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एनीमिया के लिए स्वदेशी टीका तैयार: मुफ्त मिल रही आयरन की गोली, पर 40 फीसदी महिलाएं नहीं खातीं

Wed, 10 Apr 2024 07:47 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Wed, 10 Apr 2024 07:47 AM IST
सार

विशेषज्ञ बताते हैं कि देश में 15 से 45 साल तक की उम्र की महिलाओं में एनीमिया के मामले बढ़कर 52 फीसदी तक पहुंच गए हैं। इसकी रोकथाम के लिए देश में एनीमिया मुक्त भारत अभियान भी चल रहा है, लेकिन इसका असर नहीं दिख रहा।

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Indigenous vaccine prepared for women suffering from anemia
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महिलाओं में एनीमिया की समस्या को दूर करने के लिए सरकार आयरन की गोली मुफ्त उपलब्ध करा रही है, लेकिन शोध बताते हैं कि 40 फीसदी महिलाएं दवा खाती नहीं हैं। दवा न खाने के पीछे महिलाओं की लापरवाही और दवा का शुरुआती प्रभाव सहित दूसरे कारण हैं।

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विशेषज्ञ बताते हैं कि देश में 15 से 45 साल तक की उम्र की महिलाओं में एनीमिया के मामले बढ़कर 52 फीसदी तक पहुंच गए हैं। इसकी रोकथाम के लिए देश में एनीमिया मुक्त भारत अभियान भी चल रहा है, लेकिन इसका असर नहीं दिख रहा। इसे देखते हुए एनीमिया से पीड़ित महिलाओं के लिए स्वदेशी टीका तैयार किया गया है। इस टीके की सुरक्षा, टीके को लगाने के बाद शरीर पर असर व दूसरे कारणों पर चर्चा करने के लिए मंगलवार को एम्स में दुनियाभर के विशेषज्ञ एकजुट हुए।
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बैठक के दौरान आईवी (इंट्रावेनस) आयरन इंजेक्शन पर चर्चा हुई। चर्चा के दौरान एम्स के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रमुख डॉ. नीना मल्होत्रा ने कहा कि शोध में आईवी (इंट्रावेनस) आयरन इंजेक्शन प्रभावी पाया गया है। यह सीधे आयरन की पूर्ति कर सकता है, लेकिन यह महिलाओं के लिए सुरक्षित है या नहीं इस पर चर्चा चल रही है। इसमें देखा जा रहा है कि वैक्सीन को प्राथमिक चिकित्सा केंद्र पर उपलब्ध करवाया जा सकता है या नहीं। इसके अलावा इसे लेकर दूसरे विषयों पर भी चर्चा की जा रही है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि यह जल्द महिलाओं के लिए उपलब्ध होगा। देश में 50 फीसदी से अधिक महिलाओं में एनीमिया की समस्या है। यह जच्चा और बच्चा दोनों के लिए खतरनाक है। 
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पूरी दुनिया को कराएंगे उपलब्ध
एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. कपिल यादव ने कहा कि स्वदेशी टीके की कीमत घटकर 300 से 500 रुपये तक आ गई है। इसकी एक डोज ही प्रभावी है। पहले विदेशी टीके उपलब्ध थे जो चार से पांच लगाने पड़ते थे। उनकी कीमत भी दस गुना ज्यादा थी। हम उम्मीद कर रहे हैं कि भारत में यह जल्द बड़े स्तर पर महिलाओं को उपलब्ध होगा। साथ ही दुनियाभर में इसे निर्यात कर सकेंगे।


मां को दिल का दौरा पड़ने की रहती है आशंका
एम्स के प्रोफेसर डॉ. जेबी शर्मा ने कहा कि महिलाओं में खून की कमी के कारण एनीमिया हो सकता है। यह गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए खतरनाक होता है। यदि हीमोग्लोबिन की मात्रा सात ग्राम से कम हो जाती है तो स्थिति गंभीर हो सकती है। यह स्तर 11 ग्राम से अधिक होना चाहिए। यदि मां एनीमिया से पीड़ित है तो बच्चा समय से पूर्व पैदा हो सकता है। ऐसे में बच्चे का दिमाग पूरी तरह से विकसित नहीं होगा। मां को दिल का दौरा पड़ने की आशंका रहती है। रक्त का रिसाव हो सकता है। कमजोरी रहने की आशंका रहती है। इस समस्या को दूर करने के लिए आयरन की गोली दी जाती है, लेकिन 40 फीसदी महिलाएं कई कारणों से इन्हें खाती नहीं हैं। इस समस्या को देखते हुए स्वदेशी टीका उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसमें एक हजार मिलीग्राम की डोज उपलब्ध करवाई जाएगी, जो सीधे आयरन की पूर्ति कर देगी। इस टीके की सुरक्षा को लेकर चर्चा चल रही है।

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