दिल्ली के कांग्रेस बना रही है खास घोषणापत्र
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दिल्ली विधानसभा में कांग्रेस मतदाताओं को लुभावने वायदों का पैकेज देगी। घोषणा पत्र पर सुझाव मांगने के लिए आयोजित की गई चुनावी कार्यशाला में तमाम ऐसे सुझाव आए हैं, जिनपर पार्टी विचार करेगी। पेंशन दोगुना करने, पुनर्वास कॉलोनी का फ्री में मालिकाना हक, रेहड़ी-खोमचा स्थायी करने, अनधिकृत कॉलोनी में विकास तेज करने, बिजली सब्सिडी 500 यूनिट तक बढ़ाने और ट्रैफिक जाम का हल देने के सुझाव सामने आए हैं।
घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष डॉ. एके वालिया ने बैठक में कहा कि सुझाव लिखित में दें। गांव-देहात और किसानों की अगुवाई करने वाले नेताओं ने दिल्ली देहात और दिल्ली का कनेक्शन जोड़ने के मुद्दे को शामिल करने का सुझाव दिया। इसमें भूमि अधिग्रहण, डेयरियों को मालिकाना हक देने, दूरदराज इलाकों में पट्टे की जमीन वालों को मालिकाना हक देने की बात रखी गई। पूर्व सांसद सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर, जेपी अग्रवाल, महाबल मिश्रा ने भी सुझाव दिए।
कांग्रेस की चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष हारून यूसुफ ने कहा कि जो हालात भाजपा ने दिल्ली में पैदा किए उन्हें दरकिनार नहीं किया जा सकता। त्रिलोकपुरी, बवाना, वजीरपुर का दंगा हो या फिर चर्च में आग लगाने की घटना। यह सब भाजपा की तरफ से बोये जा रहे सांप्रदायिक बीज का नतीजा है। वहीं शोएब इकबाल ने कहा कि भाजपा दिल्ली का माहौल खराब करने की दिशा में काम कर रही है और आम आदमी पार्टी के नेता बहरूपये की तरह काम कर रहे हैं।
वहीं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव अजय माकन ने लोकसभा चुनाव से पूर्व दिए गए भाषण, किए गए वादों का हवाला देकर यू-टर्न गिनवाए। उन्होंने दिल्ली के नेताओं से कहा कि कांग्रेस की तरफ से बनाई गई बुकलेट को जन-जन तक पहुंचाएं। उसमें कालेधन, चीन, पाकिस्तान, इंश्योरेंस बिल, भाजपा-एनसीपी अलायंस, कैग, रेल किराया, लोकपाल पैनल, धारा 370 वगैरा पर दिए गए बयानों का हवाला दिया। प्रजेंटेशन देकर नेताओं को कहा गया है कि यह बातें जनता तक पहुंचाएं। हालांकि प्रजेंटेशन और बुकलेट अंग्रेजी में होने के कारण वर्कशॉप में शामिल होने वाले कई नेता इस मुद्दे को अच्छे से समझ नहीं सके।
दिल्ली के हमलावर प्रचारकों की तलाश
कांग्रेस नेता इस चुनाव में हमलावर मूड में उतरना चाहते हैं। कार्यशाला में तमाम नेताओं ने रंगपुरी झुग्गियों के मामले में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के दौरे और उनकी तरफ से दिए गए बयान को आक्रामक कदम बताया है।
राहुल की नसीहत भी गई बेकार
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की नसीहत से भी दिल्ली में गुटबाजी थमती नजर नहीं आ रही है। बुधवार को आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर जो वर्कशॉप दिल्ली के नेताओं की बुलाई गई थी, उसमें पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, पूर्व सांसद संदीप दीक्षित, पूर्व मंत्री राजकुमार चौहान, पूर्व विधायक चौधरी मतीन अहमद, हसन अहमद के अलावा तमाम नेता नहीं पहुंचे। हालांकि प्रदेश कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बुलावे पर सिर्फ दो नेता नहीं आए, जिनके कहने पर यह कार्यशाला कराई गई थी।
सूत्र बताते हैं कि गत दिनों दिल्ली केनेताओं की एक बैठक राहुल गांधी ने बुलाई थी। उसमें साफ कहा था कि गुटबाजी छोड़कर दिल्ली के चुनावी माहौल में कांग्रेस केलिए जुट जाएं। फिर चुनाव से जुड़ी चार समितियां बनाई गईं। कमेटी बनाने केअगले दिन पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने साफ कर दिया कि वह कमेटी का हिस्सा नहीं बनना चाहतीं। फिर किसी समिति में संदीप दीक्षित का नाम भी नहीं था। तभी से गुटबाजी ज्यादा उभरी। उससे पहले कई पूर्व विधायक पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को सक्रिय करने की मांग राहुल गांधी से कर आए थे।