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Delhi NCR News: हादसे में घायल, रेफर... जिंदगी-मौत के बीच जूझता नूंह
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रिजवान खान
नूंह। सड़क हादसे के बाद घायल व्यक्ति के लिए एक-एक मिनट बेहद अहम होता है, लेकिन नूंह जिले में गंभीर हादसों के बाद मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी यहीं से शुरू हो जाती है। जिला नागरिक अस्पताल मांडीखेड़ा और नल्हड़ मेडिकल कॉलेज में दुर्घटना एवं आपातकालीन उपचार की सुविधा है, लेकिन आधुनिक ट्रामा सेंटर जैसी व्यापक सुविधाओं के अभाव में गंभीर मरीजों को कई बार उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर करना पड़ता है। ऐसे में अस्पताल बदलने में लगने वाला समय मरीज की जिंदगी पर भारी पड़ सकता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2020 से 2025 तक जिले में 2783 सड़क हादसे हुए, जिनमें 1204 लोगों की मौत और 2441 लोग घायल हुए। छह साल में हर वर्ष औसतन 200 से अधिक लोगों ने सड़क हादसों में जान गंवाई।
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नूंह। सड़क हादसे के बाद घायल व्यक्ति के लिए एक-एक मिनट बेहद अहम होता है, लेकिन नूंह जिले में गंभीर हादसों के बाद मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी यहीं से शुरू हो जाती है। जिला नागरिक अस्पताल मांडीखेड़ा और नल्हड़ मेडिकल कॉलेज में दुर्घटना एवं आपातकालीन उपचार की सुविधा है, लेकिन आधुनिक ट्रामा सेंटर जैसी व्यापक सुविधाओं के अभाव में गंभीर मरीजों को कई बार उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर करना पड़ता है। ऐसे में अस्पताल बदलने में लगने वाला समय मरीज की जिंदगी पर भारी पड़ सकता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2020 से 2025 तक जिले में 2783 सड़क हादसे हुए, जिनमें 1204 लोगों की मौत और 2441 लोग घायल हुए। छह साल में हर वर्ष औसतन 200 से अधिक लोगों ने सड़क हादसों में जान गंवाई।
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