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गुड़गांवः स्टाफ की कमी खनन रोकने में रोड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Wed, 25 Jun 2014 01:39 PM IST
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गुड़गांव में अवैध खनन करने वालों के हौसले बुलंद हैं। वहीं, स्टाफ की कमी के चलते विभाग इस पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगा पा रहा है। हालांकि, खनन के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, इसके बावजूद विभाग को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है।
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गुड़गांव और मेवात के तकरीबन 25 हजार एकड़ में अरावली की वादियां फैली हुई हैं। यहां पत्थरों के खनन से क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर, 2002 को किसी भी प्रकार के खनन पर अरावली में प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बावजूद गलत तरीके इस काम में लोग लगे हुए हैं। हालांकि, गुड़गांव में खनन नहीं हो रहा है, मगर मेवात में यह काफी तेजी से जारी है।
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मौसम विज्ञानी सहित आपदा विशेषज्ञों ने भी आने वाले समय में खनन के भयंकर परिणाम की भविष्यवाणी की है। गुड़गांव के सहायक खनन इंजीनियर आरएस ठाकरान भी इस बात को मानते हैं कि खनन कुछ समय से बढ़ा है।
इस पर रोक लगाने की पुरजोर कोशिश की जा रही है। इसमें सफलता भी मिली है, मगर स्टाफ की कमी के कारण जितनी धर-पकड़ होनी चाहिए, उतनी नहीं हो पा रही है।
कितनी कमी है स्टाफ की
खनन विभाग के पास 10 माइनिंग इंस्पेक्टर होने चाहिए, मगर वर्तमान में सिर्फ तीन ही इंस्पेक्टर हैं। दूसरी ओर, 22 माइनिंग गार्ड्स की अरावली में तैनाती है। जबकि, जरूरत के अनुसार इनकी संख्या 25 होनी चाहिए। इनके तीन पद खाली हैं। वहीं विभाग के पास एक माइनिंग क्लर्क भी होना चाहिए। मगर वर्तमान में एक भी नहीं है।
दूसरी ड्यूटी भी लगती है
एक तो खनन विभाग के पास पहले से ही स्टाफ की कमी ऊपर से इनकी ड्यूटी दूसरे स्थानों पर भी लगा दी जाती है। इलेक्शन में बीएलओ ड्यूटी भी दे दी जाती है।