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किसान आंदोलन का असर : एनसीआर से आने वाले ग्राहकों में 75% कमी, फिर मायूस हुए कारोबारी
Thu, 15 Feb 2024 05:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 15 Feb 2024 05:46 AM IST
सार
सीमाएं सील होने से दिल्ली के बाजारों में व्यापारियों को भी मायूसी का सामना करना पड़ रहा है। एनसीआर से ग्राहकों का आवागमन थोक बाजारों में कम हो गया है। एक अनुमान के अनुसार दो दिनों से करीब 75 फीसदी ग्राहकों की संख्या हुई है।
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किसान आंदोलन
- फोटो : संवाद
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विस्तार
किसानों के आंदोलन का असर दिल्ली के व्यापार पर भी दिखने लगा है। सीमाएं सील होने से दिल्ली के बाजारों में व्यापारियों को भी मायूसी का सामना करना पड़ रहा है। एनसीआर से ग्राहकों का आवागमन थोक बाजारों में कम हो गया है। एक अनुमान के अनुसार दो दिनों से करीब 75 फीसदी ग्राहकों की संख्या हुई है। व्यापारी ट्रेन से भी आवाजाही करने से कतरा रहे हैं। यही हाल मंडियों का भी है। आढ़ती भी आवक कम होने से चिंतित नजर आ रहे हैं।
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चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री का कहना है कि दिल्ली के बाजारों में ग्राहकों की संख्या में 75 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। इतना ही नहीं 15 हजार से ज्यादा व्यावसायिक वाहनों के पहिए दिल्ली में प्रवेश से पहले ही फंसे हुए हैं। 25 हजार से ज्यादा व्यावसायिक वाहन दिल्ली में ही फंस गए हैं, क्योंकि व्यापारी बॉर्डर के बाहर जाने में असहज महसूस कर रहे हैं। दिल्ली के बाजारों में रोजाना सोनीपत, पानीपत, रेवाड़ी, बहादुरगढ़, नारनौल, गुरुग्राम, बावल, नोएडा, फरीदाबाद, गाजियाबाद समेत एनसीआर के अन्य शहरों से औसत तीन लाख खरीदार बड़े बाजारों में आते हैं।
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किसान आंदोलन के कारण इनकी संख्या में दो दिनों में कमी आई है। ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल का कहना है कि अब एक लाख से भी कम व्यापारी दिल्ली के बाजारों में खरीदारी करने पहुंच रहे हैं।
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ट्रांस्पोर्टेशन से भी माल मंगाने में डर रहे लोग
फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने बताया कि थोक बाजार में बड़ी संख्या में एनसीआर से लोग पहुंचते है। किसान आंदोलन की वजह से काफी कम लोग बाजार में पहुंच रहे है। ट्रांस्पोर्टेशन से भी माल मंगाने में लोग डर रहे हैं। सोनीपत, पानीपत समेत हरियाणा में उद्योग चला रहे दिल्ली के व्यापारियों को भी चिंता सता रही है। दिल्ली से वह फैक्ट्री तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। सोनीपत में फैक्ट्री चला रहे संतोष राय ने बताया कि फैक्ट्री आना-जाना मुख्य सड़क से मुश्किल है। इन दिनों दुविधा की स्थिति है। फैक्ट्री में कार्यरत मजदूर को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शादियों पर भी असर
किसान आंदोलन के कारण बैंक्वेट हॉल, होटल मालिकों की चिंता भी बढ़ गई है। 200 से ज्यादा बैंक्वेट हॉल, होटल, मोटेल आदि बाॅर्डर पर हैं, ऐसे में लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है।
लहसुन के भाव हो सकते हैं कम
खुदरा बाजार में लहसुन इन दिनों 500 रुपये प्रतिकिलो तक पहुंचा हुआ है। थोक बाजार में 300 रुपये प्रति किग्रा है। गार्लिक मर्चेंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष जितेंद्र खुराना ने बताया कि मौसम की वजह से मध्य प्रदेश और राजस्थान से लहसुन की आवक कम है। फसल भी इस बार देरी से आया है। उन्होंने बताया कि अगले दस दिनों में नई फसल की आवक बढ़ने की संभावना है। इससे लहसुन का भाव टूटेगा और खुदरा बाजार में भी भाव में कमी आएगी।