प्रभु की कृपा: पटरी पर दम तोड़ती रिंग रेल को मिलेगा नया जीवन
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दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण स्तर को कम करने का रास्ता रेल मंत्रालय ने ढूंढ लिया है। पटरी पर दम तोड़ती रिंग रेल को नया जीवन देकर रेलवे लोगों की राह आसान करेगा।
वहीं प्रदूषण का स्तर भी कम किया जा सकेगा। रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु वर्षों से उपेक्षा का दंश झेल रही रिंग रेल को बढ़ावा देंगे।
इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही तो बढ़ाई ही जाएगी। यात्रियों के पहुंचने के लिए फीडर सर्विस के तौर पर बैट्री कार भी चलाई जाएगी। ताकि, स्टेशन पहुंचने की राह आसान हो सके। रिंग रेल पर 20 कोच वाली ट्रेन चलेंगी।
90 मिनट में ट्रेन इस रिंग ट्रैक पर दूरी तय करती है
केंद्रीय रेल बजट में रिंग रेल के सभी 21 स्टेशनों को पीपीपी के सहयोग से आधुनिक बनाने की घोषणा की गई है। हजरत निजामुद्दीन से हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के बीच चलने वाली इस सेवा के बीच 21 स्टेशन हैं।
महज 90 मिनट में ट्रेन इस रिंग ट्रैक पर दूरी तय करती है। ट्रैक पर 5 ट्रेन क्लॉक वाइज व 5 ट्रेन एंटी क्लॉक वाइज चलती हैं। रिंग रेल के चारों ओर सैकड़ों आवासीय कॉलोनियां व दर्जनों कार्यालय हैं।
लेकिन, स्टेशन तक पहुंचने के लिए कोई विकल्प नहीं होने की वजह से लोग इस सेवा का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इस रिंग पर चलने वाली ईएमयू ट्रेन की 90 प्रतिशत सीटें खाली रह जाती हैं।
कहां-कहां हैं रिंग रेलवे के स्टेशन
इसे ही फिर से जीवन प्रदान किया जा रहा है। रेल प्रशासन ने दिल्ली परिवहन विभाग से मेट्रो फीडर की तर्ज पर रिंग रेल फीडर बस सेवा चलाने का सुझाव दिया था। लेकिन, परिवहन विभाग इस सुझाव पर अमल नहीं कर सका।
एशियाड गेम के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान भी इसे नया जीवन देने का प्रयास किया गया, लेकिन उस दौरान यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी। अब देखना है कि मोदी सरकार किस तरह से इसे जीवन दे पाती है।
कहां-कहां हैं रिंग रेलवे के स्टेशन
दक्षिणी दिल्ली के स्टेशन - लाजपत नगर, सेवा नगर, लोधी कॉलोनी, सरोजनी नगर हॉल्ट, सफदरजंग, चाणक्यपुरी हॉल्ट, सरदार पटेल मार्ग हॉल्ट, बरार स्क्वायर, दिल्ली इंद्रलोक हॉल्ट, नारायणा विहार हॉल्ट, कृति नगर हॉल्ट, नारायणा विहार हॉल्ट।
उत्तरी दिल्ली के स्टेशन- निजामुद्दीन, प्रगति मैदान, तिलक ब्रिज, शिवाजी ब्रिज, नई दिल्ली, सदर बाजार, दिल्ली किशनगंज, विवेकानंद पूरी, दया बस्ती और शकूरबस्ती।
एशियाड गेम के दौरान बिछा था ट्रैक
35.36 किलोमीटर वाली रिंग लाइन 1975 में बिछी थी। 1982 में एशियाई खेलों की मेजबानी मिली तो विदेशी दर्शकों एवं खिलाड़ियों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए रिंग लाइन पर सवारी रेलगाड़ी का परिचालन 8 ईएमयू से शुरू किया गया। 1982 में इस लाइन का विद्युतीकरण किया गया और खेलों के दौरान अतिरिक्त 24 रेलगाड़ियों की सेवा उपलब्ध कराई गई।
रिंग रेलवे एक नजर में
लाइन बिछाई गई
अक्तूबर 1975
यात्री रेलगाड़ी का परिचालन
अगस्त 1982
शुरूआत में परिचालन
8 ईएमयू रेलगाड़ियां
एशियाई खेल के समय
24 अतिरिक्त सेवा ट्रेन चलती थी
रिंग रेलवे की कुल दूरी
35.36 किलोमीटर
स्टेशनों एवं हाल्ट की संख्या
21
स्टेशनों पर तय ठहराव
10-15 सेकेंड
अपेक्षित यात्रियों की संख्या
3000 प्रति ईएमयू-12 कोच
क्या है परेशानी
. लो कास्ट ट्रेन को चाहिए फास्ट ट्रैक व स्टेशन तक पहुंचने का रास्ता।
. राजधानी में सार्वजनिक वाहनों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है, मेट्रो, मोनो रेल चलाने की कवायद हो रही है, लेकिन तीन दशक पहले शुरू हुई रिंग रेल पटरी पर दम तोड़ रही थी।
. फीडर बस के बिना रिंग रेल को पुनर्जीवित करना बेहद ही मुश्किल।
. रिंग रेल के स्टेशन तक पहुंचना यात्रियों के लिए कठिन, अतिक्रमण के कारण पैदल चलना भी मुश्किल।
. रिंग रेलवे चलाना लगातार घाटे का सौदा, मालगाड़ी चलाकर हो रही है भरपाई।
. रिंग रेलवे लाइन पर चलने वाली आठ ईएमयू में उपलब्ध सीटों में करीब 90 प्रतिशत खाली ही रहती हैं।
. मेट्रो फेज तीन पूरा होने पर रिंग रेल के कई स्टेशन जुड़ जाने से मिल सकता है रिंग रेल को जीवन, सराय काले खां, सरोजनी नगर, धौलछा तकुआं, नारायणा विहार समेत रिंग रेल के करीब 14 स्टेशन जुड़ जाएंगे।
. रेलवे की योजना है कि ज्यादा से ज्यादा टूरिस्ट ट्रेन चलाकर लोगों को आकर्षित किया जाए।
. नई दिल्ली से सफदरजंग का सफर महज 20 मिनट में होता है।