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कुछ इस तरह सियासी दुनिया में चमके 'नेताजी' मुलायम सिंह यादव

Fri, 22 Nov 2019 07:40 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Fri, 22 Nov 2019 07:40 PM IST
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In this way mulayam singh yadav shines in the political world
सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव - फोटो : amar ujala

समाजवादी पार्टी की नींव रखने वाले मुलायम सिंह यादव का अध्यापन से राजनीति तक का सफर काफी रोचक है। महज 28  साल की उम्र में विधायक बने मुलायम सिंह यादव को सियासी दुनिया में प्यार से नेताजी कहा जाता है। 

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मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला

गांव से जुड़ी हैं जड़ें

मुलायम सिंह यादव की जड़ें गांव से जुड़ी हुई हैं। 22 नवंबर 1939 को इटावा के सैफई में पैदा हुए मुलायम को उनके पिता सुघर सिंह पहलवान बनाना चाहते थे, लेकिन मुलायम ने राजनीति के अखाड़े में सफलता पाई। इटावा से ग्रेजुएशन किया और राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए आगरा पहुंचे। छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। राममनोहर लोहिया की समाजवादी विचारधारा से प्रभावित हुए और पहली बार तब उन्हें लोहिया का सानिध्य मिला जब 1966 में लोहिया इटावा पहुंचे थे। 1967 में लोहिया की पार्टी से चुनाव लड़ा और जीत का ताज पहना। लोहिया की मौत के बाद मुलायम ने चौधरी चरण सिंह की पार्टी 'भारतीय क्रांति दल' का दामन थाम लिया। 

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मुलायम सिंह यादव - फोटो : amar ujala

1989 में पहली बार बने मुख्यमंत्री

आपातकाल के समय वह मीसा में गिरफ्तार हुए और उन्हें जेल हो गई। 1979 में चौधरी चरणसिंह ने जब 'लोकदल' की स्थापना की तो मुलायम उसमें शामिल हो गए। 1989 का दौर आया तो जनता पार्टी में शामिल होकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। सात बार सांसद रहे मुलायम का राजनीतिक सफर बेहद घुमावदार रहा है। अटल बिहारी सरकार में रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभालने वाले मुलायम सिंह यादव 1989 में पहली बार यूपी के मुख्यमंत्री बने।

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मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला

कारसेवकों पर गोली चलाने का दिया था आदेश 

यह 1990 का दौर था और भारत की राजनीतिक लड़ाई मंदिर-मस्जिद के फेर में आ गई थी। मुलायम सिंह यादव उस वक्त सूबे के मुख्यमंत्री थे। 30 अक्टूबर 1990 को बाबरी मस्जिद के लिए कार सेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया था।  

मुलायम सिंह यादव ने 4 अक्तूबर 1992 को समाजवादी पार्टी की स्थापना की। तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे मुलायम 1967 में पहली बार विधायक बने। कांग्रेस विरोध के दौर में 1977 में मंत्री बने। अयोध्या मुद्दे ने मुलायम को राजनीति के शिखर पर पहुंचा दिया। यही वह दौर था जब भाजपा के हिंदू शिखर पुरुष आडवाणी, रथ लेकर निकले थे। सोमनाथ से अयोध्या तक माहौल को हिंदुत्वादी करने का दौर था। सत्ता में वीपी सिंह बैठे थे। आडवाणी की रथ यात्रा उनके माथे पर बल खींच रही थी। आडवाणी को रोकने का भारी दबाव था। जब 23 अक्टूबर को बिहार में आडवाणी की गिरफ्तारी हुई उसके कुछ दिन बाद मुलायम ने कार सेवकों पर गोली चलाने का आदेश दे दिया। 

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मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव। - फोटो : अमर उजाला

अखिलेश यादव को सौंपी कमान

2012 के चुनाव से पहले मुलायम ने बेटे अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश सपा की कमान सौंपी। इस तरह मुलायम की दूसरी पीढ़ी ने पार्टी में दस्तक दी और सूबे के सबसे युवा मुख्यमंत्री के तौर पर कमान संभाली। साल 2015 आते-आते सपा के भीतर की पारिवारिक कलह ने मीडिया में खूब सुर्खियां बंटोरी और इसके बाद पार्टी की कमान अखिलेश के हाथों में आ गई, चाचा शिवपाल यादव ने खुद की अलग पार्टी बना ली।

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मुलायम सिंह यादव - फोटो : amar ujala

विवादों में भी रहे मुलायम सिंह यादव

मुलायम सिंह यादव जब यूपी के मुख्यमंत्री थे उन्होंने अलग उत्तराखंड की मांग को लेकर दिल्ली रैली में शिरकत करने आने वाले आंदोलनकारियों पर गोलियां चलवा दीं। यह 1994 की बात है। मुलायम सिंह यादव के आदेश के बाद पुलिस ने मुजफ्फरनगर के पास रामपुर तिराहे पर आंदोलनकारियों को घेर लिया और फायरिंग कर दी। यह घटना इतिहास में रामपुर तिराहा गोलीबारी कांड के नाम से मशहूर है। घटना में छह आंदोलनकारी मारे गए। 

1995 को लखनऊ में हुए गेस्ट हाउस कांड ने मुलायम को न सिर्फ सत्ता से बेदखल किया बल्कि उनकी सियासत पर दाग भी लगा दिया। दरअसल, बसपा के समर्थन वापस लेने की घोषणा के बाद नाराज समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मायावती को बंधक बना लिया। नौ घंटे बंधक बने रहने के बाद भाजपा नेता लालजी टंडन ने अपने समर्थकों से साथ वहां पहुंचकर मायावती को वहां से सुरक्षित निकाला। 

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मुलायम सिंह यादव - फोटो : amar ujala

मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक सफर

  • 1982 से लेकर 1985 तक मुलायम सिंह यादव लोक दल (बी) के यूपी अध्यक्ष रहे।
  • 1985 से 1987 के तक मुलायम सिंह यादव 'जनता दल' के यूपी अध्यक्ष रहे।
  • 1989 से 1991 तक मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहे।
  • 1989 में ही मुलायम सिंह यादव पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
  • 1993 से 1995 तक मुलायम सिंह यादव दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।
  • 1996 में मुलायम सिंह यादव पहली बार 11वीं लोकसभा के लिए मैनपुरी से निर्वाचित हुए।
  • 1996 में मुलायम सिंह यादव अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रक्षा मंत्री रहे।
  • उन्होंने 1996 से लेकर 1998 तक रक्षा मंत्री का पद संभाला।
  • 1998-1999 में मुलायम सिंह यादव 12वीं और 13वीं लोकसभा के लिए फिर से चुने गए।
  • 1999 से 2000 के बीच मुलायम सिंह यादव पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस समिति के चेयरमैन रहे।  
  • 2003 में मुलायम सिंह यादव तीसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें और 2007 तक सूबे के सीएम रहे।
  • 2004 में मुलायम सिंह यादव 14वीं लोकसभा के लिए चौथी बार चुने गए।
  • 2009 में मुलायम सिंह यादव 15 वीं लोकसभा के लिए पांचवी बार निर्वाचित हुए।
  • 2014 में मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी और आजमगढ़ सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीते।
  • इसके बाद उन्होंने मैनपुरी सीट से इस्तीफा दे दिया। 
  • 2019 में मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी से चुनाव लड़ा और जीते। 

 

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