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Delhi: खाने की नली से निकाला गया नाशपाती के आकार का ट्यूमर, डॉक्टरों का दावा-देश का सबसे बड़ा
Sun, 14 May 2023 11:13 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Sun, 14 May 2023 11:13 AM IST
सार
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड पैनक्रिएटिक-बिलियरी साइंसेज के प्रोफेसर अनिल अरोड़ा ने बताया कि 6.5 सीएम के ट्यूमर से खाने की नली में भोजन अटक रहा था, जिस कारण रोगी को निगलने में परेशानी हो रही थी।
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विस्तार
मरीज को खाना निगलने में परेशानी हो रही थी। जांच की तो पता चला कि खाने की नली में नाशपाती के आकार का ट्यूमर है। समस्या बढ़ने पर 30 साल के मरीज को सर गंगा राम अस्पताल में लाया गया, यहां जांच करने पर डॉक्टरों ने 6.5 सेंटीमीटर के आकार का एक बड़ा ट्यूमर पाया। इसके कारण भोजन की नली में उभार आ गया था।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड पैनक्रिएटिक-बिलियरी साइंसेज के प्रोफेसर अनिल अरोड़ा ने बताया कि 6.5 सीएम के ट्यूमर से खाने की नली में भोजन अटक रहा था, जिस कारण रोगी को निगलने में परेशानी हो रही थी। मरीज की समस्या को देखते हुए एंडोस्कोपिक से इस ट्यूमर को हटाया गया, जो देश की मेडिकल हिस्ट्री में सबसे बड़ा है। अभी तक ऐसे ट्यूमर को बड़ा चीरा लगाकर हटाया जाता था।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉ. शिवम खरे ने कहा कि इसे हटाने के लिए सबसे पहले ट्यूमर के आकार पर खारा इंजेक्ट किया, जिससे हमें ट्यूमर को उठाने में मदद मिली और चारों और एक टनल बनाई गई। उसके बाद इसे मुंह से सफलतापूर्वक निकाला गया और मरीज को दो दिन के बाद छुट्टी दे दी गई।
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डॉ. अनिल अरोड़ा ने कहा कि बड़े ट्यूमर को एंडोस्कोपिक तरीके से हटाना बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञ एंडोस्कोपिस्ट द्वारा 3 सेमी आकार तक के नियमित अंडाकार आकार के चिकने इसोफेजियल ट्यूमर को एंडोस्कोपिक रूप से हटाया जा सकता है, लेकिन यहां ट्यूमर 6 सेमी से अधिक आकार में लोब्युलेटेड अनियमित नाशपाती के आकार का था। अनियमित आकार के कारण भोजन नली की सभी परतों से ट्यूमर को अलग करना मुश्किल हो जाता है।
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गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड पैनक्रिएटिक-बिलियरी साइंसेज के प्रोफेसर अनिल अरोड़ा ने बताया कि 6.5 सीएम के ट्यूमर से खाने की नली में भोजन अटक रहा था, जिस कारण रोगी को निगलने में परेशानी हो रही थी। मरीज की समस्या को देखते हुए एंडोस्कोपिक से इस ट्यूमर को हटाया गया, जो देश की मेडिकल हिस्ट्री में सबसे बड़ा है। अभी तक ऐसे ट्यूमर को बड़ा चीरा लगाकर हटाया जाता था।
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गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉ. शिवम खरे ने कहा कि इसे हटाने के लिए सबसे पहले ट्यूमर के आकार पर खारा इंजेक्ट किया, जिससे हमें ट्यूमर को उठाने में मदद मिली और चारों और एक टनल बनाई गई। उसके बाद इसे मुंह से सफलतापूर्वक निकाला गया और मरीज को दो दिन के बाद छुट्टी दे दी गई।
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डॉ. अनिल अरोड़ा ने कहा कि बड़े ट्यूमर को एंडोस्कोपिक तरीके से हटाना बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञ एंडोस्कोपिस्ट द्वारा 3 सेमी आकार तक के नियमित अंडाकार आकार के चिकने इसोफेजियल ट्यूमर को एंडोस्कोपिक रूप से हटाया जा सकता है, लेकिन यहां ट्यूमर 6 सेमी से अधिक आकार में लोब्युलेटेड अनियमित नाशपाती के आकार का था। अनियमित आकार के कारण भोजन नली की सभी परतों से ट्यूमर को अलग करना मुश्किल हो जाता है।