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हर सांस में दिल्ली-एनसीआर के लोग पी रहे 20 सिगरेट जितना धुआं, इन बीमारियों का खतरा

Sat, 03 Nov 2018 07:03 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 03 Nov 2018 07:03 PM IST
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in every breath people of national capital inhailing polluted air as if smoked 20 cigarette
प्रदूषण - फोटो : self

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की हालत दिनोंदिन खतरनाक होती जा रही है। डॉक्टरों का मानना है कि हालत इतनी खराब है कि मानो 15 से 20 सिगरेट पी रहे हों। 

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लंग केयर फाउंडेशन के फाउंडर ट्रस्टी डॉ. अरविंद कुमार का कहना है कि मैं बीते 30 साल से अॉपरेशन कर रहा हूं और मैंने साफ देखा है कि लोगों के फेंफड़ों के रंग में बदलाव आया है।  
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मैंने देखा है कि जो लोग सिगरेट पीते हैं उनके फेंफड़ों में काले धब्बे पड़ जाते हैं और जो लोग नहीं पीते उनके फेंफड़े सामान्यतः गुलाबी होते हैं लेकिन इन दिनों केवल काले फेंफड़े ही देखे जा रहे हैं। हद तो यह है कि किशोरों के फेंफड़े भी काले हैं। यह बेदह डरावना है। 

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विशेषज्ञों का तो यहां तक कहना है कि इस समय ऐसी हवा है कि सिगरेट न पीने वाला भी हर सांस में 40 सिगरेट के बराबर धुआं अपने अंदर ले रहा है। इस तरह से हमारे आसपास की हवा सिगरेट पीने से भी ज्यादा खतरनाक है।


बता दें कि हवा में पीएम 2.5, 50 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से ज्यादा हो तो वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसे में इस समय इसका स्तर 200 के पार है जो स्वास्थ्य के लिए किसी खतरे से कम नहीं है। इन हालात में आपको विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। पढ़ें क्या हैं वो सावधानियां...

डॉक्टरों के अनुसार हमारे शरीर में प्रदूषण रूपी जो धुआं जा रहा है वह हमारे फेफड़ों के लिए बहुत खतरनाक है। फेफड़ों में जो चीज एक बार जाती है वह उस पर जम जाती है। इससे टीबी, दमा और कैंसर जैसी बड़ी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे बचने के लिए जब भी घर से बाहर निकलें तो मुंह पर मास्क या कपड़ा बांधकर ही निकलें। इससे शरीर में कम मात्रा में प्रदूषण जाता है।


सड़कों पर गाड़ियों की संख्या बढ़ने से जाम लगता है। इसकी वजह से गाड़ियों से प्रदूषण निकलता है और फिर हवा भी प्रदूषित हो जाती है। ये प्रदूषण रोगियों व छोटे बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक है क्योंकि, बच्चे छोटी उम्र में ही जिस तरह की हवा में सांस ले रहे हैं उम्र बढ़ने के साथ-साथ वो कई बीमारियों से घिर सकते हैं। वहीं रोगियों की तबियत और बिगड़ जाती है।

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