दुनिया में कोरोना से पहली मौत पर ही अलर्ट हो गया था भारत, पहले 3 दिन में मिल चुके थे ये आदेश
चीन के वुहान से शुरू हुआ कोरोना दुनिया के कई देशों में कोहराम मचा रहा है, लेकिन भारत इससे काफी दूर है। भले ही देश में 114 पॉजिटिव मरीज सामने आ चुके हैं लेकिन अन्य देशों की तुलना में भारत काफी मजबूत है।
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चीन के वुहान से शुरू हुआ कोरोना दुनिया के कई देशों में कोहराम मचा रहा है, लेकिन भारत इससे काफी दूर है। भले ही देश में 114 पॉजिटिव मरीज सामने आ चुके हैं लेकिन अन्य देशों की तुलना में भारत काफी मजबूत है। 135 करोड़ की आबादी होने के बाद भी हम बेहतर स्थिति में हैं। ऐसा मुमकिन इसलिए हुआ, क्योंकि भारत पूरी तैयारियों के साथ कोरोना वायरस का इंतजार कर रहा था। दुनिया में कोरोना से पहली मौत वुहान में 5 जनवरी को हुई, जिसके तुरंत बाद ही भारत अलर्ट पर आ गया। महज तीन दिन में तैयारियां पूरी कीं और फिर इंतजार होने लगा कोरोना वायरस का...। कोरोना वायरस के खिलाफ मोदी सरकार की इसी रणनीति पर ये स्टोरी...
तीन दिन में सभी अलर्ट पर
15 से 17 जनवरी के भीतर सभी अलर्ट पर आ गए। एक तरफ वैज्ञानिक इस वायरस की जांच कैसे हो, इसके बारे में अध्ययन पर जुट चुके थे। वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय ने सभी मंत्रालयों को एकसाथ काम करने का आदेश दे दिया था। मंत्री समूह गठित हुआ। इसके बाद राज्यों को अलर्ट किया। ये कहना है स्वास्थ्य मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव का। वे बताते हैं कि 17 जनवरी की शाम केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की बैठक के बाद लैबोरेटरी डायग्नोसिस, सर्विलांस, इन्फेंक्शन प्रिवेंशन एंड कंट्रोल, रिस्क कम्युनिकेशन, इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम इत्यादि को अलर्ट कर दिया था और विदेशों से आने वालों की स्क्रीनिंग व ट्रेसिंग शुरू कर दी गई।
कोरोना से अनजान थे राज्य, गाइडलाइन देनी पड़ी
आईसीएमआर के एक वैज्ञानिक ने बताया कि कोरोना से उस वक्त देश अनजान था। राज्यों को इसके बारे में कुछ नहीं पता था। आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने तब तक गाइडलाइन तैयार कर ली थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से भी काफी मदद मिली। इन्हीं गाइडलाइन को सभी राज्यों को भेजा और प्रतिदिन वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए गाइडलाइन से जुड़े सवाल भी पूछे, ताकि ये पता चले कि राज्यों ने उस पर कितना ध्यान दिया है।
भारत के गेट पर ही रोकना था कोरोना
शुरुआत में ये तय हुआ कि भारत के गेट (इमीग्रेशन) से पहले ही कोरोना को रोकना था। आदेश जारी हुआ और आरएमएल के तीन डॉक्टरों को दिल्ली के हवाई अड्डे पर तैनात कर दिया। 22 जनवरी से स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई। पहले चार दिन में पुणे की लैब में 20 सैंपल की जांच हुई जिसमें से एक भी पॉजिटिव नहीं निकला। इसके बाद भी भारतीय वैज्ञानिक तैयारियों में जुटे रहे। फिर भारत ने रेक्यू ऑपरेशन के मामले में सबसे अधिक उड़ानें भरीं। चीन, ईरान, इटली आदि देशों से हजारों भारतीयों को निकालकर देश वापस लाया है।
स्क्रीनिंग की वजह से ही मिले पहले तीन केस
31 जनवरी तक देश के 21 हवाईअड्डों पर स्क्रीनिंग चल रही थी। उसी स्क्रीनिंग के जरिए केरल के वे तीन केस पकड़ में आए, जो भारत के पहले कोरोना पॉजिटिव थे। अगर उस वक्त सभी बड़े हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग नहीं होती तो इन मरीजों का पता नहीं चलता।
अंतरराष्ट्रीय मानकों पर चल रही थी थर्मल स्क्रीनिंग
वुहान में कोरोना वायरस फैलना शुरू हुआ तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूनिवर्सल स्क्रीनिंग के मानक बने, जिसे हर देश को अपनाना था। जैसे जैसे देशों के नाम बढ़ते चले गए, वहां से आने वाले यात्रियों को स्क्रीनिंग के दायरे में लाया गया। यही वजह थी कि इटली से आने वालों की जांच मार्च के पहले सप्ताह में शुरू हुई थी।
न दवा, न इलाज सिर्फ आइसोलेशन से बचे लोग
सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बलविंदर सिंह बताते हैं कि शुरूआत से ही कोरोना वायरस हमारे लिए चुनौती था। न दवा, न इलाज, ऐसे में इस महामारी से बचाने के लिए उनके पास सिर्फ आइसोलेशन ही एकमात्र उपाय था। गाइडलाइन के अनुसार उन्होंने अपनी टीम के साथ मरीजों का ध्यान रखा जिसका परिणाम है कि देश में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीज उनके यहां ठीक हुए हैं। 16 में से 7 मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं।
पहले से पता था, भारतीय कारोबार पर पड़ेगा बुरा असर
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि पीएमओ के निर्देश मिलने के बाद जब पहली मंत्री समूह की बैठक हुई थी, उस दौरान कोरोना वायरस के कारण भारतीय कारोबार पर पड़ने वाले बुरे असर पर लंबी चर्चा हुई थी। वित्त मंत्रालय को भी ये स्थिति पता थी, लेकिन वक्त विकल्पों को तलाशने का था। अगर दूसरे देशों से तुलना करें तो भारत व्यापार के लिहाज से अभी भी काफी सुरक्षित है।
सरकार के प्रयास बेहतर, अध्ययन की जरूरत
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल कहते हैं कि कोरोना वायरस को लेकर भारत की तैयारियां काफी बेहतर थीं। इसका परिणाम है कि देश में काफी सीमित केस आए हैं लेकिन अभी भी अध्ययन की जरूरत है। भारत, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में कोरोना के कम मरीज आने पर अध्ययन होना चाहिए।