प्रद्युम्न मर्डर : सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका, पुलिस ने अशोक को ऐसे फंसाया
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प्रद्युम्न हत्याकांड का खुलासा करने के बाद अब सीबीआई के रडार पर गुरुग्राम पुलिस है। सीबीआई पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर जांच कर रही है। शक है प्रद्युम्न की हत्या के बाद गुरुग्राम पुलिस ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ की है और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है। सबूतों के साथ छेड़छाड़ करके ही कंडक्टर अशोक को आरोपी बनाया गया।
गत 22 सितंबर से सीबीआई ने पूरे मामले की नए एंगल से तफ्तीश शुरू की थी। इस मामले में 17 वर्षीय छात्र को काबू करने के बाद अब सीबीआई टीम गुरुग्राम के चार पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कर रही है। इन पर आरोप है कि इन्होंने प्रद्युम्न की हत्या के मामले में स्कूल बस कंडक्टर को फंसाने के लिए झूठे साक्ष्य जुटाए थे।
बता दें कि प्रद्युम्न की हत्या के बाद गुरुग्राम पुलिस ने एसआईटी का गठन किया था, जिसमें डीसीपी अशोक बख्शी, एसीपी ब्रह्म सिंह, एसीपी तान्या, एसएचओ मुकेश कुमार व एसएचओ नरेंद्र खटाना शामिल थे।
पुलिस ने सबूतों को गलत तरीके से तोड़ मरोड़ कर पेश किया
सीबीआई सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान पता चला कि गुरुग्राम पुलिस ने सबूतों को गलत तरीके से तोड़ मरोड़ कर पेश किया। इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने प्रद्युम्न ठाकुर की हत्या का आरोपी बस कंडक्टर अशोक को बताया।
सीबीआई का मानना है कि गुरुग्राम पुलिस ने जानबूझकर कई सबूतों को नजरअंदाज करते हुए मिटाने की कोशिश की। बस कंडक्टर को दोषी ठहराने के लिए कहानी और सबूत तैयार करने की कोशिश की।
सीबीआई अब शक के घेरे में आए पुलिसकर्मियों के कॉल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। ऐसे में सीबीआई कभी भी उन चार पुलिसकर्मियों को जांच के लिए बुला सकती है और उनकी गिरफ्तारी भी संभव है।
सीसीटीवी फुटेज को किया नजरअंदाज
हालांकि सूत्रों ने यह नहीं स्पष्ट किया कि इन चारों में एसआईटी के सदस्य शामिल है या कोई और। सीबीआई सूत्रों का कहना है कि इस मामले में आठ सेकेंड की सीसीटीवी फुटेज को बड़ा आधार माना है, जिसकी जांच में गुरुग्राम पुलिस से बड़ी चूक हुई थी।
इस फुटेज में आरोपी छात्र प्रद्युम्न को बुलाता और उसके पास जाता हुआ दिख रहा था। जबकि पुलिस ने इस सीसीटीवी को नजरअंदाज कर दिया था।