ओखला में बनेगा देश का सबसे बड़ा एसटीपी, दिल्ली जल बोर्ड की बैठक में कई परियोजनाएं मंजूर
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मुख्यमंत्री और चेयरमैन अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में बुधवार को हुई दिल्ली जल बोर्ड की 146वीं बैठक में कई अहम परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें चंद्रावल में पेयजल के लिए 48 करोड़ लीटर रोज क्षमता वाला नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, ओखला में देश का सबसे बड़ा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), किलोकरी में वाटर म्यूजियम और राजघाट में नई झील का निर्माण आदि फैसले लिए गए। 598 करोड़ लागत से तैयार होने वाले चंद्रावल के नए प्लांट से यमुना में अमोनिया के स्तर में चार गुना बढ़ोतरी होने पर भी जलापूर्ति प्रभावित नहीं होगी।
स्वच्छ यमुुना के लिए ओखला में देश के सबसे बड़े एसटीपी के निर्माण की योजना है। 1161 करोड़ की लागत वाले इस एसटीपपी में रोज 56 करोड़ 40 लाख लीटर पानी परिष्कृत किया जाएगा। एसटीपी में रोज 41,200 किग्रा ऑर्गेनिक पॉल्यूटेंट लोड और 61,600 किग्रा सॉलिड लोड हटाया जाएगा। चांदनी चौक, कश्मीरी गेट, दरियागंज, लोदी कॉलोनी, निजामुद्दीन और अन्य इलाकों में रहने वाले करीब 40 लाख लोगों को परियोजना का लाभ मिलेगा।
किलोकरी में एक वाटर म्यूजियम, ट्रेनिंग सेंटर और वाटर बॉडी के निर्माण को भी मंजूरी दी गई। वाटर, वेस्टवाटर, रेनवाटर, यमुना के साथ दिल्ली से संबंधित ऐतिहासिक जानकारियों से लोगों को रूबरू कराया जाएगा। स्कूली छात्र-छात्राएं, प्रोफेशनल्स, स्वयंसेवी संस्थाओं, विभिन्न आरडब्ल्यूए और आम लोगों के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र खोला जाएगा। इसमें वाटर कंजर्वेशन, रेनवाटर हार्वेस्टिंग, डिसेंट्रलाइज्ड वेस्टवाटर ट्रीटमेंट, वाटरबॉडी कंजर्वेशन और ग्राउंडवाटर रिचार्ज आदि से संबंधित ट्रेनिंग दी जाएगी। इस परियोजना पर करीब 12 करोड़ लागत आएगी। इसके अलावा, नजफगढ़ ड्रेनेज जोन के कमांड में 14 एसटीपी, रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग सहित अहम निर्णय लिए गए।
राजघाट बस डिपो के पास बनाई जाएगी झील
लगातार गिर रहे भूजल स्तर में सुधार और पड़ोसी राज्यों पर पानी की निर्भरता कम करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड ने रेनवाटर हार्वेस्टिंग, जलाशयों का पुनरुद्धार करने सहित राजघाट के पीछे एक नई वाटर बॉडी विकसित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। राजघाट बस डिपो के पास 40 एकड़ में झील का निर्माण किया जाएगा। इसमें पानी 15 एमजीडी क्षमता वाले एसटीपी से लाया जाएगा। इस परियोजना से भी यमुना में होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सकेगा। इस परियोजना पर 36.51 करोड़ रुपये खर्च होंगे।