ट्रेड फेयर : दिल्ली में चहक रही गुजरात की चिडि़या तो वहीं फीका रहा हरियाणा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुजरात की चिड़िया चहक रही है। सुनकर आप जरा हैरान हुए होंगे। ये चिड़िया मेड इन इंडिया है। महज दो चम्मच पानी पीते ही चहकने लगती है।
प्रगति मैदान में शुरू हुए ट्रेड फेयर को अभी आम जनता के लिए खुलने में थोड़ा वक्त है। वहीं पिछले दो दिन में इस चिड़िया ने यहां आने वाले बिजनेस क्लास लोगों का मन भा लिया है।
अब तक 400 से ज्यादा चिड़िया बिक चुकी हैं। बच्चे इसे लेकर खासा उत्साहित हैं। गुजरात से आई मीना देवी बताती हैं कि वे हर साल ट्रेड फेयर में हस्तकलाओं को लेकर आती हैं। अबकी बार ग्रामीण विकास मंत्रालय के सरस मेले में उनका काउंटर लगा हुआ है।
उन्होंने बताया कि ट्रेड फेयर में कुछ स्पेशल करने की चाह में उन्होंने ये चिड़िया तैयार की है। जिन पदार्थों से चाय के प्याले बनते हैं, उन्हीं से इस चिड़िया को बनाया गया है। मीना ने बताया कि चिड़िया के ऊपरी सिरे यानी पूंछ पर एक छिद्र है, जिसमें दो चम्मच पानी डालना पड़ता है।
इसके बाद सिर के पास ही एक हवा फूंकने का रास्ता है। जैसे ही इसमें हवा का प्रवेश होता है, चिड़िया की वास्तविक आवाज बाहर आने लगती है। वे कहती हैं कि उनकी इस चिड़िया को दिल्ली में इतना लोग पसंद करेंगे, यह सोचा नहीं था।
हरियाणा दिखा फीका
पिछले वर्ष अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में लाखों दर्शकों को आकर्षित करने वाला हरियाणा का पवेलियन इस बार फीका सा दिखाई दे रहा है। महज 300 वर्गमीटर में दिल्ली, पंजाब सहित करीब पांच राज्यों के साथ हरियाणा को हैंगर में रखा गया है।
पर्याप्त जगह न होने से ट्रेडर्स भी परेशान हैं। वहीं, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के डिजिटल प्रोडक्ट्स भी इस बार हरियाणा के मंडप में नाम मात्र दिखाई दे रहे हैं। वर्चुअल के नाम पर महज एक स्क्रीन है, जिसमें मुख्यमंत्री खट्टर खड़े हैं और आने वाले लोगों को एक संदेश दे रहे हैं।
वहीं, पिछली बार स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में कुरुक्षेत्र को लेकर बेहतरीन मंडप तैयार किया गया था। जिस पर हरियाणा का नाम रोशन करने वालों के प्रतीक भी बने थे। लेकिन इस बार ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा है।
हरियाणा के व्यापारी भी मायूसी भरे जवाब दे रहे हैं। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि कम जगह मिलने से वे अजीब महसूस कर रहे हैं। स्टाल का स्पेस छोटा है तो सामान भी ज्यादा नहीं रख पा रहे हैं।
चूंकि इनमें से ज्यादातर हर साल यहां आते हैं। इसलिए महज लकीर पीटने के लिए ही उन्होंने स्टाल लगाया है। इनका कहना है कि उन्हें अबकी बार ज्यादा लोगों के आने की उम्मीद भी नहीं है।
पिछली बार हरियाणा पर ही किया था प्रयोग
दरअसल, प्रगति मैदान के पुन: निर्माण की वजह से पिछले वर्ष ही राज्यों के स्थायी मंडप हटाने की घोषणा कर दी थी। साथ ही हरियाणा पर एक प्रयोग करते हुए इसे हैंगर में रखा गया।
उस वक्त आईटीपीओ प्रबंधन ने इस प्रयोग के सफल होने की दलीलें दी। लेकिन इस बार प्रयोग का कुछ और ही रूप दिखाई दिया, जब एक साथ पांच से छह राज्यों को एक साथ हैंगर में रख दिया गया।
पिछले कुछ वर्षों की तुलना करें तो इस बार हरियाणा के मंडप से चूल्हा, बर्तन और हरियाणवीं संस्कृति भी नदारद दिखाई दी। देसां म्ह देस हरियाणा की कहावत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में कम ही दिखाई दे रही है।