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ठंड बढ़ने से सिंघु बॉर्डर पर स्वेटर-जैकेट की बढ़ी बिक्री, रेहड़ियों पर दुकान लगाने वालों को मिली राहत
Tue, 15 Dec 2020 12:55 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 15 Dec 2020 12:55 AM IST
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आंदोलन पर बैठे किसान
- फोटो : amar ujala
मौसम का पारा गिरने के साथ ही सिंघु बॉर्डर पर रेहड़ी पर गर्म कपड़ों की बिक्री करने वालों की भी कमाई हो रही है। बढ़ती मांग को देखते हुए छह-आठ अस्थायी दुकानों पर स्वेटर, जैकेट, जुराबें और टोपी की बिक्री में अचानक हुई बढ़ोतरी से दुकानदारों को भी राहत मिली है। आगे अगर लंबे समय तक आंदोलन जारी रहा, इसके लिए समर्थक भी एक से अधिक गर्म कपड़ों की खरीदारी कर रहे हैं ताकि बचाव हो सके।
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19 दिनों से कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर किसान सीमा पर डटे हुए हैं। मो. अशरफ ने कहा कि किसानों के सहयोग के लिए आए हैं, गर्म कपड़ों की खरीदारी से हमारा भी सहयोग हो रहा है। दादा किसान, इसलिए पोते को भी किसानों के दर्द का अहसास कैसे न हो। अशरफ ने कहा कि पिछले आठ साल से जहांगीरपुरी के मंगल बाजार में दुकान लगाते रहे हैं, लेकिन यहां बिक्री में बढ़ोतरी से स्वेटर, जैकेट के स्टॉक कम पड़ने लगे हैं। अगले दो-चार दिनों में सभी गर्म कपड़ों की बिक्री की उम्मीद जताते हुए कहा कि अगर जरूरत हुई तो और कपड़े लाएंगे। हर साल जहांगीरपुरी में अपनी दुकान लगाते थे, लेकिन इस बार सिंघु बॉर्डर पर किसानों की भारी संख्या में मौजूदगी को देखते हुए यहां पर दुकान लगाने का फैसला लिया। कीमत भी 350 रुपये है, इसलिए लोग आसानी से खरीद भी रहे हैं। जैकेट और कोट की मांग अधिक है।
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बॉर्डर के नजदीक के गांव में रहने वाले मो. साहिब ने बताया कि रविवार को स्टॉल लगाया, जहां सभी रंग और साइज के लोअर और जैकेट हैं। कई बार ग्राहकों की संख्या अधिक हो जाती है कि उन्हें रुकना पड़ता है। सभी कपड़े सिर्फ 250 रुपये में होने की वजह से अच्छी मांग है। यहां एक्सपोर्ट क्वालिटी के कपड़ों की भी मांग है।
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पिछले सात वर्षों से गर्म कपड़ों की बिक्री करने वाले दुकानदार सरफराज आलम का कहना है कि इस बार उनके सामान्य ग्राहक तो कम हुए हैं, लेकिन इस बार उनके खरीदार किसान और उनके समर्थक हैं। बिहार के सहरसा के किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले सरफराज ने कहा कि मुझे किसानों की परेशानियों का अंदाजा है, इसलिए अगर इस बार कारोबार अगर थोड़ा कम भी है, फिर भी मुझे शिकायत नहीं। किसानों का कहना है कि पिछले दो तीन दिनों में गर्म कपड़ों की दुकानें बढ़ी हैं।
सर्दियों से बचने के लिए खरीद रहे हैं दो-तीन गर्म कपड़े
संगरूर से आए मनदीप और गुरप्रीत सिंह ने कहा कि इन दुकानों पर बिकने वाले कपड़ों की वजह से काफी राहत मिली है। कम खर्च में सर्दियों से बचाव हो रहा है। आंदोलन में लंबे समय के लिए कंबल और जैकेट के साथ पहुंचे, लेकिन कम कीमत होने की वजह से अधिकतर किसान और समर्थक खरीद रहे हैं। लुधियाना के निवासी लाली इंद्रपाल ने कहा कि अगर आंदोलन लंबे समय तक चला तो पहले ही तैयारी कर ली है। उन्होंने 350 रुपये की कीमत वाली तीन जैकेट खरीद लिए हैं ताकि सर्दी से बचाव हो सके।