अग्निकांड के बाद घर से खेतों तक मोर्चा संभाल रही महिलाएं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुनपेड़ गांव की घटना में जहां दलित समाज के पीड़ित ने अपने बच्चों को खोया है। वहीं आरोपी पक्ष के लोग भी अपने बच्चों से मिलने के लिए तड़प रहे हैं।
घटना के बाद से आरोपी पक्ष के कुछ लोग गांव से बाहर हैं, जो अभी भी पुलिस गिरफ्त में नहीं आए हैं। खेतों में धान की फसल कटी पड़ी है। पुरुषों के घर पर न होने के कारण खेतों का काम रुका पड़ा है। खेतों में काम करने के लिए मजदूर भी नहीं मिल रहे हैं।
ऐसे में घर से लेकर बाजार तक का मोर्चा घर की महिलाओं ने संभाल लिया है। आरोपी पक्ष में एक व्यक्ति मामले को निपटाने के लिए सक्षम था, लेकिन पीड़ित पक्ष ने उसका नाम एफआईआर में लिखा दिया।
पुलिस ने पीड़ित पक्ष की शिकायत पर एडवोकेट एदल सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। ऐसे में थाने चौकी के अलावा खेतों और बाजार की जिम्मेदारी महिलाओं ने संभाल रखी है।
कोर्ट कचहरी का मुंह तक नहीं देखा, पर अब जाना पड़ेगा
एडवोकेट एदल सिंह की पत्नी राजबाला ने बताया कि उनकी शादी को 25 साल हो गए। लेकिन इतने सालों में कभी भी कोर्ट कचहरी की ओर कदम तक नहीं बढ़ाए। लेकिन अब इंसाफ के लिए थाने और कोर्ट के चक्कर काटने पड़ेंगे। उन्होंने बताया परिवार में उनके पति ही सबसे प्रभावशाली आदमी बचे थे।
पेशे से वकील होने के कारण पीड़ित पक्ष को सबसे ज्यादा खतरा इन्हीं से था। इसलिए पीड़ित पक्ष के लोगों ने इनका नाम रिपोर्ट में लिखवाकर गिरफ्तार करा दिया।
राजबाला ने बताया कि घरों में पुरुषों के न होने के कारण हमें हीं खेतों और बाजार के काम निपटाने पड़ रहे हैं। खेतों में फसल कट कर तैयार पड़ी है। लेकिन घर के सदस्यों के न होने के कारण खेतों से फसल तक नहीं उठ पा रही है। महिलाओं ने ये भी जिम्मेदारी संभाल ली है। बाजारों के काम के अलावा खेतों के काम भी महिलाएं कर रही हैं।