरे हिसाब से ऐसा कोई प्रावधान नहीं बनता।
'गंभीर' ओपी चौटाला रैली में कैसे पहुंचे?
हाईकोर्ट ने हरियाणा जेबीटी भर्ती घोटाले में दोषी पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला को स्वास्थ्य आधार पर मिली जमानत का उल्लंघन करके जींद में रैली को संबोधित करने के मामले को गंभीरता से लिया है।
अदालत ने गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल को उन्हें जींद जाने की इजाजत देने पर भी नाराजगी जताई है। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत के चिकित्सा जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करते का निर्देश देते ही चौटाला ने जेल में समर्पण करने की बात मान ली।
शुक्रवार को न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल के समक्ष सुनवाई शुरू होते ही सीबीआई अधिवक्ता आर बेहुरा ने कहा कि चौटाला ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है। हर बार कहा जाता है कि वे आईसीयू में भर्ती हैं और हालत गंभीर है, लेकिन वे बृहस्पतिवार को जींद में रैली को संबोधित करने चले गए। यदि उनकी हालत गंभीर है तो वे कैसे गए।
वहीं, चौटाला की ओर से पेश अधिवक्ता हरीहरण ने माना कि उनके मुवक्किल जींद गए थे। उन्होंने कहा कि जींद में चौटाला के पिता चौधरी देवीलाल का जन्मशताब्दी समारोह था। मेदांता के डॉक्टरों ने जींद जाने की इजाजत दी थी। इसके बाद उन्हें एयर एंबुलेंस से ले जाया गया था।
मेदांता ने कैसे दे दी चौटाला को इजाजत?
अदालत ने चौटाला को शनिवार को एम्स में पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत के कड़ा रवैया अपनाने व आदेश पारित करते ही चौटाला के अधिवक्ता ने तुरंत कहा कि उनका मुवक्किल समर्पण के लिए तैयार है।
अदालत ने उनके आग्रह को स्वीकार कर मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश वापस लेते हुए चौटाला को 17 अक्तूबर को तिहाड़ जेल प्रशासन के समक्ष समर्पण करने का आदेश दे दिया।
इस मामले में हैं दोषी
निचली अदालत ने हरियाणा के ओमप्रकाश चौटाला, उनके पुत्र अजय चौटाला सहित दस को दस-दस साल कैद की सजा सुनाई थी। सीबीआई ने मामले की जांच बाद 2008 में 17 महिला समेत 62 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। सीबीआई का आरोप था कि आरोपियों ने 1999 व 2000 के दौरान 3206 जेबीटी टीचर भर्ती घोटाले की साजिश रची।